Nangal Chaudhary : तालोठ गांव में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा आयोजित कार्यक्रम में गूंजा सामाजिक कुरीतियों के खात्मे का संदेश
दहेज रोकथाम में सहयोग करने की शपथ लेती महिलाएं।
Nangal Chaudhary : (विजय यादव) दहेज केवल लेन-देन की सामाजिक कुप्रथा नहीं, बल्कि कई परिवारों के लिए आर्थिक बोझ और महिलाओं के सम्मान व अधिकारों के लिए गंभीर चुनौती बन रहा है। जिससे पीड़ित महिलाओं को मानसिक प्रताड़ना, घरेलू हिंसा और कई बार गंभीर सामाजिक परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।
रोकथाम के लिए युवाओं और महिलाओं को एकजुट होकर जागरूकता अभियान चलाना होगा। उक्त विचार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के एडवोकेट धर्मेश जोशी ने तालोठ गांव में व्यक्त किए हैं।
उन्होंने बताया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण नारनौल की अध्यक्ष एवं सत्र न्यायाधीश डॉ रितु वाईके बहल के निर्देशानुसार तथा प्राधिकरण की सचिव एवं मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी नारनौल के आदेशानुसार आयोजित कार्यक्रम में ग्रामीणों को दहेज प्रथा के दुष्परिणामों के बारे में जागरूक किया गया। कहा कि दहेज की मांग विवाह जैसे पवित्र रिश्ते को आर्थिक सौदे में बदल देती है।
उन्होंने ग्रामीणों से दहेज लेने और देने वालों का सामाजिक विरोध करने तथा अपने परिवार और आसपास के लोगों को भी जागरूक करने का आह्वान किया। तर्क दिया कि दहेज के कारण गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर कर्ज का बोझ बढ़ता है। बेटियों की शादी को लेकर अभिभावकों में आर्थिक चिंता पैदा होती है, जबकि विवाह का आधार आपसी सम्मान और समानता होना चाहिए।
दहेज मांगना या देना किसी समस्या का समाधान नहीं है। समाज के प्रत्येक व्यक्ति को इसकी शुरुआत अपने घर से करनी होगी। इसके बाद गांव में रैली निकालकर दहेज प्रथा रोकने, नशाखोरी भगाने तथा सामाजिक कुरीतियों को मिटाने के लिए प्रेरित किया है।
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