August 3, 2026

Haryana School Exam Pattern: हरियाणा के सरकारी स्कूलों में अब फेल होंगे बच्चे, खत्म होगी नो-डिटेंशन नीति

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Haryana School Exam Pattern: हरियाणा के सरकारी स्कूलों में अब फेल होंगे बच्चे, खत्म होगी नो-डिटेंशन नीति

हरियाणा में शिक्षकों की भी बढ़ेगी टेंशन! छात्रों के फेल होने पर नपेंगे गुरुजी

Haryana School Exam Pattern: हरियाणा के सरकारी स्कूलों में अब बिना पढ़े पास हो जाने का दौर खत्म होने वाला है। प्रदेश की नायब सिंह सैनी सरकार स्कूली शिक्षा के गिरते स्तर को सुधारने के लिए एक बेहद कड़ा और बड़ा फैसला लेने जा रही है।

नए प्रस्ताव के मुताबिक, राज्य के सरकारी विद्यालयों में कक्षा चौथी से लेकर आठवीं तक की परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह बदल दिया जाएगा। अब तक लागू ‘नो-डिटेंशन’ नीति (किसी को फेल न करने का नियम) को दरकिनार करते हुए, अब जो छात्र पढ़ाई में कमजोर रहेंगे या परीक्षा पास नहीं कर पाएंगे, उन्हें अगली कक्षा में प्रमोट नहीं किया जाएगा।

तीन-तीन महीने पर परीक्षा, बोर्ड की तर्ज पर शिक्षा विभाग तैयार करेगा पर्चा

इस नई व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों की शैक्षणिक क्षमता को जांचने के लिए साल में दो बार के बजाय अब हर तीन महीने में परीक्षाएं आयोजित होंगी। शिक्षा विभाग के तय कैलेंडर के अनुसार, जुलाई, अक्टूबर और जनवरी में त्रैमासिक परीक्षाएं ली जाएंगी, जिसके बाद अंत में वार्षिक परीक्षा होगी।

खास बात यह है कि इन परीक्षाओं के प्रश्न-पत्र स्कूल स्तर पर नहीं, बल्कि सीधे शिक्षा विभाग तैयार करके भेजेगा ताकि मूल्यांकन में पूरी पारदर्शिता रहे। मुख्यमंत्री के आदेश के बाद स्कूल शिक्षा विभाग ने इस योजना का पूरा ड्राफ्ट तैयार कर लिया है, जिसे जल्द ही आधिकारिक अधिसूचना के रूप में जारी किया जाएगा।

कॉपियों की होगी क्रॉस चेकिंग, फ्लाइंग स्क्वॉड कभी भी पूछ सकता है सवाल

सरकार ने सिर्फ छात्रों को ही नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था को कसने की तैयारी की है। परीक्षा के बाद बच्चों की उत्तर पुस्तिकाओं (कॉपियों) की रैंडम और क्रॉस चेकिंग कराई जाएगी। सभी कॉपियों को स्कूलों में सुरक्षित रिकॉर्ड के तौर पर रखना अनिवार्य होगा।

विभागीय टीमें किसी भी वक्त स्कूलों का औचक निरीक्षण (सरप्राइज चेकिंग) कर सकती हैं और कॉपियों के आधार पर सीधे छात्र से सवाल पूछ सकती हैं। अगर कोई छात्र अपनी ही कॉपी में लिखे उत्तर का संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया, तो संबंधित स्कूल और शिक्षकों के खिलाफ कड़ा एक्शन लिया जाएगा।

हर परीक्षा के बाद PTM और शिक्षकों का भी तय होगा ‘परफॉर्मेंस इंडेक्स’

इस पूरी कवायद का एक बड़ा सिरा अध्यापकों और अभिभावकों से भी जुड़ता है। हर तीन महीने की परीक्षा के तुरंत बाद स्कूलों में पेरेंट्स-टीचर मीटिंग (PTM) बुलाना लाजमी होगा, जहां माता-पिता को उनके बच्चे के कमजोर विषयों और अंकों की लाइव रिपोर्ट दी जाएगी। इसके साथ ही शिक्षकों का भी एक रिपोर्ट कार्ड बनेगा।

जिस शिक्षक की क्लास का रिजल्ट सबसे शानदार रहेगा, उन्हें सरकार सम्मानित करेगी। वहीं, जिन क्लास के बच्चे पिछड़ेंगे, वहां संबंधित शिक्षक को ही विशेष क्लास लगाकर बच्चों को तैयार करना होगा। गौरतलब है कि निपुण भारत मिशन के तहत पहली से तीसरी कक्षा तक यह थ्री-मंथली असेसमेंट पहले से चल रहा है, लेकिन चौथी से आठवीं तक फेल करने का प्रावधान जुड़ जाने से अब पूरी व्यवस्था बदलने वाली है।

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