Ahoi Ashtami Puja Samagri: मंगलकामना का सजीव प्रतीक है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को पड़ने वाले इस व्रत में माताएं अपनी संतान की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और जीवन में आने वाले सभी संकटों से रक्षा के लिए दिनभर निर्जला उपवास रखती हैं। शाम के समय अहोई माता यानी पार्वती जी के स्वरूप की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि जो माताएं पूरी निष्ठा से यह व्रत करती हैं, उनकी संतान को अहोई माता का अखंड आशीर्वाद प्राप्त होता है। ऐसे में पूजा की तैयारियों में किसी तरह की कमी न रहे, इसके लिए सामग्री की सूची पहले से ही तैयार कर लेना श्रेयस्कर होता है।
अहोई अष्टमी पूजा सामग्री की पूरी लिस्ट (Ahoi Ashtami Puja Samagri)
पूजा को शास्त्रोक्त विधि से संपन्न करने के लिए नीचे दी गई सामग्रियों को पहले से ही एकत्रित कर लें:
चित्र व स्थापना: अहोई माता की तस्वीर या कैलेंडर, लकड़ी की साफ चौकी, बिछाने के लिए लाल या पीला वस्त्र।
पूजन सामग्री: रोली, कुमकुम, हल्दी, अक्षत (साबुत चावल), ताजे फूल और फूलों की माला।
दीप और धूप: देसी घी या तिल के तेल का दीपक, रुई की बाती, धूपबत्ती और अगरबत्ती।
कलश व अर्घ्य: जल से भरा तांबे या पीतल का लोटा (कलश), गेहूं या चावल के दाने (कथा सुनते समय हाथ में रखने के लिए)।
भोग व फलाहार: घर में बना भोग (हलवा, पूरी या मालपुए), ऋतु फल, सूखे मेवे, कच्चा दूध और दही।
परंपरागत सामग्री: चांदी की अहोई (स्याऊ) और उसमें पिरोने के लिए चांदी के मोती, पूजा की थाली और यथाशक्ति दक्षिणा।
हर सामग्री का है विशेष धार्मिक महत्व, जानें रोली से लेकर जल अर्पण की महिमा
अहोई अष्टमी की पूजा में प्रयुक्त होने वाली हर छोटी-बड़ी वस्तु का अपना एक गहरा आध्यात्मिक अर्थ है। शास्त्रों में रोली और कुमकुम को शुभता का प्रतीक माना गया है, जबकि अक्षत जीवन में पूर्णता और संपन्नता का भाव दर्शाते हैं। पुष्पों से माता का मनमोहक श्रृंगार किया जाता है और जलते हुए दीपक की लौ घर से नकारात्मकता को दूर कर सुख-समृद्धि लाती है।
पूजा में रखे जल से भरे कलश का सबसे अधिक महत्व है, क्योंकि शाम को तारों के निकलने पर इसी जल से अहोई माता का ध्यान करते हुए अर्घ्य दिया जाता है। अहोई माता को अर्पित किया जाने वाला घर का बना शुद्ध भोग संतान के जीवन में मिठास और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है।
ऐसे सजाएं पूजा की थाली और समझें सही पूजा विधि
अहोई अष्टमी की पूजा के लिए सबसे पहले घर के पवित्र स्थान पर एक साफ चौकी रखें और उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। चौकी पर अहोई माता का चित्र स्थापित करें और उनके सामने घी का दीपक प्रज्वलित करें। अब पूजा की थाली तैयार करें, जिसमें रोली, अक्षत, फूल, मिठाई और फल व्यवस्थित रूप से रखें। पास में ही जल से भरा कलश रखें।
इसके बाद हाथ में गेहूं के दाने लेकर अहोई अष्टमी की प्रामाणिक व्रत कथा सुनें या पढ़ें। कथा संपन्न होने के बाद अहोई माता की आरती उतारें और परिवार के साथ मिलकर संतान की लंबी आयु की प्रार्थना करें। शाम को जब आसमान में तारे स्पष्ट दिखाई देने लगें, तो लोटे के जल से तारों को अर्घ्य दें और माता-पिता व घर के बुजुर्गों का आशीर्वाद लेकर परंपरा अनुसार अपने व्रत का पारण करें।

