Ambala Building Collapse News: 6 मौतों के बाद अस्पताल में भारी बवाल, 8 लाख में सौदेबाजी का आरोप; अनिल विज ने दिए SIT जांच के आदेश
6 मौतों के बाद अस्पताल में भारी बवाल, 8 लाख में सौदेबाजी का आरोप
Ambala Building Collapse News: अंबाला में तीन मंजिला निर्माणाधीन इमारत के भरभराकर ढहने और 6 मजदूरों की मौत का मामला अब गरमा गया है। सोमवार को अंबाला सिटी स्थित सिविल अस्पताल उस वक्त अखाड़ा बन गया जब मृतकों के गुस्साए परिजनों ने पुलिस प्रशासन और इमारत मालिक के खिलाफ जोरदार हंगामा शुरू कर दिया। परिजनों का आरोप है कि हादसे के बाद मामले को दबाने के लिए 8 लाख रुपये में सौदेबाजी की कोशिश की जा रही थी। इस बीच पूर्व केंद्रीय मंत्री विनोद शर्मा ने अस्पताल पहुंचकर घायलों को 25-25 हजार और मृतकों के आश्रितों को 1-1 लाख रुपये अपने निजी कोष से देने की घोषणा की है।
अस्पताल में घूस की कोशिश पर हंगामा, महिला हुई बेहोश
सोमवार दोपहर करीब साढ़े तीन बजे अस्पताल परिसर में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब परिजनों ने आरोप लगाया कि जग्गी प्रॉपर्टीज/बिल्डिंग मालिक का एक नुमाइंदा उनके पास आया और 8 लाख रुपये देकर केस रफा-दफा करने का दबाव बनाने लगा। इस ड्रामे के दौरान एक महिला बदहवास होकर बेहोश हो गई। मौके पर मौजूद पुलिस ने आनन-फानन में बीच-बचाव करते हुए उस व्यक्ति को भीड़ से बचाकर हिरासत में लिया। इससे पहले सुबह घायलों का हाल जानने पहुंचे कैबिनेट मंत्री अनिल विज को भी तीखे विरोध का सामना करना पड़ा।
’10 की मौत हुई, 4 लाशें गायब कीं’— पुलिस और निगम पर उठे सवाल
प्रदर्शनकारियों ने स्थानीय पुलिस और नगर निगम कमिश्नर की भूमिका पर बेहद संगीन आरोप लगाए हैं। परिजनों का दावा है कि हादसे में कुल 10 मजदूरों की जान गई थी, लेकिन प्रशासन केवल 6 मौतों की पुष्टि कर बाकी 4 शवों को गायब कर रहा है। इसके साथ ही क्षेत्र के एसएचओ और निगम अधिकारियों पर अवैध निर्माण के एवज में मंथली (रिश्वत) वसूलने का आरोप लगाते हुए उन्हें तुरंत सस्पेंड करने की मांग की गई। जनता के भारी आक्रोश को देखते हुए मंत्री अनिल विज ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय एसआईटी (SIT) जांच कराने का आश्वासन दिया है। उधर एसपी अजीत सिंह शेखावत ने स्पष्ट किया कि अवैध निर्माण और भवन मालिक की भूमिका की गहनता से पड़ताल की जा रही है।
घटिया शटरिंग और हर 15 दिन में लेंटर— चश्मदीदों की जबानी लापरवाही की कहानी
इमारत में काम करने वाले मजदूरों ने निर्माण में बरती जा रही खुली लापरवाही का पर्दाफाश किया है। बिहार के पूर्णिया निवासी मजदूर रामचंद्र ने बताया कि 2 दिन पहले ही छत के लिए शटरिंग की गई थी, लेकिन मिस्त्री ने शटरिंग इतनी घटिया और कमजोर लगाई थी कि उसने डर के मारे काम छोड़ दिया था।
वहीं मजदूर कर्ण ने बताया कि 4 जुलाई को काम शुरू हुआ था और ठेकेदार हर 15 दिन के भीतर ताबड़तोड़ लेंटर ढलवा रहा था। हादसे के वक्त पहली मंजिल पर पलस्तर चल रहा था, दूसरी पर फर्श ढल रहा था और तीसरी मंजिल पर नया लेंटर डाला जा रहा था। क्षमता से अधिक भार और घटिया निर्माण के कारण पूरी इमारत का पिछला हिस्सा अचानक जमींदोज हो गया।
खौफनाक मंजर: सामने की दुकान चलाने वाले सुमंत ने बताया कि रविवार दोपहर जोरदार धमाके के साथ इमारत नीचे आ गिरी। धूल का गुब्बार छंटते ही तीसरी और दूसरी मंजिल से मजदूर जान बचाने के लिए नीचे छलांग लगाते दिखे, जिससे कई लोगों की टांगें टूट गईं। वहीं मलबे में दबे मिस्त्री वेद प्रकाश ने बताया कि हाथ टूटने के बावजूद उन्होंने जैसे-तैसे खुद को ईंटों और सरियों के बीच से बाहर निकाला।
13 जून 2026 को हुआ था ठेका
राजस्व विभाग के दस्तावेजों के अनुसार, 25 फीट चौड़ी और 123.6 फीट लंबी इस जमीन को वर्ष 2019 में पंचकूला निवासी अजय द्वारा गांव गोली की एक महिला को बेचा गया था। इसके बाद महिला ने 13 जून 2026 को 200 रुपये प्रति वर्ग गज के हिसाब से ठेकेदार मलकीत सिंह को निर्माण का ठेका सौंपा था। ठेकेदार ने एडवांस रकम लेकर तेजी से अवैध निर्माण शुरू कराया, जो आखिरकार 6 बेकसूर मजदूरों की मौत की वजह बन गया।
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