अंबाला का ऐतिहासिक फूलडोल मेला: पंचामृत स्नान से नौका भ्रमण तक निभाई गई परंपरा

अंबाला में जन्माष्टमी के बाद निकली श्रीकृष्ण की फूलडोल शोभायात्रा, फूलों से हुआ स्वागत
अंबाला छावनी (Ambala Phooldol Mela): हरियाणा के अंबाला में जन्माष्टमी के दूसरे दिन भगवान श्रीकृष्ण की पालकी के साथ निकलने वाली फूलडोल शोभायात्रा आज भी पुरानी धार्मिक परंपरा को जीवित रखे हुए है। अंबाला छावनी की अनाज मंडी स्थित श्री सत्संग सभा शिवाला रजि. शिव मंदिर में आयोजित इस मेले में हरियाणा और पंजाब के अलग-अलग जिलों से श्रद्धालु पहुंचे। मंदिर के पुजारी देव ढोंडियाल के अनुसार, मंदिर करीब 150 साल से भी अधिक पुराना है और ब्रिटिश काल से यहां फूलडोल मेले की परंपरा चली आ रही है।
जन्माष्टमी के दूसरे दिन मंदिर में सबसे पहले भगवान श्रीकृष्ण को पंचामृत से स्नान करवाया गया। इसके बाद पूजा-अर्चना और छप्पन भोग की प्रक्रिया पूरी हुई। धार्मिक अनुष्ठानों के बाद नौका की परंपरा निभाई गई और फिर भगवान श्रीकृष्ण की पालकी के साथ फूलडोल मेले की शोभायात्रा निकाली गई।
पंचामृत स्नान और छप्पन भोग के बाद हुई नौका की परंपरा
फूलडोल मेले के दौरान भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी कई पारंपरिक रस्में निभाई गईं। पुजारी देव ढोंडियाल बताते हैं कि सबसे पहले ठाकुर जी को पंचामृत से स्नान करवाया गया और पूजा के बाद उन्हें छप्पन भोग लगाया गया।
इसके बाद पानी के कुंड में भगवान श्रीकृष्ण को नौका में विराजमान किया गया। कुंड में नौका भ्रमण की यह परंपरा मेले के धार्मिक आयोजन का खास हिस्सा रही। इसके बाद भगवान कृष्ण को पालकी में विराजमान कर शोभायात्रा निकाली गई।
अंबाला में दो पालकियों के साथ निकली श्रीकृष्ण की शोभायात्रा
फूलडोल मेले की शोभायात्रा में दो पालकियां शामिल हुईं। इनमें एक पालकी श्री कैलाश मंदिर हाथी खाना से आई, जबकि दूसरी पालकी अनाज मंडी स्थित श्री सत्संग सभा शिवाला रजि. शिव मंदिर से निकली।
दोनों पालकियों में भगवान श्रीकृष्ण को विराजमान कर बाजारों में भ्रमण कराया गया। शोभायात्रा जिस रास्ते से गुजरी, वहां श्रद्धालुओं ने फूल बरसाकर भगवान का स्वागत किया। बड़ी संख्या में लोग पालकी के साथ चलते रहे और कई जगह आतिशबाजी भी की गई।
शोभायात्रा बीपीएस प्लेनेटोरियम तक पहुंची
भगवान श्रीकृष्ण की शोभायात्रा बाजारों से होकर सुभाष पार्क के सामने स्थित बीपीएस प्लेनेटोरियम तक पहुंची। यहां पालकी को कुछ देर विश्राम दिया गया। इसके बाद शोभायात्रा वापस अनाज मंडी स्थित मंदिर पहुंची।
मंदिर में पालकी के लौटने के बाद भगवान श्रीकृष्ण की आरती की गई। इसके बाद दोबारा छप्पन भोग लगाया गया। पूरे आयोजन के दौरान मंदिर और आसपास के बाजारों में श्रद्धालुओं की भीड़ रही।
59 वर्षीय श्रद्धालु बोले- बचपन से मेले का इंतजार रहता है
फूलडोल मेले से जुड़ी आस्था केवल एक दिन के धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है। श्रद्धालु अनिल, जिनकी उम्र 59 वर्ष है, बताते हैं कि वह बचपन से इस मेले में शामिल होते आ रहे हैं।
अनिल के मुताबिक, उन्हें पूरे साल फूलडोल मेले का इंतजार रहता है। उनके लिए यह सिर्फ मेला नहीं बल्कि परिवार और समाज की कई पीढ़ियों से चली आ रही आस्था और परंपरा है। यही वजह है कि हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण की शोभायात्रा में शामिल होते हैं।
