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Health Tips: शरीर में मैग्नीशियम की कमी तो नहीं? ऐंठन और थकान जैसे लक्षणों को न करें नजरअंदाज

Health Tips: शरीर में मैग्नीशियम की कमी तो नहीं? ऐंठन और थकान जैसे लक्षणों को न करें नजरअंदाज

शरीर में मैग्नीशियम की कमी तो नहीं? ऐंठन और थकान जैसे लक्षणों को न करें नजरअंदाज

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GGaganpreet Kaur

Health Tips: भागदौड़ भरी जिंदगी और असंतुलित खानपान के बीच भारतीयों में न्यूट्रिशन की कमी एक आम समस्या बन चुकी है। जब भी सेहत की बात होती है, तो अमूमन लोग विटामिन डी और बी12 का लेवल चेक कराने या उनके सप्लीमेंट्स लेने तक सीमित रह जाते हैं। लेकिन इस बीच एक बेहद महत्वपूर्ण मिनरल—मैग्नीशियम—चुपचाप नजरअंदाज हो जाता है।

कैलाश दीपक हॉस्पिटल की कंसल्टेंट डायटेटिक्स ऋचा शर्मा बताती हैं कि शरीर में मैग्नीशियम का सही स्तर बना रहना उतना ही जरूरी है जितना कि अन्य विटामिन्स का। अगर इसकी कमी हो जाए, तो मांसपेशियों में खिंचाव, टांगों में ऐंठन, बेवजह सुस्ती और थकान जैसी समस्याएं शरीर को घेरने लगती हैं।

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शरीर में कमी होने पर दिखने लगते हैं ये लक्षण

विशेषज्ञों के मुताबिक, मैग्नीशियम की कमी के शुरुआती संकेत इतने सामान्य होते हैं कि लोग अक्सर इन्हें दिनभर की भागदौड़ का नतीजा मानकर टाल देते हैं।

शुरुआती संकेत: लगातार थकान या कमजोरी महसूस होना, जी मिचलाना (Nausea), भूख कम लगना और नसों या मांसपेशियों में हल्का खिंचाव।

बढ़ती समस्या के लक्षण: हाथ-पैरों का सुन्न पड़ना या उनमें झनझनाहट (Tingling Sensation) होना।

गंभीर स्थिति: यदि शरीर में मैग्नीशियम का स्तर ज्यादा गिर जाए, तो नर्वस सिस्टम, मांसपेशियों की कार्यप्रणाली और हृदय गति पर बुरा असर पड़ सकता है। कुछ मामलों में दौरे (Seizures) आने या दिल की धड़कन अनियंत्रित होने का खतरा भी बन जाता है।

इसके अलावा, मैग्नीशियम शरीर में कैल्शियम और पोटैशियम जैसे अन्य महत्वपूर्ण मिनरल्स का संतुलन बनाए रखने में कैटालिस्ट की तरह काम करता है।

क्या मैग्नीशियम की कमी से कैंसर का खतरा रहता है?

आम लोगों के बीच यह सवाल भी अक्सर उठता है कि क्या मैग्नीशियम की कमी सीधे तौर पर कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से जुड़ी है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इसे थोड़ा वैज्ञानिक नजरिए से समझने की जरूरत है। फिलहाल ऐसा कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं है जो यह साबित करे कि मैग्नीशियम की कमी से सीधे कैंसर होता है। हालांकि, कुछ अंतरराष्ट्रीय शोध यह जरूर संकेत देते हैं कि मैग्नीशियम का कम स्तर शरीर में क्रोनिक इंफ्लेमेशन (सूजन) और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को बढ़ावा देता है।

चूंकि मैग्नीशियम शरीर में कोशिकाओं की मरम्मत और डीएनए रिपेयरिंग (DNA Repair) जैसी मौलिक प्रक्रियाओं में भूमिका निभाता है, इसलिए इसकी कमी से ऐसे हालात बन सकते हैं जो आगे चलकर कोशिकाओं के असामान्य व्यवहार से जुड़ते हैं। फिर भी, इस विषय पर ठोस और अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए बड़े पैमाने पर चिकित्सकीय शोध जारी हैं।

रोजमर्रा की भारतीय डाइट से कैसे करें भरपाई?

राहत की बात यह है कि मैग्नीशियम की कमी को दूर करने के लिए महंगे सप्लीमेंट्स पर निर्भर रहने के बजाय अपनी रसोई में थोड़ा बदलाव करना ही काफी है।

नट्स और सीड्स: रोजाना की डाइट में बादाम, काजू, तिल और कद्दू के बीज (Pumpkin Seeds) को शामिल करें।

हरी सब्जियां: पालक जैसी हरी पत्तेदार सब्जियां मैग्नीशियम का सबसे समृद्ध जरिया मानी जाती हैं।

देसी अनाज और दालें: भारतीय खानपान में इस्तेमाल होने वाले राजमा, काले-सफेद चने, बाजरा, रागी और विभिन्न दालें मैग्नीशियम की कमी को आसानी से पूरा करती हैं।

अन्य विकल्प: एवोकाडो और डार्क चॉकलेट भी मैग्नीशियम के अच्छे स्रोत हैं।

खानपान में विविधता बनाए रखकर और इन चीजों को नियमित आहार का हिस्सा बनाकर मैग्नीशियम के स्तर को स्वाभाविक रूप से संतुलित रखा जा सकता है।

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