Ambala Shaheed Smarak: अंबाला कैंट में आजादी की पहली लड़ाई के अमर नायकों की याद में निर्मित भव्य शहीद स्मारक में आयोजित लाइट एंड साउंड शो का अवसर ऐतिहासिक पलों का गवाह बना। कार्यक्रम के दौरान सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा विभाग के आयुक्त के. मकरंद पांडुरंग ने हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज को स्मृति चिन्ह भेंट कर विशेष रूप से सम्मानित किया। मकरंद पांडुरंग ने इस मौके पर अंबाला की धरा पर शहीदों की स्मृति को अक्षुण्ण बनाए रखने और इस भव्य स्मारक को धरातल पर उतारने में अनिल विज के अनवरत प्रयासों व संकल्प की खुले दिल से सराहना की।
विज का वर्षों पुराना संकल्प चढ़ा परवान, इतिहास को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की मुहिम
यह सम्मान इसलिए भी बेहद खास माना जा रहा है क्योंकि अंबाला कैंट में 1857 की क्रांति के वीरों के लिए बना यह स्मारक अनिल विज का ड्रीम प्रोजेक्ट रहा है। विज लंबे समय से इस बात की पैरवी करते आ रहे थे कि स्वतंत्रता संग्राम में हरियाणा और अंबाला के रणबांकुरों के बलिदान को राष्ट्रीय स्तर पर वह स्थान मिलना चाहिए जिसके वे हकदार हैं। उनका सदा से मानना रहा है कि आजादी का इतिहास महज किताबों के पन्नों तक सिमट कर न रह जाए, बल्कि आने वाली पीढ़ियां इस महान संघर्ष और बलिदान की गौरवगाथा को अपनी आंखों से देखें और महसूस करें।
800 करोड़ की लागत से बना भव्य स्मारक, 23 गैलरियों में उकेरी गई क्रांति की दास्तान
अनिल विज के अथक प्रयासों से आकार ले चुका यह शहीद स्मारक आज अंबाला को देश के मानचित्र पर एक नई ऐतिहासिक पहचान दे रहा है। लगभग 800 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस विश्वस्तरीय परिसर में 23 आधुनिक गैलरियां बनाई गई हैं, जहां 1857 की क्रांति के हर छोटे-बड़े ऐतिहासिक प्रसंगों को सहेजा गया है। परिसर में 700 से अधिक वीर शहीदों के नाम स्वर्ण अक्षरों में अंकित किए गए हैं। इसके अलावा 68 मीटर ऊंचा विशालकाय कमल के आकार का टावर, 2500 दर्शकों की क्षमता वाला ओपन एयर थिएटर और अत्याधुनिक प्रोजेक्शन तकनीक से लैस लाइट एंड साउंड शो इस स्मारक की भव्यता में चार चांद लगा रहे हैं।


