Ayodhya Sawan festival: रामलला के झूला दर्शन के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, नाग पंचमी पर विशेष रौनक

रामलला के झूला दर्शन के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, नाग पंचमी पर विशेष रौनक
Ayodhya Sawan festival: अयोध्या। सावन के पवित्र महीने में रामनगरी अयोध्या की सदियों पुरानी भक्ति और उल्लास से सराबोर धार्मिक परंपरा एक बार फिर जीवंत हो उठी है। नव-निर्मित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के गर्भगृह में सोमवार से प्रभु रामलला का भव्य झूलनोत्सव श्रद्धा और उल्लास के साथ शुरू हो गया। इस अलौकिक अवसर पर बाल रूप में विराजमान उत्सव मूर्ति को विशेष रूप से निर्मित स्वर्ण-जड़ित चांदी के झूले पर आसीन कराया गया। प्राकृतिक देशी-विदेशी फूलों की महक और रंग-बिरंगी रोशनी से सजे इस झूले पर रामलला के मनभावन स्वरूप को निहारने के लिए श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा।
कजरी और सखी भाव के गीतों से गुंजायमान हुआ मंदिर परिसर
झूलनोत्सव के शुभारंभ के साथ ही पूरा राम जन्मभूमि परिसर भक्ति के सागर में गोते लगाता नजर आया। गर्भगृह के समक्ष संतों, सेवादारों और भक्तों ने सखी भाव से ओतप्रोत होकर पारंपरिक सावन कजरी, बधाई गीत और मधुर भजन प्रस्तुत किए। ढोलक, मंजीरे और शास्त्रीय धुनों के बीच जब रामलला का झूला धीरे-धीरे गतिमान हुआ, तो वहां मौजूद हर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठा। सावन की हरियाली और भक्ति के इस माहौल में श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर अपने आराध्य के दिव्य दर्शन प्राप्त किए।
त्रेतायुगीन मान्यताओं से जुड़ा है सावन में झूला झुलाने का महात्म्य
अयोध्या के विभिन्न मठ-मंदिरों में सावन मास में भगवान श्रीराम, माता जानकी और उनके दिव्य विग्रहों को झूले पर विराजमान कराकर सेवा-पूजा करने की अति प्राचीन परंपरा है। local संतों व रामचरितमानस के अध्येताओं के अनुसार, इस झूलनोत्सव की जड़ें त्रेतायुग की स्मृतियों से जुड़ी हैं।
धार्मिक मान्यता है कि भगवान श्रीराम के प्राकट्य के लगभग चार माह पश्चात जब पहला सावन आया था, तब माता कौशल्या ने महारानी कैकेयी व सुमित्रा के साथ मिलकर चारों राजकुमारों—राम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न को झूले में बिठाकर दुलारा था। उस समय राजमहल की सखियों द्वारा सावन के पारंपरिक कजरी गीत गाए जाते थे। यही वात्सल्य और भक्ति रस कालांतर में रामनगरी की अनूठी सांस्कृतिक धरोहर बन गया।
नाग पंचमी पर शेषावतार मंदिर में उमड़ी भक्तों की भीड़
इसी धार्मिक श्रृंखला में, नाग पंचमी के पावन पर्व पर अयोध्या स्थित प्रसिद्ध शेषावतार मंदिर में भगवान लक्ष्मण के दर्शनों के लिए भक्तों का विशेष तांता देखने को मिला। सनातन धर्म में भगवान श्री लक्ष्मण को साक्षात शेषनाग का अवतार माना जाता है। ऐसे में नाग पंचमी पर उनके विशेष पूजन, जलाभिषेक और दर्शन का बड़ा धार्मिक महत्व है। कुल मिलाकर, सावन का यह झूला उत्सव केवल एक अनुष्ठान भर नहीं है, बल्कि यह अयोध्या की कालजयी आस्था, अटूट परंपरा और भक्ति चेतना का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
यह भी पढ़ें– महाकाल मंदिर में करंट की अफवाह से भगदड़ जैसे हालात, 13 की तबीयत बिगड़ी, 40 हजार श्रद्धालु लाइन में
