Ayurvedic Eating Rules: मौजूदा दौर में हमारी लाइफस्टाइल इतनी बदल चुकी है कि खान-पान के तौर-तरीके भी पूरी तरह बिगड़ गए हैं। आज के समय में लोग सिर्फ पेट भरने या रस्म अदायगी के लिए खाना खाते हैं। कोई ऑफिस के लैपटॉप पर आंखें गड़ाए हुए लंच निगलता है, तो कोई मोबाइल की स्क्रीन या टीवी देखते हुए खाना खाता है। जब हमारा ध्यान भोजन पर होता ही नहीं है, तो हमें यह तक याद नहीं रहता कि हमने हर कौर को कितनी बार चबाया है। लेकिन, प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद इस बात पर जोर देती है कि सेहत के लिए केवल पौष्टिक चीजें खाना ही काफी नहीं है, बल्कि आप किस तरीके से भोजन कर रहे हैं, यह भी बहुत मायने रखता है।
गलत तरीके से जल्दबाजी में खाना खाने से पाचन तंत्र बुरी तरह प्रभावित होता है, जिससे गैस, अपच और कब्ज जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। आयुर्वेद में भोजन करने के कुछ बेहद वैज्ञानिक और असरदार नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करके पाचन शक्ति को मजबूत रखा जा सकता है। खाने के सही समय से लेकर भोजन के तापमान, पानी पीने के सही संतुलन और खाने के बाद की आदतों तक, ये तमाम बातें अच्छी सेहत की नींव रखती हैं।
1. शांत और एकाग्रचित होकर करें भोजन
आयुर्वेद की मानें तो खाना हमेशा एक शांत, स्वच्छ और सुकून भरे माहौल में बैठकर खाना चाहिए। भोजन करते वक्त टीवी देखने, मोबाइल पर रील्स स्क्रॉल करने या तेज आवाज में बातें करने से पूरी तरह बचना चाहिए। ऐसा करने से हमारा मस्तिष्क भोजन के स्वाद और उसकी मात्रा पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित नहीं कर पाता। हर कौर को इत्मीनान से और अच्छी तरह चबाकर खाएं। न तो बहुत जल्दी-जल्दी खाना निगलें और न ही भोजन करने में जरूरत से ज्यादा लंबा समय लगाएं।
2. न हो बहुत गर्म और न ही बहुत ठंडा खाना
आजकल कई लोगों को एकदम उबलता हुआ गर्म खाना पसंद होता है, तो वहीं कुछ लोग फ्रिज में रखी ठंडी चीजें सीधे खा लेते हैं। आयुर्वेद के दृष्टिकोण से भोजन का तापमान संतुलित होना चाहिए। खाना न तो आग की तरह बहुत गर्म होना चाहिए और न ही रेफ्रिजरेटर का बहुत ठंडा। सामान्य तापमान या हल्का गुनगुना (lukewarm) भोजन पेट के लिए सबसे मुफीद माना जाता है, जो पाचन अग्नि को शांत किए बिना भोजन को आसानी से पचाने में मदद करता है।
3. थाली में शामिल हों आयुर्वेद के ‘छह रस’
हमारी पारंपरिक थाली कभी भी एक जैसी चीजों से नहीं बनती थी। आयुर्वेद में छह स्वादों—मीठा, खट्टा, नमकीन, तीखा, कड़वा और कसैला—को भोजन का एक अनिवार्य हिस्सा माना गया है। इसलिए अपनी डेली डाइट में अलग-अलग रंगों और स्वादों वाली चीजों को जगह दें। ताजे फल, दालें, हरी सब्जियां और सलाद का सही मिश्रण भोजन में विविधता और जरूरी पोषण दोनों सुनिश्चित करता है।
4. पानी पीने के सही नियम का रखें ध्यान
अक्सर लोग खाना खाते वक्त बीच-बीच में या खाने के तुरंत बाद पानी का गिलास गटक जाते हैं। आयुर्वेद के अनुसार भोजन से ठीक पहले या तुरंत बाद बहुत सारा पानी पीना पाचन रस (Digestive juices) को पतला कर देता है, जिससे खाना ठीक से पचता नहीं है। यदि भोजन के दौरान ज्यादा प्यास महसूस हो, तो केवल एक-दो घूंट गुनगुना पानी ही पिया जा सकता है। पानी और भोजन के बीच कम से कम आधे से एक घंटे का अंतराल रखना सबसे बेहतर माना जाता है।
5. हल्का हो रात का भोजन और डिनर का सही समय
दिनभर की भागदौड़ के बाद रात का भोजन हमेशा हल्का-फुल्का होना चाहिए ताकि सोते वक्त पेट पर ज्यादा दबाव न पड़े। आयुर्वेद सलाह देता है कि रात का डिनर हमेशा सोने से कम से कम दो से तीन घंटे पहले कर लेना चाहिए। इससे शरीर को खाए हुए भोजन को पचाने के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है और सुबह उठने पर पेट हल्का और ऊर्जावान महसूस होता है।
6. खाने के बाद सुस्ती न दिखाएं, करें शत-पावली
भोजन करने के तुरंत बाद बिस्तर पर लेट जाना या सो जाना सेहत के लिए धीमे जहर जैसा है। आयुर्वेद में रात के मुख्य भोजन के बाद कुछ देर टहलने की पुरजोर सलाह दी जाती है। आप आराम-आराम से 100 कदम (शत-पावली) चल सकते हैं। इस हल्की सी सैर से पेट में भारीपन, एसिडिटी या खट्टी डकारों की समस्या से काफी हद तक राहत मिल जाती है।
7. भारी शारीरिक मेहनत या कसरत से बनाएं दूरी
खाना खाने के तुरंत बाद जिम जाना, भारी-भरकम वजन उठाना या कोई भी कठिन शारीरिक गतिविधि करना सेहत के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। भोजन के बाद शरीर का सारा रक्त परिसंचरण (Blood circulation) पाचन क्रिया में मदद करने के लिए पेट की ओर केंद्रित होता है। इसलिए खाने के तुरंत बाद शरीर को थोड़ा विश्राम देना चाहिए। कुछ देर सामान्य गतिविधियों में रहने के बाद ही किसी भी प्रकार की कसरत या मेहनत वाला काम शुरू करें।
यह भी पढ़ें– बढ़ती उम्र में भी दिखना चाहती हैं जवां और खूबसूरत? रोजाना पिएं ये 5 असरदार होममेड डिटॉक्स ड्रिंक्स

