Bhiwani News: हरियाणा के भिवानी स्थित पंडित नेकीराम शर्मा राजकीय मेडिकल कॉलेज और जिला नागरिक अस्पताल प्रशासन के बीच शुरू हुई अफसरशाही की लड़ाई अब आम मरीजों पर भारी पड़ने लगी है। दोनों विभागों के बीच हरियाणा कौशल रोजगार निगम (HKRN) के कर्मचारियों की तैनाती को लेकर खींचतान इस कदर बढ़ गई है कि अस्पताल परिसर में अव्यवस्था का माहौल कायम हो गया है। नागरिक अस्पताल प्रशासन ने मेडिकल कॉलेज में भेजे गए अपने 27 HKRN कर्मचारियों को वापस ड्यूटी पर लौटने का फरमान जारी कर दिया है, जिसके बाद दोनों संस्थान आमने-सामने आ गए हैं।
महज दो महीने पहले यानी 27 जुलाई को ही एक आधिकारिक पत्र जारी कर इन 28 कर्मचारियों को मेडिकल कॉलेज में तैनात किया गया था। लेकिन अब नागरिक अस्पताल के प्रधान चिकित्सा अधिकारी (PMO) ने नया पत्र जारी कर इनमें से 27 कर्मचारियों को तुरंत प्रभाव से वापस बुला लिया है। इस प्रशासनिक अदला-बदली और संशय के बीच कर्मचारी भी असमंजस में फंसे हैं कि वे आखिर कहां ड्यूटी दें।
पर्ची काउंटरों पर लगीं लंबी कतारें, डॉक्टरों को खुद संभालने पड़ रहे मरीज
कर्मचारियों की अचानक वापसी का सीधा असर अस्पताल की जमीनी व्यवस्था पर देखने को मिल रहा है। इन 27 कर्मचारियों में से 5 की ड्यूटी मुख्य रजिस्ट्रेशन काउंटर पर पर्ची बनाने में लगी थी। उनके हटते ही काउंटरों पर मरीजों की लंबी-लंबी कतारें लग गईं और लोगों को घंटों अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है।
यही नहीं, ऑर्थो और सर्जरी वार्डों में तैनात 9 वार्ड सर्वेंट (अटेंडेंट) को भी वापस बुला लिया गया है। नतीजतन, वार्डों में व्यवस्था संभालने वाला कोई नहीं बचा और मरीज सीधे डॉक्टरों के केबिनों में दाखिल हो रहे हैं। इस वजह से डॉक्टरों को इलाज छोड़कर मरीजों को संभालने और लाइन में लगाने जैसे बुनियादी काम खुद करने पड़ रहे हैं। वापस बुलाए गए स्टाफ में सुपरवाइजर, डीईओ, लिफ्ट ऑपरेटर, टेलीफोन ऑपरेटर, ओटी असिस्टेंट, एक्सरे-अल्ट्रासाउंड और सफाई कर्मचारी शामिल हैं।
मंत्री आरती राव तक पहुंचा मामला, पीएमओ और एमएस के अपने-अपने तर्क
भिवानी में मेडिकल कॉलेज डायरेक्टर/एमएस और सीएमओ/पीएमओ के बीच चल रही यह कोई पहली तकरार नहीं है। इससे पहले भी दोनों प्रशासनिक अधिकारियों का यह विवाद प्रदेश की स्वास्थ्य मंत्री आरती राव के दरबार तक पहुंच चुका है। उस समय मंत्री ने दोनों अधिकारियों को मामले के निपटारे के लिए चंडीगढ़ तलब करने की बात कही थी, लेकिन धरातल पर स्थितियां सुधरने के बजाय और उलझ गई हैं।
मामले पर अपना पक्ष रखते हुए पीएमओ डॉ. बलवान सिंह ने बताया कि मेडिकल कॉलेज शुरू होने के समय से ही अस्पताल के करीब 84 कर्मचारी (जिनमें 20-25 स्टाफ नर्सें और HKRN कर्मी शामिल हैं) वहां सेवाएं दे रहे थे। इससे नागरिक अस्पताल का कामकाज ठप हो रहा था, जबकि मेडिकल कॉलेज ने अपनी स्टाफ नर्सों को तुरंत वापस बुला लिया था। इसीलिए नागरिक अस्पताल की व्यवस्था बचाने के लिए कर्मचारियों को वापस बुलाया गया है।
दूसरी ओर, मेडिकल कॉलेज के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. धीरज परिहार ने इस कदम पर सख्त ऐतराज जताया है। उनका कहना है कि अचानक 27 कर्मचारियों को वापस बुलाकर मेडिकल कॉलेज की सुचारू व्यवस्था को बाधित करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम की लिखित शिकायत उच्च अधिकारियों को भेज दी है और उम्मीद जताई है कि जल्द ही कोई बीच का रास्ता निकालकर स्वास्थ्य सेवाओं को पटरी पर लाया जाएगा।
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