नई दिल्ली: वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को कहा कि भारत ने अंतरिम व्यापार समझौते के तहत अमेरिका को सेब पर कोटा-आधारित शुल्क रियायत दी है, जबकि घरेलू सेब उत्पादकों के हितों को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है। गोयल ने संवाददाताओं से कहा कि हमारे सेब किसान पूरी तरह सुरक्षित हैं और चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है।'' भारत हर साल अमेरिका सहित अन्य देशों से लगभग छह लाख टन सेब का आयात करता है। उन्होंने यह भी कहा कि अंतरिम व्यापार समझौते के तहत कृषि उत्पादों सहित कई भारतीय वस्तुओं पर अमेरिका में शून्य जवाबी शुल्क लगेगा।


उन्होंने बताया कि भारत के कुछ फलों, सब्जियों, चाय और कॉफी पर भी अमेरिका में शून्य शुल्क लगेगा। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत ने अमेरिका को डेयरी उत्पाद, चीनी या मोटे अनाज पर कोई शुल्क रियायत नहीं दी है। गोयल ने आगे कहा कि यह समझौता किसानों, एमएसएमई, हस्तशिल्प और हथकरघा के हितों को किसी भी तरह से नुकसान नहीं पहुंचाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि भारत ने अल्कोहल युक्त पेय पदार्थ, सौंदर्य प्रसाधन और चिकित्सा उपकरणों जैसे क्षेत्रों में अमेरिका को शुल्क रियायतें दी हैं। व्यापार समझौते के तहत भारत को कुछ वाहनों और विमानों के कलपुर्जों पर भी अमेरिका में शून्य जवाबी शुल्क का लाभ मिलेगा।


भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के तहत अमेरिका के सेब पर 25 प्रतिशत आयात शुल्क

प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के तहत भारत ने अमेरिका से आने वाले सेब पर 80 रुपये प्रति किलोग्राम का न्यूनतम आयात मूल्य (एमआईपी) और 25 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया है। इसका प्रभावी अर्थ यह है कि अमेरिका से 100 रुपये प्रति किलोग्राम से कम कीमत वाले सेब का आयात नहीं किया जा सकता। इस समझौते पर मार्च के मध्य तक हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। इस समय आयातित सेब पर 50 प्रतिशत आयात शुल्क और 50 रुपये प्रति किलोग्राम का एमआईपी लागू है, जो प्रभावी रूप से 75 रुपये प्रति किलोग्राम से कम कीमत वाले सेब के आयात को रोकता है। व्यापार समझौते के तहत भारत को कुछ वाहनों और विमानों के कलपुर्जों पर भी अमेरिका में शून्य जवाबी शुल्क का लाभ मिलेगा।


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