August 26, 2026

Disability Pension: दिव्यांगता पेंशन पर केंद्र सरकार को झटका, हाईकोर्ट ने कहा- भर्ती के वक्त फिट सैनिक को पेंशन से वंचित नहीं कर सकते

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Disability Pension: दिव्यांगता पेंशन पर केंद्र सरकार को झटका, हाईकोर्ट ने कहा- भर्ती के वक्त फिट सैनिक को पेंशन से वंचित नहीं कर सकते

दिव्यांगता पेंशन पर केंद्र सरकार को झटका, हाईकोर्ट ने कहा- भर्ती के वक्त फिट सैनिक को पेंशन से वंचित नहीं कर सकते

Disability Pension: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सेना से 1989 में डिस्चार्ज किए गए पूर्व सैनिक को दिव्यांगता पेंशन (Disability Pension) का लाभ देने के मामले में केंद्र सरकार को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (AFT) के फैसले को चुनौती देने वाली केंद्र सरकार की याचिका को सिरे से खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने अपने लैंडमार्क फैसले में स्पष्ट कर दिया कि यदि किसी सैनिक को भर्ती के समय मेडिकल जांच में पूरी तरह फिट पाया गया था और बाद में सेवाकाल के दौरान उसे कोई बीमारी होती है, तो कानूनन यह मानकर चला जाएगा कि वह बीमारी सैन्य सेवा की परिस्थितियों के कारण ही हुई है।

32 साल देरी का केंद्र का तर्क खारिज, एएफटी के फैसले को हाईकोर्ट ने सही ठहराया

जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस अमरिंदर सिंह ग्रेवाल की खंडपीठ ने पूर्व सैनिक भूपिंदर सिंह से जुड़े मामले पर सुनवाई करते हुए यह अहम फैसला सुनाया। भूपिंदर सिंह ने सेना में 18 वर्ष और 215 दिन की सेवा पूरी की थी और उन्हें 31 जुलाई 1989 को डिस्चार्ज किया गया था। भर्ती के समय (29 दिसंबर 1970) वे पूरी तरह स्वस्थ थे, लेकिन सेवा के दौरान उन्हें ‘इस्केमिक हार्ट डिजीज’ हो गई थी। चंडीगढ़ एएफटी ने 6 मई 2024 को उन्हें डिस्चार्ज की अगली तारीख से 20 प्रतिशत दिव्यांगता को 50 प्रतिशत तक राउंड ऑफ करके पेंशन देने का आदेश दिया था। केंद्र सरकार ने 32 साल की देरी और मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट का हवाला देकर इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

सुप्रीम कोर्ट की नज़ीर: मेडिकल बोर्ड की हवा-हवाई रिपोर्ट से छीना नहीं जा सकता हक

केंद्र सरकार की दलीलों को खारिज करते हुए खंडपीठ ने कहा कि बिना किसी ठोस और तार्किक आधार के तैयार की गई मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट किसी पूर्व सैनिक के वैधानिक अधिकारों को खत्म नहीं कर सकती। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसलों को उद्धृत करते हुए कहा कि भर्ती के वक्त अगर मेडिकल रिकॉर्ड में किसी बीमारी का उल्लेख नहीं है, तो सैनिक को सेवा में प्रवेश के समय पूरी तरह फिट माना जाएगा। ऐसे में बाद में स्वास्थ्य में आया कोई भी बिगाड़ सेवा की कठिन परिस्थितियों का ही परिणाम माना जाता है।

दिव्यांगता की राउंडिंग ऑफ का भी मिलेगा पूरा लाभ

दिव्यांगता को 20 फीसदी से बढ़ाकर 50 फीसदी राउंड ऑफ करने के मुद्दे पर हाईकोर्ट ने ‘राम अवतार केस’ में सुप्रीम कोर्ट के तय सिद्धांतों का हवाला दिया। अदालत ने कहा कि कानून के तहत दिव्यांगता पेंशन के हकदार सशस्त्र बल कर्मियों को नियमानुसार राउंडिंग ऑफ (Rounding Off) का फायदा मिलना तय है। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सशस्त्र बल न्यायाधिकरण के फैसले में किसी भी तरह के हस्तक्षेप से इनकार करते हुए केंद्र की अर्जी खारिज कर दी।

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