August 2, 2026

Fatehabad PACS Bank Scam: फतेहाबाद के अयाल्की पैक्स में 76 लाख का गबन, सीएम फ्लाइंग की रेड में खुली 3 प्रबंधकों की पोल

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Fatehabad PACS Bank Scam: फतेहाबाद के अयाल्की पैक्स में 76 लाख का गबन, सीएम फ्लाइंग की रेड में खुली 3 प्रबंधकों की पोल

किसानों के लोन का पैसा डकार गए पैक्स बैंक के मैनेजर

Fatehabad PACS Bank Scam: फतेहाबाद के ग्रामीण अंचल में किसानों और आम उपभोक्ताओं की गाढ़ी कमाई से जुड़ी सहकारी संस्था में भ्रष्टाचार का एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। गांव अयाल्की स्थित दी अयाल्की बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि सहकारी समिति लिमिटेड (पैक्स) में करीब 76 लाख रुपये का चूना लगाने का खेल चल रहा था।

इस संगठित वित्तीय अपराध का पर्दाफाश तब हुआ जब मुख्यमंत्री उड़नदस्ते (हिसार) की टीम ने बैंक के दफ्तर पर औचक छापा मारा। अधिकारियों द्वारा जब बैंक के दस्तावेजी रिकॉर्ड और कैश बुक का मिलान किया गया, तो वहां आंकड़ों की जो बाजीगरी देखने को मिली, उसने जांच टीम के भी होश उड़ा दिए।

सेंट्रल बैंक के नाम पर होती थी फर्जी एंट्री, लोन की वसूली की रकम भी डकार गए अफसर

उप निरीक्षक जितेंद्र सिंह और राजेश कुमार के नेतृत्व में गठित संयुक्त जांच टीम की रिपोर्ट के मुताबिक, इस पैक्स बैंक में जनवरी 2020 से लेकर मार्च 2026 तक यानी पिछले 6 साल के दौरान कुल 61 ऐसी वित्तीय कड़ियां मिली हैं, जहां सीधे तौर पर कानून की धज्जियां उड़ाई गईं।

घोटाले का तरीका बेहद शातिराना था; बैंक की कैश बुक में यह दर्ज कर दिया जाता था कि अमुक राशि सेंट्रल बैंक की मुख्य शाखा में जमा करा दी गई है, जबकि हकीकत में वह पैसा मुख्य शाखा तक पहुंचता ही नहीं था। इसके अलावा, जब ग्रामीण और किसान अपने लोन (कर्ज) की किस्तें चुकाने आते थे, तो उनसे पूरी रकम वसूलने के बावजूद ऑन-रिकॉर्ड बेहद कम राशि दिखाई जाती थी और बाकी का पैसा अधिकारी आपस में बांट लेते थे।

सरकारी पैसे से पर्सनल अकाउंट रिचार्ज, रसीद बुक की तारीखों में भी किया फेरबदल

जांच की परतों को जैसे-जैसे खोला गया, भ्रष्टाचार के नए-नए तरीके सामने आते गए। एक मामले में तो हद ही हो गई जब एक अधिकारी ने 75 हजार रुपये की सरकारी राशि बैंक के खाते में डालने के बजाय सीधे अपने व्यक्तिगत (पर्सनल) बैंक अकाउंट में ट्रांसफर कर ली।

यही नहीं, उपभोक्ताओं से वसूले गए मोटे ब्याज की रकम को डकारने के लिए बैंक की आधिकारिक रसीद बुक की तारीखों और पन्नों के साथ भी जमकर छेड़छाड़ और फेरबदल किया गया ताकि ऊपरी तौर पर सब कुछ सामान्य दिखे।

पांच साल तक सोते रहे सरकारी ऑडिटर, सदर थाना पुलिस ने कसा शिकंजा

इस पूरे मामले का सबसे हैरान करने वाला पहलू यह है कि वर्ष 2020 से लेकर 2025 तक इस पैक्स बैंक का हर साल बाकायदा नियमानुसार सरकारी ऑडिट (लेखा परीक्षा) होता रहा।

इसके बावजूद किसी भी ऑडिटर या निरीक्षण टीम ने इतनी बड़ी गड़बड़ियों पर कभी कोई आपत्ति नहीं जताई और न ही उच्च अधिकारियों को इसकी भनक लगने दी। इसे सीधे तौर पर ऑडिटर्स की मिलीभगत और लापरवाही मानते हुए पुलिस ने उन्हें भी लपेटे में लिया है।

थाना सदर फतेहाबाद पुलिस ने मुख्यमंत्री उड़नदस्ते की लिखित शिकायत पर तत्कालीन पैक्स प्रबंधक सूबे सिंह, पूर्व प्रबंधक राजबीर सिंह, मौजूदा प्रबंधक बलवंत सिंह सहित संबंधित विभागीय ऑडिटरों और तत्कालीन निरीक्षण टीमों के खिलाफ विभिन्न आपराधिक धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया है। पुलिस अब इस बात की कड़ाई से जांच कर रही है कि गबन की गई इस भारी-भरकम राशि का निवेश कहां-कहां किया गया है।

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