Ganesh Utsav आज से शुरू: बच्चों से करवाएं ये 5 छोटे काम, मानसिक विकास के साथ मिलेंगे संस्कार

बच्चों से करवाएं ये 5 छोटे काम, मानसिक विकास के साथ मिलेंगे संस्कार
Ganesh Utsav: गणपति बप्पा के आगमन का इंतजार अब खत्म हो चुका है। 14 सितंबर से घर-घर और बड़े-बड़े पंडालों में विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश की प्रतिमाएं विराजमान होंगी, जिसके साथ ही 10 दिनों तक चलने वाले पावन गणेशोत्सव की शुरुआत हो जाएगी। अमूमन इस उत्सव के दौरान हमारा पूरा ध्यान पूजा की भव्यता, मोदक के प्रसाद और पंडालों की सजावट पर ही केंद्रित रहता है। हालांकि, अगर थोड़ा ध्यान दिया जाए तो यह महापर्व बच्चों के कोमल मन में भारतीय संस्कृति, संस्कार और जीवन के बुनियादी मूल्य पिरोने का एक बेहतरीन मौका भी बन सकता है।
शास्त्रों में भगवान श्री गणेश को ज्ञान, बुद्धि और शुभता का प्रतीक माना गया है। ऐसे में यदि इस 10 दिवसीय उत्सव के दौरान बच्चों को पूजा-पाठ से जुड़ी छोटी-छोटी जिम्मेदारियां दी जाएं, तो वे खेल-खेल में अपनी जड़ों से जुड़ेंगे और उनमें अनुशासन की नींव भी मजबूत होगी।
स्वच्छता और सहयोग का पाठ: पूजा घर की सफाई से करें शुरुआत
गणेश स्थापना से ठीक पहले जब घर में तैयारियां चल रही हों, तो बच्चों को केवल दर्शक बनाने के बजाय पूजा स्थल की सफाई और सजावट में सक्रिय रूप से शामिल करें। उन्हें प्यार से समझाएं कि स्वच्छता केवल किसी त्योहार या विशेष अवसर तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह हमारी रोजमर्रा की जीवनशैली का अभिन्न अंग है। जब बच्चे खुद हाथों में झाड़न या फूल-मालाएं लेकर मंडप सजाएंगे, तो उनमें घर के कामकाज में हाथ बंटाने और जिम्मेदारी निभाने की भावना स्वतः विकसित होगी।
अन्न का आदर और मंत्रोच्चार से बढ़ेगी एकाग्रता
घर में बने ताजे मोदक या सात्विक पकवानों का पहला भोग बच्चों के हाथों से ही भगवान गणेश को अर्पित करवाएं। इस दौरान उन्हें बताएं कि ईश्वर को भोग लगाना वास्तव में उस अन्न और प्रकृति की कृपा के प्रति धन्यवाद प्रकट करने का एक माध्यम है। इससे बच्चे भोजन की बर्बादी न करने का सबक भी सीखेंगे।
वहीं, पूजा के दौरान बच्चों को अपने पास बिठाकर ‘ॐ गं गणपतये नमः’ जैसे सरल और प्रभावकारी मंत्रों का जाप कराएं। चूंकि प्रथम पूज्य गणेश जी बुद्धि के अधिष्ठाता देव हैं, इसलिए मंत्रोच्चार का यह अभ्यास बच्चों में एकाग्रता, मानसिक शांति और सकारात्मक विचार शक्ति को बढ़ाने में बेहद मददगार साबित होता है।
बड़ों के प्रति सम्मान और सेवा भाव: गणेश जी की पौराणिक कथा से दें सीख
आरती और पूजा संपन्न होने के बाद बच्चों को घर के माता-पिता, दादा-दादी और अन्य वरिष्ठ सदस्यों के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेने के लिए प्रेरित करें। इसी पल में उन्हें गणेश जी की वह अमर कथा सुनाई जा सकती है, जब उन्होंने केवल अपने माता-पिता (भगवान शिव और माता पार्वती) की परिक्रमा करके पूरी सृष्टि की परिक्रमा का पुण्य प्राप्त किया था। यह कथा बच्चों के मन में माता-पिता और बड़ों के प्रति असीम सम्मान जगाने के लिए सबसे सटीक उदाहरण है।
इसके अलावा, गणेशोत्सव के दौरान बच्चों के हाथों से किसी जरूरतमंद व्यक्ति को फल, भोजन या कपड़े दान करवाएं। जब बच्चे अपने हाथों से किसी की मदद करेंगे, तो उनके दिल में दया, संवेदनशीलता और खुशियां बांटने का सच्चा बोध जागेगा। वास्तव में यही किसी भी त्योहार का सबसे खूबसूरत और व्यावहारिक संदेश है।
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