Girls Marriage Case: पटना में दो अलग-अलग धर्मों की छात्राओं ने भागकर की शादी, जानिए कोर्ट ने क्या सुनाया फैसला

पटना में दो अलग-अलग धर्मों की छात्राओं ने भागकर की शादी, जानिए कोर्ट ने क्या सुनाया फैसला
Girls Marriage Case: बिहार की राजधानी पटना से सामाजिक मान्यताओं और पारिवारिक बंदिशों को दरकिनार करने वाली एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। शहर के अदालतगंज इलाके की रहने वाली दो स्कूली छात्राओं ने प्यार में हदें पार करते हुए एक-दूसरे से शादी रचा ली।
दोनों लड़कियां न केवल आपस में पड़ोसी और गहरी सहेलियां हैं, बल्कि अलग-अलग धर्मों से ताल्लुक भी रखती हैं। इनमें से एक छात्रा 10वीं कक्षा में पढ़ती है जिसके पिता सीआईडी (CID) में तैनात बताए जा रहे हैं, वहीं दूसरी छात्रा 12वीं की पढ़ाई कर रही है। पिछले तीन वर्षों से चल रहे इस प्रेम संबंध को दोनों ने आखिरकार शादी का रूप देने का फैसला कर लिया।
घर से भागकर खगड़िया के मंदिर में लिए सात फेरे
दोनों छात्राओं ने योजना बनाकर 7 अगस्त को बिना किसी को बताए घर छोड़ दिया। उस वक्त उनके पास केवल 3,500 रुपये की नगदी मौजूद थी। पटना से सीधे खगड़िया पहुंचकर उन्होंने वहां स्थित एक स्थानीय मंदिर में हिंदू रीति-रिवाज से शादी रचाई और उसके बाद एक होटल में रात बिताई। इधर, जब दोनों लड़कियां अचानक गायब हुईं तो परिजनों के होश उड़ गए। परिजनों ने आनन-फानन में पटना के कोतवाली थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने सर्विलांस से किया ट्रैक्स, थाने में अड़ीं दोनों
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कोतवाली थाने की महिला पुलिस अधिकारी पूनम कुमारी की अगुवाई में विशेष टीम बनाई गई। पुलिस ने सर्विलांस और लोकेशन की मदद से दोनों लड़कियों को खगड़िया रेलवे स्टेशन के पास से सुरक्षित बरामद कर पटना वापस लाया। हालांकि, महिला थाने में पूछताछ के दौरान दोनों लड़कियों का रुख पूरी तरह सख्त रहा। उन्होंने पुलिस और परिजनों के सामने दो टूक कह दिया कि वे एक-दूसरे से बेहद प्यार करती हैं और अब ताउम्र साथ ही रहेंगी। दोनों ने ही अपने-अपने माता-पिता के साथ घर लौटने से साफ मना कर दिया।
कोर्ट का फैसला: बालिग को आजादी, नाबालिग रिमांड होम भेजी गई
कोतवाली थाना प्रभारी अजय कुमार ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस जांच और कागजातों की छानबीन में एक लड़की के बालिग होने और दूसरी के नाबालिग होने की पुष्टि हुई। इसके बाद दोनों को अदालत में पेश किया गया। जज के सामने भी दोनों ने साथ रहने की इच्छा दोहराई। कानूनी पहलुओं को देखते हुए अदालत ने नाबालिग छात्रा को उसकी सुरक्षा और देखरेख के लिए बाल सुधार गृह (रिमांड होम) भेजने का आदेश दिया, जबकि बालिग लड़की को उसकी इच्छानुसार कहीं भी रहने और जाने की पूरी आजादी दे दी गई।
