Breaking News
Ludhiana Accident : लुधियाना के ट्रांसपोर्ट नगर में एंबुलेंस की लेट-लतीफी ने ली घायल की जाननाना पाटेकर की मौत की जांच शुरू, गोवा पुलिस ने दर्ज किया अप्राकृतिक मौत का मामला; देर शाम हुआ अंतिम संस्कारBhiwani News: भिवानी में बुजुर्ग महिला को सुंघाया नशीला पदार्थ, ऑटो सवारों ने ठगे सोने के बालेLadwa Anaj Mandi Accident: लाडवा अनाज मंडी में बड़ा हादसा, सिलेंडरों से भरे ट्रक ने धान की ट्रॉली को मारी टक्कर, ढाबे में घुसा ट्रैक्टरTarn Taran News : तरनतारन में किसानों को रबी फसलों की आधुनिक खेती के तरीके सिखाएLudhiana Accident : लुधियाना के ट्रांसपोर्ट नगर में एंबुलेंस की लेट-लतीफी ने ली घायल की जाननाना पाटेकर की मौत की जांच शुरू, गोवा पुलिस ने दर्ज किया अप्राकृतिक मौत का मामला; देर शाम हुआ अंतिम संस्कारBhiwani News: भिवानी में बुजुर्ग महिला को सुंघाया नशीला पदार्थ, ऑटो सवारों ने ठगे सोने के बालेLadwa Anaj Mandi Accident: लाडवा अनाज मंडी में बड़ा हादसा, सिलेंडरों से भरे ट्रक ने धान की ट्रॉली को मारी टक्कर, ढाबे में घुसा ट्रैक्टरTarn Taran News : तरनतारन में किसानों को रबी फसलों की आधुनिक खेती के तरीके सिखाए

Haaiwan Review: 18 साल बाद साथ आए अक्षय-सैफ, अक्षय बने खूंखार साइको किलर; जानें फिल्म में कसने कौन सा करदार नभाया

VVinita Kohli
Haaiwan Review: 18 साल बाद साथ आए अक्षय-सैफ, अक्षय बने खूंखार साइको किलर; जानें फिल्म में कसने कौन सा करदार नभाया

18 साल बाद साथ आए अक्षय-सैफ

शेयर करें
AI Quick Summary

Want to save time? Let our AI read the article and give you 3 quick bullet points.

Listen to this article
AUDIO VERSION

Haaiwan Review: अक्षय कुमार और सैफ अली खान की जोड़ी करीब 18 साल बाद बड़े पर्दे पर साथ नजर आई है। दोनों के साथ इस बार सस्पेंस फिल्मों के लिए मशहूर निर्देशक प्रियदर्शन हैं। फिल्म ‘हैवान’ रिलीज हो चुकी है और अगर आप सिनेमाघर जाने की तैयारी कर रहे हैं, तो पहले जान लीजिए कि सैफ का अंधा हीरो और अक्षय का खूंखार साइको किलर वाली यह कहानी कितना असर छोड़ती है।

‘हैवान‘ प्रियदर्शन की 2016 में आई मलयालम फिल्म ‘ओप्पम’ की रीमेक है। कहानी में मर्डर मिस्ट्री, बदले की आग, एक खतरनाक हत्यारा और एक ऐसे हीरो का मुकाबला है, जो देख नहीं सकता, लेकिन आवाज और आहट से खतरे को पहचानने की जबरदस्त क्षमता रखता है।

विज्ञापन

 

 

क्या है ‘हैवान‘ की कहानी?

फिल्म में सैफ अली खान श्याम का किरदार निभा रहे हैं। श्याम जन्म से नेत्रहीन है, लेकिन मार्शल आर्ट्स का उस्ताद है। उसकी सुनने और चीजों को महसूस करने की क्षमता इतनी तेज है कि वह आसपास मौजूद खतरे को बिना देखे भी भांप लेता है। श्याम एक पॉश सोसाइटी में मेंटेनेंस मैनेजर का काम करता है। कहानी उस वक्त करवट लेती है जब सोसाइटी के सदस्य और रिटायर्ड जज प्रधान की हत्या हो जाती है।

हत्या से पहले जज प्रधान श्याम को अपने अतीत के एक खौफनाक राज के बारे में बताते हैं। इस राज का संबंध परशुराम से है, जिसका किरदार अक्षय कुमार ने निभाया है। परशुराम कभी एक बेगुनाह लड़का था, लेकिन जज के गलत फैसले के कारण उसे सजा हुई। उसका परिवार तबाह हो गया और वह मानसिक अस्पताल पहुंच गया। जेल से बाहर आने के बाद वही शख्स अब साइको किलर बन चुका है और जज से जुड़े लोगों को एक-एक करके निशाना बना रहा है। अब परशुराम की अगली नजर जज की सीक्रेट बेटी नंदिनी पर है। उसे इस खूंखार हत्यारे से बचाने की जिम्मेदारी श्याम के ऊपर आ जाती है।

 

 

सैफ अली खान ने अपने अभिनय से जीता दिल

‘हैवान’ की सबसे बड़ी ताकत सैफ अली खान हैं। उन्होंने श्याम की मजबूरी, उसके आत्मविश्वास और उसके आसपास की दुनिया को महसूस करने के तरीके को काफी सधे हुए अंदाज में निभाया है। किरदार में कहीं भी बनावटीपन नजर नहीं आता। खासकर वे दृश्य असर छोड़ते हैं, जहां श्याम सिर्फ आहटों के सहारे खतरे को पहचानता है। एक्शन सीन्स में भी सैफ की फुर्ती देखने लायक है। उन्होंने ओवरएक्टिंग से बचते हुए बॉडी लैंग्वेज के जरिए किरदार को ज्यादा रियल बनाने की कोशिश की है। यही वजह है कि फिल्म के तनावपूर्ण हिस्सों में सैफ लगातार ध्यान खींचते हैं।

 

 

अक्षय कुमार बने साइको किलर, लेकिन स्क्रिप्ट ने किया निराश

परशुराम के रूप में अक्षय कुमार का किरदार पहली नजर में फिल्म की सबसे बड़ी यूएसपी लगता है। उनकी कद-काठी, चाल-ढाल और आंखों में दिखती सनक शुरुआत में एक डर जरूर पैदा करती है। अक्षय कई दृश्यों में बिना ज्यादा संवाद बोले सिर्फ अपने हाव-भाव से माहौल बनाने की कोशिश करते हैं। लेकिन यहां सबसे बड़ी समस्या किरदार की कमजोर लिखावट बन जाती है।

परशुराम के अतीत में काफी संभावनाएं थीं। उसके साथ हुई कथित नाइंसाफी, परिवार के बर्बाद होने और मानसिक अस्पताल तक पहुंचने की कहानी को और गहराई मिलती, तो यह किरदार कहीं ज्यादा प्रभावी हो सकता था। फिल्म में कई जगह अक्षय सिर्फ घूरते या खड़े दिखाई देते हैं। शुरुआत का डर धीरे-धीरे कम होने लगता है। अक्षय की मेहनत नजर आती है, लेकिन स्क्रिप्ट उनके किरदार को वह मजबूती नहीं दे पाती जिसकी जरूरत थी।

 

 

असरानी की आखिरी फिल्म, बोमन ईरानी ने भी छोड़ी छाप

दिवंगत अभिनेता असरानी की यह आखिरी फिल्म है। उन्होंने सोसाइटी के सिक्योरिटी गार्ड हुसैन का किरदार निभाया है। उनका ‘लाश मैंने पहले देखी’ वाला सीन फिल्म के तनाव के बीच हल्की मुस्कान जरूर लाता है और उनके पुराने कॉमिक अंदाज की याद दिलाता है। बोमन ईरानी ने जज प्रधान के किरदार में जरूरी वजन रखा है। सयामी खेर पुलिस अफसर की भूमिका में नजर आती हैं, जबकि मनोज जोशी, राजेश शर्मा और श्रीया पिलगांवकर ने भी ठीक-ठाक काम किया है। शारिब हाशमी और राजपाल यादव का काम भी ठीक है, लेकिन उनके कुछ सीन कहानी में स्वाभाविक रूप से घुलने के बजाय जबरदस्ती जोड़े गए लगते हैं। वहीं मोहनलाल का सरप्राइज कैमियो फिल्म के खास पलों में शामिल है।

 

 

‘ओप्पम‘ वाला सस्पेंस क्यों नहीं बना पाई ‘हैवान‘?

प्रियदर्शन का एक खास अंदाज रहा है। जब वह अपनी दक्षिण भारतीय फिल्मों को हिंदी में लाते हैं, तो कहानी और उसके ट्रीटमेंट में बदलाव करते हैं। 2016 की ‘ओप्पम’ में मोहनलाल के साथ उन्होंने धीमा, दमघोंटू और रियलिस्टिक सस्पेंस बनाया था। उस फिल्म का डर किसी बड़े शोर से नहीं आता था। कहानी धीरे-धीरे तनाव बढ़ाती थी और दर्शक को लगातार बेचैनी में रखती थी। ‘हैवान’ में प्रियदर्शन ने कहानी को ज्यादा बड़े और चमकीले अंदाज में पेश किया है। यहीं फिल्म कमजोर पड़ती है। ओरिजिनल की सादगी और डार्क फ्लेवर पर लार्जर-दैन-लाइफ ट्रीटमेंट, गैर-जरूरी गाने और लाउड कॉमेडी भारी पड़ते हैं। थ्रिलर के बीच अचानक आने वाली प्रियदर्शन स्टाइल कॉमेडी कई जगह सस्पेंस का माहौल तोड़ देती है। जिस जगह कहानी को तनाव बढ़ाना चाहिए, वहां कॉमेडी दर्शक को उस माहौल से बाहर खींच लेती है।

 

 

फिल्म देखें या ना देखें

‘हैवान’ में एक मजबूत आइडिया है और सैफ अली खान उस आइडिया को काफी हद तक संभाल लेते हैं। उनका अभिनय फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष है। अक्षय कुमार भी परशुराम के रूप में शुरुआत में खौफ पैदा करते हैं, लेकिन कमजोर लेखन उनके किरदार की धार कम कर देता है। अगर आपको सैफ-अक्षय की जोड़ी, मर्डर मिस्ट्री और एक्शन-सस्पेंस पसंद है, तो फिल्म को एक मौका दिया जा सकता है। लेकिन अगर आपने ‘ओप्पम’ देखी है और उसी तरह का टाइट, डार्क और लगातार तनाव बनाए रखने वाला सस्पेंस चाहते हैं, तो ‘हैवान’ आपको कुछ जगह निराश कर सकती है।

विज्ञापन

बॉलीवुड की और ख़बरें

ताज़ा ख़बरें सीधे अपने ईमेल पर

जगमार्ग न्यूज़ की बड़ी ख़बरें रोज़ अपने इनबॉक्स में पाएं। मुफ़्त, कभी भी अनसब्सक्राइब करें।