August 2, 2026

Hansi News: हांसी का चैनत आंदोलन खत्म: 35 दिन बाद झुकी सरकार, ग्रामीणों को मिलेगा भाखड़ा का पानी

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Hansi News: हांसी का चैनत आंदोलन खत्म: 35 दिन बाद झुकी सरकार, ग्रामीणों को मिलेगा भाखड़ा का पानी

Hansi News: हांसी का चैनत आंदोलन खत्म: 35 दिन बाद झुकी सरकार, ग्रामीणों को मिलेगा भाखड़ा का पानी

Hansi News: हरियाणा के हिसार जिले में हांसी के नजदीक गांव चैनत में पिछले 35 दिनों से सुलग रहा पानी का विवाद आखिरकार सुलझ गया है। भाखड़ा के पानी पर अपना हक जताते हुए ग्रामीण भीषण गर्मी में भी मोर्चे पर डटे हुए थे। आखिरकार सरकार और स्थानीय प्रशासन को ग्रामीणों की मांग के आगे घुटने टेकने पड़े।

हांसी शहर के लिए बिछाई जा रही मुख्य पेयजल पाइपलाइन से गांव चैनत को ‘टी-प्वाइंट’ देकर पानी की सप्लाई देने पर लिखित सहमति बन गई है। सरकार के इस फैसले की घोषणा करने जब सरपंच एसोसिएशन के पूर्व प्रधान सोमेश कुमार धरना स्थल पर पहुंचे, तो ग्रामीणों का सब्र जीत की खुशी में बदल गया। लोगों ने सोमेश कुमार को कंधों पर उठा लिया और थाली-तालियां बजाकर जश्न मनाया।

दांव पर लगी थी 5 बुजुर्गों की जान, प्रशासन को दी थी अनहोनी की चेतावनी

यह आंदोलन सिर्फ नारेबाजी तक सीमित नहीं था, बल्कि पिछले 10 दिनों से गांव के पांच बुजुर्ग— टेकराम दूहन, बलवान दूहन, राजकुमार खगनवाल, जय नारायण और दिलबाग दूहन आमरण अनशन पर बैठे थे। अनशनकारियों की ढलती उम्र और बिगड़ते स्वास्थ्य को देख पूरा गांव उद्वेलित था।

इन बुजुर्गों ने बकायदा शपथ पत्र देकर प्रशासन को चेतावनी दी थी कि यदि उनके प्राणों को कुछ भी हुआ, तो उसकी सीधी जिम्मेदारी सरकार और संबंधित अधिकारियों की होगी। हालांकि, प्रशासन ने भी संघर्ष समिति पर कानूनी कार्रवाई का जवाबी दबाव बनाया था, लेकिन ग्रामीणों के अटूट हौसले के आगे यह रणनीति काम नहीं आई।

क्या था पूरा विवाद और क्यों अड़े थे ग्रामीण?

इस पूरे टकराव की जड़ केंद्र सरकार की ‘अमृत योजना’ से जुड़ी है। योजना के तहत करीब 80 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से राजली हेड से लेकर हांसी शहर तक लगभग 30 किलोमीटर लंबी एक नई पेयजल पाइपलाइन बिछाई जा रही है।

इस परियोजना का खाका विशुद्ध रूप से हांसी शहर की प्यास बुझाने के लिए तैयार किया गया था। गांव चैनत के लोगों का तर्क बेहद सीधा और व्यावहारिक था कि जब करोड़ों की यह पाइपलाइन उनके गांव की छाती चीरकर गुजर रही है, तो उनके हलक सूखे क्यों रहें? इसी वाजिब हक को लेकर बीती 16 मई को गांव में धरने की शुरुआत हुई थी।

विधायक का विरोध, ट्रैक्टर मार्च और मुकदमों का दौर

इन 35 दिनों के भीतर हांसी के इस इलाके ने भारी सियासी और प्रशासनिक उथल-पुथल देखी। आंदोलन के दौरान ग्रामीणों के गुस्से का शिकार क्षेत्रीय भाजपा विधायक विनोद भयाना को भी होना पड़ा, जिन्हें भारी विरोध का सामना करना पड़ा। गतिरोध इतना बढ़ा कि आक्रोशित ग्रामीणों ने एक बार पाइपलाइन उखाड़ने की कोशिश की और हांसी-बरवाला रोड को पूरी तरह ठप कर दिया।

पुलिस ने इस मामले में सख्ती दिखाते हुए 31 किसान नेताओं के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की थी। इसके जवाब में 18 जून को किसानों ने करीब 250 ट्रैक्टरों के साथ हांसी शहर में समानांतर ट्रैक्टर मार्च निकालकर चक्का जाम कर दिया था। अब जमीन पर काम शुरू होने के बाद संघर्ष समिति ने साफ किया है कि रविवार को इस धरने को आधिकारिक रूप से उठा लिया जाएगा।

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