Haryana Air Pollution: हरियाणा में बिगड़ी हवा, पानीपत-फरीदाबाद में प्रदूषण बढ़ा, दिल्ली-NCR की भी हवा खराब

हरियाणा में बिगड़ी हवा, पानीपत-फरीदाबाद में प्रदूषण बढ़ा, दिल्ली-NCR की भी हवा खराब
Haryana Air Pollution: 10 सितंबर को उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर के कई शहरों में हवा खराब श्रेणी में रही। पानीपत का एक्यूआई 233 दर्ज किया गया, जो सूची में सबसे ज्यादा था। अंबाला में 160, फरीदाबाद में 152 और सोनीपत में 113 एक्यूआई रहा। दिल्ली का एक्यूआई 139, चंडीगढ़ का 126, ग्रेटर नोएडा का 108 और गुरुग्राम का 106 दर्ज किया गया।
वहीं करनाल में एक्यूआई 51 और पंचकूला में 58 रहा। इससे साफ है कि एक ही राज्य और एनसीआर क्षेत्र में भी हवा की स्थिति शहर-दर-शहर अलग है। औद्योगिक गतिविधियों, वाहनों के उत्सर्जन, सड़क की धूल और कचरे जैसे स्थानीय कारण भी प्रदूषण के स्तर को प्रभावित करते हैं।
दिल्ली-NCR की हवा सुधारने के लिए हरियाणा की तैयारी
बढ़ते प्रदूषण के बीच मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने 10 सितंबर को यमुना एक्शन प्लान और दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता सुधार से जुड़ी योजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने संबंधित विभागों को निर्धारित कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए।
सरकार का फोकस केवल हवा पर नहीं है। यमुना में जाने वाले सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट को रोकने के लिए भी परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है। राज्य में 132 एमएलडी क्षमता के छह नए एसटीपी निर्माणाधीन हैं, जिन्हें दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
304 एमएलडी क्षमता के एसटीपी का होगा उन्नयन
बजघेड़ा, खेड़वा, रादौर रोड, ददलाना, बादशाहपुर और सोढापुर में छह एसटीपी बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा गोहाना, सुनारिया, लाइन पार बहादुरगढ़, हसनपुर, धनवापुर और बहरामपुर में कुल 304 एमएलडी क्षमता वाले छह एसटीपी के उन्नयन का काम चल रहा है।
औद्योगिक प्रदूषण रोकने के लिए फरीदाबाद के प्रतापगढ़ में 50 एमएलडी क्षमता के सीईटीपी के लिए 10 अगस्त को निविदाएं आमंत्रित की गई थीं। इसकी बोली जमा करने की अंतिम तारीख 14 सितंबर है। पानीपत में सैनी कॉलोनी के पास ड्रेन नंबर-2 में औद्योगिक अपशिष्ट के प्रवाह को रोकने के लिए भी कार्रवाई की गई है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 14 औद्योगिक इकाइयों का निरीक्षण किया, जिनमें चार के खिलाफ कार्रवाई की गई।
पराली और पुराने वाहनों पर भी सरकार का फोकस
दिल्ली-NCR की हवा में सुधार के लिए पराली जलाने पर रोक, सड़क की धूल, कचरे और वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को कम करने पर जोर दिया जा रहा है। पुराने ट्रकों और बसों को बदलने में सहायता देने के लिए परिवर्तन योजना का पोर्टल भी शुरू हो चुका है। इस योजना के तहत पहला आवेदन 22 जुलाई 2026 को प्राप्त हुआ था।
पराली प्रबंधन के लिए खेत में ही उसके प्रबंधन के साथ दूसरे उपयोग पर भी जोर दिया जा रहा है। सोनीपत के राय-जाखौली में 400 टन प्रतिदिन क्षमता का बायोगैस संयंत्र निर्माणाधीन है। राज्य में कुल 650 टन प्रतिदिन क्षमता वाली तीन नई या प्रस्तावित बायोगैस परियोजनाओं पर काम चल रहा है।
हरित क्षेत्र बढ़ाने के निर्देश
सरकार ने प्रदूषण कम करने के लिए पौधारोपण और वृक्ष आवरण बढ़ाने पर भी जोर दिया है। वन विभाग को निर्धारित पौधारोपण लक्ष्य पूरा करने और छोटे हरित क्षेत्रों के विकास में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं।
आने वाले समय में पराली का मौसम शुरू होने के साथ दिल्ली-NCR और हरियाणा में प्रदूषण की चुनौती बढ़ सकती है। ऐसे में पानीपत और फरीदाबाद जैसे शहरों में औद्योगिक उत्सर्जन, धूल और वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण के साथ सरकारी योजनाओं के जमीन पर असर की निगरानी भी अहम होगी।
