Haryana Child Rights Commission CCTV Rules: हरियाणा के बाल देखभाल संस्थानों में पलने-बढ़ने वाले बच्चों की गोपनीयता और सुरक्षा को ताक पर रखने वालों पर अब गाज गिरनी तय हो गई है। भिवानी में हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की चेयरपर्सन तृप्ति श्योराण ने प्रदेशभर के शेल्टर होम और चाइल्ड केयर संस्थानों के लिए बेहद कड़े वैधानिक निर्देश जारी किए हैं। आयोग के औचक निरीक्षणों के दौरान यह गंभीर खामी सामने आई थी कि कई जगहों पर संस्थानों के सीसीटीवी कैमरों का सेटअप सीधे संचालकों या कर्मचारियों के निजी मोबाइल फोन और लैपटॉप से कनेक्टेड था। इससे बच्चों की पल-पल की गतिविधियों की लाइव फीड अनधिकृत हाथों में जा रही थी, जिसे आयोग ने बच्चों के मौलिक अधिकारों और सुरक्षा पर सीधा खतरा माना है।
नियमों की अनदेखी पर होगी सीधी प्रशासनिक कार्रवाई
आयोग ने महिला एवं बाल विकास विभाग के शीर्ष अधिकारियों के साथ-साथ सभी जिला बाल संरक्षण अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे आगामी पंद्रह दिनों के भीतर इन आदेशों की शत-प्रतिशत अनुपालना सुनिश्चित कर अपनी रिपोर्ट सौंपें। यदि कोई संस्थान इन नियमों की अवहेलना करता पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। चेयरपर्सन तृप्ति श्योराण ने दो टूक शब्दों में कहा है कि निगरानी का मतलब बच्चों की सुरक्षा होना चाहिए, न कि उनकी व्यक्तिगत जिंदगी की टोह लेना।
कड़े सुरक्षा दायरे में रहेंगे डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर
जारी किए गए नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक, संस्थानों में लगे डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर (DVR) और नेटवर्क वीडियो रिकॉर्डर (NVR) को पूरी तरह सुरक्षित और बंद स्थानों पर रखा जाएगा। सीसीटीवी फुटेज या स्क्रीन की रिकॉर्डिंग करने, उसे डाउनलोड करने, किसी भी रूप में नकल बनाने या फिर व्हाट्सएप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फॉरवर्ड करने पर सख्त रोक लगा दी गई है। इसके अलावा, संस्थानों के भीतर बच्चों की प्राइवेसी का विशेष ध्यान रखते हुए शौचालय, बाथरूम और चेंजिंग रूम के अंदर कैमरे लगाना कानूनन वर्जित कर दिया गया है। आयोग ने इसे किशोर न्याय मॉडल नियम, 2016 के नियम 67(12) का अनिवार्य हिस्सा बताया है।
केवल अधिकृत लोगों के हाथ होगी मॉनिटरिंग की कमान
अब इन संस्थानों में सीसीटीवी व्यवस्था की कमान पूरी तरह से केवल संस्थान के मुख्य प्रभारी के पास रहेगी। कैमरों की लाइव फीड या रिकॉर्डिंग तक पहुंच सिर्फ उन्हीं कर्मचारियों को मिलेगी जिन्हें इसके लिए विधिवत अधिकृत किया गया होगा। साथ ही, साझा पासवर्ड या कूट शब्दों के इस्तेमाल पर भी रोक लगा दी गई है ताकि कोई बाहरी व्यक्ति सिस्टम में सेंध न लगा सके। संस्थानों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि वे एक बाकायदा रजिस्टर मेंटेन करें, जिसमें यह ब्योरा दर्ज हो कि किस-किस अधिकृत व्यक्ति ने फुटेज देखी है या निकाली है।
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