Haryana electricity strike: हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हठधर्मिता और सरकार के फैसलों के खिलाफ चल रहा टकराव अब विकराल रूप ले चुका है। प्रदेश के 15 जिलों में पिछले दो दिनों से बिजली ठप होने के कारण आम जनता का जीना मुहाल हो गया है। इसी बीच, गतिरोध को खत्म करने के लिए पंचकूला के पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में बैठकों का दौर शुरू हो गया है। ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने पहले विभागीय अधिकारियों के साथ बंद कमरे में मंत्रणा की और अब वे सीधे बिजली यूनियन के नेताओं के साथ बातचीत की मेज पर बैठे हैं, जिस पर पूरे प्रदेश की निगाहें टिकी हुई हैं।
15 जिलों में अंधेरा, सड़कों पर उतरे लोग
कर्मचारियों की इस हड़ताल का सबसे बुरा असर हिसार, गुरुग्राम, कुरुक्षेत्र, फरीदाबाद और कैथल समेत 15 जिलों में देखने को मिल रहा है। हिसार के कई पॉश इलाकों में लगातार 24 घंटे से बिजली गुल रहने के कारण लोगों का सब्र जवाब दे गया और वे सड़कों पर जाम लगाकर बैठ गए।
वहीं, कुरुक्षेत्र और हांसी के शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में भी 20 घंटे से अधिक समय से बिजली आपूर्ति बाधित है। हालात की गंभीरता को देखते हुए कुरुक्षेत्र और कैथल बार एसोसिएशन ने भी न्यायिक कार्यों से विरत (वर्क सस्पेंड) रहने का बड़ा फैसला लिया है। उधर, पानीपत थर्मल पावर प्लांट की दो यूनिटें बंद होने से बिजली संकट और अधिक गहरा गया है।
रेवाड़ी में ठप हुई इलेक्ट्रिक बसें, यात्रियों की बढ़ी मुश्किलें
बिजली आपूर्ति ठप होने का असर केवल घरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका सीधा असर परिवहन व्यवस्था पर भी पड़ा है। रेवाड़ी डिपो से बावल औद्योगिक क्षेत्र के बीच चलने वाली इलेक्ट्रिक बसों के पहिए पूरी तरह थम गए हैं। डिपो में बसें चार्ज न होने के कारण शुक्रवार को इस रूट का संचालन बंद रखना पड़ा, जिससे रोजाना फैक्ट्रियों में आने-जाने वाले श्रमिकों और आम यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। मजबूरन लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए महंगे निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ रहा है।
राजनीतिक पारा चढ़ा, विपक्ष ने दागे तीखे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम पर राज्य की राजनीति गर्मा गई है। जननायक जनता पार्टी (JJP) के नेता और पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने खुलकर बिजली कर्मचारियों का समर्थन किया है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण का ठेका निजी हाथों में देने का फैसला तुरंत वापस लिया जाए और निगम का निजीकरण रोका जाए।
दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी के नेता अनुराग ढांडा ने सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कड़े सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि महज एक साल पुरानी कंपनी ‘इलेवन पावर लिमिटेड’ को बिना अनुभव के बिजली आपूर्ति का लाइसेंस क्यों दिया गया। ढांडा ने तंज कसते हुए पूछा कि क्या इस डील का कोई ‘गुजरात कनेक्शन’ है और इसके जरिए किसे फायदा पहुंचाया जा रहा है। हालांकि, केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने उम्मीद जताई है कि आज होने वाली बैठकों में इस गंभीर समस्या का कोई सकारात्मक समाधान निकल आएगा।
जब तक लाइसेंस रद्द नहीं, हड़ताल जारी: यूनियन
बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा के उपप्रधान बलजीत बेनीवाल ने दोटूक शब्दों में चेतावनी दी है कि जब तक सरकार गुरुग्राम और नूंह के लिए जारी किए गए निजी बिजली आपूर्ति के लाइसेंस को पूरी तरह रद्द नहीं करती, तब तक यह हड़ताल वापस नहीं ली जाएगी। अब देखना यह है कि पंचकूला में चल रही इस हाई-प्रोफाइल बैठक से क्या कोई बीच का रास्ता निकलता है या जनता को अभी और अंधेरे में रहना पड़ेगा।

