Kurukshetra electricity strike: (पवन शर्मा) हरियाणा में बिजली कर्मियों की तीन दिवसीय हड़ताल का असर अब मैदानी स्तर पर साफ दिखने लगा है। कुरुक्षेत्र के ज्योतिसर और थानेसर समेत कई शहरी और ग्रामीण इलाकों में बिजली व्यवस्था पटरी से उतर चुकी है।
नियमित तकनीकी कर्मचारियों के सामूहिक हड़ताल पर जाने के बाद सरकार और प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्था के तहत करीब दो साल पहले भर्ती किए गए अनुबंधित कर्मचारियों को सब स्टेशनों की कमान सौंप दी है। हालात को नियंत्रित रखने और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए इन सब स्टेशनों पर पटवारियों की भी ड्यूटी लगाई गई है, जबकि सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त के लिए पुलिस बल मुस्तैद किया गया है।
ज्योतिसर पावर हाउस में पटवारी संभाल रहे मोर्चा
ज्योतिसर पावर हाउस पर तैनात पटवारी सलिंदर कुमार ने मौजूदा हालातों पर बात करते हुए बताया कि उनकी पूरी कोशिश है कि सब स्टेशन के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में बिजली सुचारू रहे। जहां कहीं से भी फॉल्ट की शिकायत आ रही है, उसे दुरुस्त करने के लिए विभाग के तकनीकी अधिकारियों का सहयोग लिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि लाइनों की जरूरी मरम्मत के लिए कुछ समय के लिए शटडाउन (परमिट) लेना पड़ रहा है, ताकि काम पूरा होने के बाद फौरन बिजली बहाल की जा सके। हालांकि, इसके बावजूद थानेसर और आसपास के तमाम इलाकों से बिजली कटने की लगातार शिकायतें मिल रही हैं।
पेयजल संकट से जूझ रहे लोग, अधिकारियों ने साधी चुप्पी
लंबे समय तक बिजली गुल रहने का सबसे बुरा असर आम आदमी की दिनचर्या पर पड़ा है। बिजली न होने के कारण न केवल घरों के पंखे और इन्वर्टर जवाब दे गए हैं, बल्कि जलापूर्ति बाधित होने से पीने के पानी का गंभीर संकट भी खड़ा हो गया है।
इस बीच, ज्योतिसर पावर हाउस में सुरक्षा की कमान संभाल रहे एएसआई बलविंदर सिंह ने स्पष्ट किया कि फिलहाल सब स्टेशन पर स्थिति पूरी तरह शांतिपूर्ण और सामान्य है। सुरक्षा के लिहाज से पुलिस बल तैनात है और मरम्मत कार्य के कारण ही 33 केवी की लाइन की सप्लाई कुछ वक्त के लिए रोकी गई थी।
यूनियन और सरकार के बीच बातचीत जारी
दूसरी ओर, बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा के तेवर भी कड़े हैं। बिजली विभाग सब डिवीजन नंबर-2 के प्रधान मुकेश गुप्ता ने जानकारी दी है कि यूनियन के वरिष्ठ पदाधिकारियों और सरकार के नुमाइंदों के बीच वार्ताओं का दौर चल रहा है।
अभी तक यूनियन की तरफ से कोई नया निर्देश जारी नहीं किया गया है, और सभी कर्मचारी उच्चाधिकारियों के अगले आदेश का इंतजार कर रहे हैं। इस पूरे संकटकाल में जब विभाग का पक्ष जानने के लिए एसई, एक्सईएन और एसडीओ जैसे जिम्मेदार अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो किसी भी अधिकारी ने फोन नहीं उठाया, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

