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Haryana News: अब मुख्यमंत्री की बैठकों के फैसलों में नहीं चलेगी ढिलाई, तय होगी अफसरों की सीधी जवाबदेही

Haryana News: अब मुख्यमंत्री की बैठकों के फैसलों में नहीं चलेगी ढिलाई, तय होगी अफसरों की सीधी जवाबदेही

अब मुख्यमंत्री की बैठकों के फैसलों में नहीं चलेगी ढिलाई, तय होगी अफसरों की सीधी जवाबदेही

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AAmandeep Singh

Haryana News: हरियाणा की प्रशासनिक व्यवस्था को ज्यादा चुस्त-दुरुस्त और पारदर्शी बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। अब मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में होने वाली उच्चस्तरीय समीक्षा बैठकों में लिए जाने वाले फैसले सिर्फ फाइलों या मिनट्स ऑफ मीटिंग (MOM) तक सीमित नहीं रहेंगे। सरकार ने इन निर्णयों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करने के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू की है। इसके तहत बैठकों में दिए गए निर्देशों को ठोस ‘एक्शन प्वाइंट’ में बदलकर उनकी नियमित समीक्षा की जाएगी।

डिजिटल पोर्टल से होगी मॉनिटरिंग, समय-सीमा का रखना होगा पूरा हिसाब

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मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी द्वारा जारी एसओपी के मुताबिक, बैठक खत्म होने के तीन कार्य दिवसों के भीतर आधिकारिक एमओएम जारी कर दिया जाएगा। इसके बाद अगले दो दिनों के अंदर सभी एक्शन प्वाइंट्स को ‘सीएम मीटिंग मॉनिटरिंग पोर्टल’ पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। पोर्टल पर जिम्मेदारी, लक्ष्य, वर्तमान स्थिति और विभागीय रिपोर्ट दर्ज रहेगी। सरकार ने साफ किया है कि अब अधिकारी ‘काम चल रहा है’ जैसे गोलमोल जवाब नहीं दे सकेंगे। उन्हें ‘काम पूरा’, ‘प्रक्रियाधीन’, ‘विलंबित’ या ‘अव्यवहारिक’ जैसी पारदर्शी श्रेणियों में ही अपडेट देना होगा।

ठोस प्रमाण देने पर ही माना जाएगा काम पूरा, 15 सितंबर तक नोडल अफसर होंगे तैनात

नई नीति में पारदर्शिता पर सबसे ज्यादा जोर दिया गया है। किसी भी विभागीय कार्य को तब तक पूरा नहीं माना जाएगा जब तक उससे संबंधित आदेश, स्वीकृतियां, जमीनी तस्वीरें या सांख्यिकीय आंकड़े पोर्टल पर अपलोड न किए जाएं। हर विभाग को अपने यहां से एक वरिष्ठ अधिकारी को नोडल अफसर के रूप में नामांकित करना होगा, जिसकी जानकारी 15 सितंबर, 2026 तक शासन को भेजनी होगी। यह नोडल अफसर ही डेटा की सटीकता और एटीआर (एक्शन टेकन रिपोर्ट) के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार होगा।

अनावश्यक देरी पर होगी जवाबदेही तय, लागू हुई व्यवस्था

प्रशासनिक सुधारों की इस कड़ी में यह प्रावधान भी किया गया है कि बैठकों की पहली एक्शन टेकन रिपोर्ट एक महीने के भीतर जमा करनी होगी। यदि कोई काम तय डेडलाइन में पूरा नहीं होता, तो संबंधित प्रशासनिक सचिव या विभागाध्यक्ष को विलंब के कारणों की खुद समीक्षा करनी होगी। यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है और यह मुख्यमंत्री की आगामी बैठकों के साथ-साथ पूर्व की बैठकों के लंबित पड़े फैसलों पर भी समान रूप से लागू होगी। सरकार ने साफ कर दिया है कि काम में बेवजह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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