August 2, 2026

Haryana News: इनेलो ने याद दिलाया 1994 का इतिहास, कहा- हरियाणा का हिस्सा 67% से घटाकर 46% किया

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Haryana News: इनेलो ने याद दिलाया 1994 का इतिहास, कहा— हरियाणा का हिस्सा 67% से घटाकर 46% किया

जल बंटवारे पर INLD ने दोनों राष्ट्रीय पार्टियों को कटघरे में घेरा

Haryana News: हरियाणा-राजस्थान जल समझौते पर हस्ताक्षर होने के महज कुछ ही घंटों के भीतर इस पर तीखी राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने आ गई है। इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री प्रो. संपत सिंह ने सोमवार को चंडीगढ़ में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कांग्रेस और भाजपा दोनों को एक ही सिक्के के दो पहलू बताया।

उन्होंने आरोप लगाया कि हरियाणा के पानी के संवेदनशील मुद्दे पर दोनों पार्टियों की सोच हमेशा से सूबे के खिलाफ रही है। हुड्डा सरकार और पिछली सरकारों पर तंज कसते हुए संपत सिंह ने कहा कि कांग्रेस ने पहले अपनी कुर्सी बचाने के लिए समझौते किए और अब भाजपा ने राजस्थान को पानी देने की पैरवी कर हरियाणा के किसानों के पेट पर लात मारी है।

1994 के समझौते से घटा हरियाणा का हक

आंकड़ों का हवाला देते हुए प्रो. संपत सिंह ने कहा कि साल 1954 के यमुना जल समझौते के बाद जब हरियाणा का गठन हुआ, तब हमें पंजाब के हिस्से का जायज हक मिला था। उस दौर में हरियाणा अकेले करीब 8 बीसीएम पानी का इस्तेमाल करता था, जबकि उत्तर प्रदेश के हिस्से 4 बीसीएम पानी आता था।

लेकिन 12 मई 1994 को हुए विवादित समझौते के बाद हरियाणा का हिस्सा घटाकर महज 5.730 बीसीएम कर दिया गया। उन्होंने कहा कि उस वक्त दिल्ली, राजस्थान और हिमाचल को स्थायी हिस्सेदारी देने के चक्कर में हरियाणा का शेयर 67 फीसदी से घटकर सिर्फ 46 फीसदी रह गया, जिसका खामियाजा आज तक यहां का किसान भुगत रहा है।

तीन दशक बाद भी अधूरे पड़े हैं बांध

पूर्व वित्त मंत्री ने वर्तमान और तत्कालीन सरकारों की प्रशासनिक नाकामी को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि 1994 के समझौते में यह स्पष्ट प्रावधान था कि यमुना में पानी की आवक बढ़ाने के लिए रेणुका, किशाऊ और लखवार-व्यासी बांधों का निर्माण समय पर किया जाएगा।

लेकिन त्रासदी देखिए कि तीन दशक का लंबा वक्त गुजर जाने के बाद भी ये राष्ट्रीय परियोजनाएं आज तक धरातल पर पूरी नहीं हो सकीं। उन्होंने यह भी संगीन आरोप लगाया कि राजस्थान ने ऊपरी इलाकों में कच्चे बांध बनाकर प्राकृतिक जल प्रवाह को बाधित किया है, जिससे हरियाणा के टेल (अंतिम छोर) तक सिंचाई का पानी नहीं पहुंच पा रहा है।

“एसवाईएल अधूरी और इनेलो का पुराना बलिदान”

संपत सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेशों के बावजूद सतलुज-यमुना लिंक (SYL) नहर का निर्माण पूरा न होने पर भी रोष जताया। उन्होंने पार्टी के इतिहास को याद दिलाते हुए कहा कि जब 1994 में यह जनविरोधी यमुना समझौता हुआ था, तब चौधरी ओम प्रकाश चौटाला के नेतृत्व में इनेलो के सभी 17 विधायकों ने अपने पदों से सामूहिक इस्तीफा दे दिया था।

हरियाणा के पानी के लिए वह एक ऐतिहासिक राजनीतिक बलिदान था। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि इनेलो इस बार भी शांत नहीं बैठेगी। बहुत जल्द पार्टी के प्रधान महासचिव अभय सिंह चौटाला की अध्यक्षता में एक कोर कमेटी की बैठक होने जा रही है, जिसमें भाजपा सरकार के इस फैसले के खिलाफ राज्यव्यापी आंदोलन की रणनीति का एलान किया जाएगा।

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