Haryana News: हरियाणा में तेजी से फैल रहा ओरल कैंसर, जानिए क्यों बढ़ रहे ICMR के आंकड़े

हरियाणा में तेजी से फैल रहा ओरल कैंसर
Haryana News: मुंह का कैंसर (ओरल कैंसर) अब हरियाणा के शहरी और ग्रामीण इलाकों में खामोशी से अपनी जड़ें जमा रहा है। शुरुआत में बिना किसी दर्द के पनपने वाली यह बीमारी स्टेज 2 और 3 तक पहुंचते-पहुंचते मरीजों को मौत के मुहाने पर खड़ा कर देती है। रोहतक पीजीआईएमएस (PGIMS) के कैंसर वार्ड में पानीपत से इलाज कराने पहुंची एक महिला मरीज की दर्दभरी आपबीती इस कड़वी हकीकत को बयां करती है। गुटखा खाने की लत के कारण महिला का मुंह खुलना लगभग बंद हो चुका है। हालांकि डॉक्टरों के आश्वासन के बाद इलाज जारी है, लेकिन जिंदगी की यह जंग बेहद कठिन हो चुकी है। यह कहानी केवल एक महिला की नहीं, बल्कि प्रदेश के उन हजारों लोगों की है जो तंबाकू के जाल में फंसकर अपनी सांसों का सौदा कर रहे हैं।
बैन के बावजूद धड़ल्ले से बिक रहा गुटखा-तंबाकू
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा प्रशासनिक सवाल यह उठता है कि जब हरियाणा सरकार ने राज्य में गुटखा और तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगा रखा है, तो फिर यह जहर लोगों की पहुंच तक आसानी से कैसे पहुंच रहा है? जमीनी हकीकत यह है कि कागजी बैन के बावजूद दुकानों पर चोरी-छिपे और नए नामों से पैकेज्ड तंबाकू, खैनी और गुटखा धड़ल्ले से बेचा जा रहा है। यही वजह है कि बैन के बावजूद लोग लगातार इसके आदी बन रहे हैं और अपनी सेहत गंवा रहे हैं।
राष्ट्रीय औसत से भी तेज रफ्तार से बढ़ रहे कैंसर के मामले
संसद में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा पेश की गई इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की रिपोर्ट हरियाणा के लिए बेहद डरावनी तस्वीर पेश करती है। आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में कैंसर के मामलों और इससे होने वाली मौतों की दर राष्ट्रीय औसत से भी अधिक है।
वर्ष, कुल मरीज, कुल मौतें
2021, “30,015”, “16,543”
2022, “30,851”, “16,997”
2023, “31,679”, “17,447”
2024, “32,513”, “17,908”
2025,” 33,395″, “18,387”
वर्ष 2021 से 2025 के दौरान हरियाणा में कैंसर के मामलों में 11.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह वृद्धि 10.05 प्रतिशत रही। वर्ष 2025 में कैंसर के मामलों और मौतों के लिहाज से हरियाणा देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 17वें स्थान पर रहा।
हुक्का, बीड़ी और प्रदूषित पानी भी दे रहे बीमारी को बढ़ावा
चिकित्सा अध्ययनों (जर्नल ऑफ हेल्थ साइंसेज एंड मेडिकल रिसर्च) से पता चलता है कि हरियाणा में ओरल कैंसर के सर्वाधिक मामले 44 से 62 वर्ष के आयु वर्ग में मिल रहे हैं। गुटखे के अलावा इसके कई स्थानीय और पर्यावरणीय कारण भी हैं:
हुक्का और बीड़ी का व्यापक चलन: हरियाणा के गांवों में हुक्का और बीड़ी पीना सामाजिक संस्कृति का हिस्सा रहा है। धुएं वाला यह तंबाकू फेफड़ों और मुंह के कैंसर का सबसे बड़ा कारण बनता है।
भूजल में जहरीले तत्व: राज्य के कई औद्योगिक और कृषि क्षेत्रों में पानी के भीतर हैवी मेटल्स (भारी धातुओं) और कीटनाशकों (Pesticides) के अवशेष पाए गए हैं, जिन्हें कैंसर से जोड़कर देखा जा रहा है।
खराब जीवनशैली: पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ के अध्ययन के अनुसार, शारीरिक निष्क्रियता, प्रोसेस्ड फूड और मोटापा भी शरीर में कैंसर कोशिकाओं को बढ़ावा दे रहे हैं।
शरीर देता है शुरुआती संकेत, नजरअंदाज करना पड़ेगा भारी
पीजीआईएमएस रोहतक के डेंटल विभाग के अध्यक्ष डॉ. मंजूनाथ और प्रोफेसर डॉ. हरनीत सिंह के अनुसार, गुटखे में लगभग 3 हजार तरह के खतरनाक और जहरीले रसायन होते हैं। डॉक्टर सलाह देते हैं कि अगर मुंह के अंदर कोई ऐसा घाव या छला हो जो दो हफ्तों तक न भरे, मसूड़ों या जीभ पर लाल-सफेद पैच दिखें, या फिर मुंह खोलने में दिक्कत हो, तो इसे तुरंत डेंटिस्ट को दिखाना चाहिए। शुरुआती स्टेज (स्टेज 1) में बीमारी की पहचान होने पर इसका पूरी तरह इलाज संभव है। तंबाकू और धूम्रपान से दूरी बनाकर तथा नियमित ओरल हाइजीन (मुंह की सफाई) रखकर इस घातक बीमारी से बचा जा सकता है।
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