अंबाला, सोनीपत और पंचकूला समेत 7 शहरों में बजने वाला है चुनाव का बिगुल, देखें पूरी लिस्ट
Apr 12, 2026 10:05 AM
हरियाणा। हरियाणा की सियासत में एक बार फिर नगर निगम और निकाय चुनावों का शोर सुनाई देने वाला है। पिछले काफी समय से पंचकूला नगर निगम में आरक्षण को लेकर फंसा पेंच अब सुलझ गया है। दरअसल, परिवार पहचान पत्र के डेटा के आधार पर किए गए आरक्षण को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी, जिसके बाद अब स्थानीय निकाय विभाग ने आनन-फानन में 2011 की जनगणना के आधार पर नई अधिसूचना जारी की है। इस कदम ने प्रदेश में ठप पड़ी चुनावी प्रक्रिया को दोबारा पटरी पर ला दिया है।
मई के पहले हफ्ते में दस्तक दे सकते हैं चुनाव
राज्य चुनाव आयोग की तैयारी तो अप्रैल अंत तक चुनाव संपन्न कराने की थी, लेकिन कानूनी दांव-पेच के चलते शेड्यूल थोड़ा आगे खिसक गया है। सूत्रों की मानें तो अब मई के पहले पखवाड़े में वोट डाले जा सकते हैं। इस बार चुनाव का दायरा काफी बड़ा है; अंबाला, सोनीपत और पंचकूला जैसे बड़े नगर निगमों में जहां आम चुनाव होने हैं, वहीं रेवाड़ी, धारूहेड़ा, सांपला और उकलाना में भी जनता अपने प्रतिनिधियों को चुनेगी। इसके अलावा झज्जर और टोहाना जैसी नगर परिषदों में खाली पड़े पदों को भरने के लिए उपचुनाव की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
नोटा बनेगा 'किंगमेकर': प्रत्याशियों के लिए खतरे की घंटी
इस बार के निकाय चुनाव में सबसे दिलचस्प पहलू 'नोटा' (NOTA) की भूमिका रहने वाली है। हरियाणा राज्य चुनाव आयोग ने साफ कर दिया है कि ईवीएम पर नोटा को एक 'कल्पित प्रत्याशी' माना जाएगा। यानी अगर किसी वार्ड या सीट पर मतदाताओं ने सभी उम्मीदवारों को नकारते हुए नोटा का बटन ज्यादा दबा दिया, तो वहां का चुनाव शून्य घोषित कर दिया जाएगा। इतना ही नहीं, उस चुनाव में उतरे तमाम प्रत्याशी दोबारा चुनाव लड़ने के अयोग्य हो जाएंगे। आयोग का यह सख्त नियम राजनीतिक दलों को मजबूर करेगा कि वे साफ-सुथरी छवि वाले उम्मीदवार ही मैदान में उतारें।
गांवों में भी लौटेगी रौनक, 540 पदों पर संग्राम
शहरों के साथ-साथ ग्रामीण अंचल में भी चुनावी सरगर्मी बढ़ने वाली है। प्रदेश की विभिन्न ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों में रिक्त पड़े 540 पदों पर उपचुनाव की तैयारी पूरी हो चुकी है। मतदाता सूचियों को पहले ही अंतिम रूप दिया जा चुका है। प्रशासन की कोशिश है कि खेती-किसानी के कामों से फारिग होते ही चुनाव संपन्न करा लिए जाएं, ताकि विकास कार्यों को गति मिल सके। अब सबकी निगाहें चुनाव आयोग की आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं।