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हिमाचल कैबिनेट फेरबदल पर दिल्ली में मंथन, सुंदर सिंह ठाकुर और आशीष बुटेल की दावेदारी चर्चा में

हिमाचल कैबिनेट फेरबदल पर दिल्ली में मंथन, सुंदर सिंह ठाकुर और आशीष बुटेल की दावेदारी चर्चा में

मुख्यमंत्री सुखु का केबिनेट बैठक लेते हुए का पूरा फोटो

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VVinita Kohli

Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार में कैबिनेट फेरबदल को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। कैबिनेट में फिलहाल एक मंत्री पद खाली है, लेकिन अब एक से दो वरिष्ठ मंत्रियों को हटाकर नए चेहरों को शामिल करने की चर्चा है। इसी बीच आधी कैबिनेट को अचानक दिल्ली बुलाए जाने से इन अटकलों को और हवा मिली है। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू दो वरिष्ठ मंत्रियों को कैबिनेट से हटाना चाहते हैं। हालांकि, इसके लिए कांग्रेस हाईकमान की मंजूरी जरूरी होगी। इसी पर सहमति बनाने के लिए मंत्रियों को दिल्ली बुलाया गया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और महासचिव केसी वेणुगोपाल मंत्रियों के साथ सामूहिक बैठक के अलावा वन-टू-वन बातचीत भी कर सकते हैं।

बैठक में मंत्रियों के अब तक के कामकाज और प्रदर्शन की समीक्षा की जा सकती है। इसके आधार पर कुछ मंत्रियों को हटाने और कुछ के विभाग बदलने पर फैसला संभव है। अगर किसी वरिष्ठ मंत्री को हटाया जाता है तो उनकी जगह नए चेहरों को कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है। हालांकि, अभी किसी नाम या फैसले की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और दिल्ली बैठक के बाद ही तस्वीर साफ होने की संभावना है।

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शांडिल और चंद्र कुमार के नाम चर्चा में

कैबिनेट से जिन दो वरिष्ठ मंत्रियों को हटाए जाने की चर्चा है, उनमें स्वास्थ्य मंत्री धनीराम शांडिल और कृषि मंत्री चंद्र कुमार के नाम प्रमुख हैं। दोनों सरकार के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं और लंबे समय से कैबिनेट का हिस्सा हैं।

धनीराम शांडिल एससी समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं, जबकि चंद्र कुमार ओबीसी वर्ग के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं। ऐसे में दोनों को हटाने का फैसला केवल प्रशासनिक प्रदर्शन तक सीमित नहीं होगा, बल्कि पार्टी को सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों का भी ध्यान रखना पड़ेगा।

शांडिल को लेकर विकल्प पर हो सकती है चर्चा

सूत्रों के मुताबिक धनीराम शांडिल को लेकर सहमति बनने की संभावना अधिक बताई जा रही है। अगर उन्हें कैबिनेट से हटाया जाता है तो पार्टी उन्हें राजनीतिक रूप से सम्मानजनक जिम्मेदारी देने का विकल्प तलाश सकती है।

चर्चा यह भी है कि उनके बेटे संजय शांडिल को किसी बोर्ड या निगम में जिम्मेदारी देकर परिवार को पार्टी के साथ जोड़े रखने की कोशिश की जा सकती है। हालांकि, यह भी फिलहाल केवल राजनीतिक चर्चा है और इस पर कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है।

चंद्र कुमार पर फैसला आसान नहीं

कृषि मंत्री चंद्र कुमार को लेकर हाईकमान के सामने स्थिति ज्यादा जटिल मानी जा रही है। चंद्र कुमार कांगड़ा जिले से आते हैं, जो हिमाचल की राजनीति में बेहद अहम क्षेत्र है। इसके अलावा वह ओबीसी समुदाय के वरिष्ठ नेता हैं।

ऐसे में उन्हें कैबिनेट से हटाने के फैसले में क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरण दोनों का असर पड़ेगा। अगर चंद्र कुमार को हटाया जाता है तो कांगड़ा और ओबीसी प्रतिनिधित्व को लेकर पार्टी को नया संतुलन बनाना होगा।

क्षेत्रीय संतुलन पर भी रहेगी नजर

कैबिनेट फेरबदल में कांग्रेस हाईकमान के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्षेत्रीय और जातीय संतुलन साधने की होगी। मौजूदा कैबिनेट में शिमला संसदीय क्षेत्र से पांच मंत्री हैं, जबकि शिमला जिले से तीन मंत्री शामिल हैं।

हमीरपुर संसदीय क्षेत्र से पहले मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री रहे हैं, जबकि बिलासपुर से राजेश धर्माणी को मंत्री बनाया गया। दूसरी ओर, प्रदेश के सबसे बड़े जिले कांगड़ा को केवल दो मंत्री मिले हैं। अगर राजस्व मंत्री जगत नेगी को ट्राइबल कोटे से माना जाए तो मंडी संसदीय क्षेत्र से सुक्खू कैबिनेट में एक भी मंत्री नहीं है।

सुंदर सिंह ठाकुर की दावेदारी क्यों मजबूत?

मंडी संसदीय क्षेत्र से कैबिनेट में प्रतिनिधित्व नहीं होने के कारण कुल्लू के विधायक सुंदर सिंह ठाकुर की दावेदारी मजबूत मानी जा रही है। अगर किसी मौजूदा मंत्री को हटाया जाता है तो क्षेत्रीय संतुलन साधने के लिए उन्हें मंत्री पद मिल सकता है।

सुंदर सिंह ठाकुर के बाद पालमपुर के विधायक आशीष बुटेल और ज्वालाजी के विधायक संजय रत्न के नाम भी चर्चा में हैं। अर्की के विधायक और मुख्यमंत्री के करीबी माने जाने वाले संजय अवस्थी का नाम भी संभावित चेहरों में लिया जा रहा है। हालांकि, शिमला संसदीय क्षेत्र से पहले ही पांच मंत्री होने के कारण अवस्थी की दावेदारी के सामने क्षेत्रीय संतुलन बड़ी चुनौती हो सकती है।

नगर निगम चुनाव ने आशीष बुटेल की दावेदारी बढ़ाई

आशीष बुटेल की दावेदारी के पीछे हालिया नगर निगम चुनाव के नतीजों को भी अहम माना जा रहा है। करीब तीन महीने पहले हुए राज्य के चार नगर निगम चुनावों में कांग्रेस को तीन जगह हार का सामना करना पड़ा, जबकि पालमपुर नगर निगम में कांग्रेस को जीत मिली।

इस जीत का श्रेय आशीष बुटेल की भूमिका से भी जोड़ा जा रहा है। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने भी इसी आधार पर बुटेल की हाईकमान के सामने पैरवी की है। ऐसे में अगर कैबिनेट में नया चेहरा शामिल करने का फैसला होता है तो बुटेल मजबूत दावेदारों में रहेंगे।

विधानसभा चुनाव से पहले फैसला कितना अहम?

कैबिनेट विस्तार और फेरबदल की चर्चा पिछले करीब एक साल से चल रही है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू कई बार जल्द कैबिनेट गठन की बात कह चुके हैं। इससे पहले भी मुख्यमंत्री समेत मंत्रियों को दिल्ली बुलाया जा चुका है, लेकिन अंतिम फैसला नहीं हो पाया।

अब विधानसभा चुनाव के लिए करीब 13 से 14 महीने का समय बचा है। ऐसे में कांग्रेस के लिए कैबिनेट का सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने के साथ मंत्रियों के प्रदर्शन का संदेश जनता तक पहुंचाना भी अहम होगा। दिल्ली में होने वाली बैठक के बाद यह स्पष्ट हो सकता है कि बदलाव केवल खाली पद भरने तक सीमित रहता है या सुक्खू कैबिनेट में व्यापक फेरबदल होता है।

 

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