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Kaithal Dhand News: कैथल के स्कूलों में गूंजी लोकतंत्र की आवाज, जानिए क्यों जरूरी हैं युवाओं के लिए ऐसे आयोजन

Kaithal Dhand News: कैथल के स्कूलों में गूंजी लोकतंत्र की आवाज, जानिए क्यों जरूरी हैं युवाओं के लिए ऐसे आयोजन

खंड स्तरीय युवा संसद प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने दिखाई संसदीय कार्यप्रणाली की शानदार झलक

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GGaganpreet Kaur

Kaithal Dhand News: देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और संसद के भीतर की गहमागहमी को यदि करीब से समझना हो, तो अक्सर टीवी स्क्रीन या दीर्घाओं का रुख करना पड़ता है। लेकिन कैथल जिले के ढांड खंड के तहत आने वाले गांव जड़ौला के सरकारी स्कूल में शुक्रवार को एक अलग ही नजारा था। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में जब खंड स्तरीय युवा संसद प्रतियोगिता का पर्दा उठा, तो वहां मौजूद हर शख्स बच्चों की परिपक्वता देख हैरान रह गया। एससीईआरटी हरियाणा (गुरुग्राम) के जनसंख्या शिक्षा प्रकोष्ठ की संयोजक सुनीता चौधरी और जिला शिक्षा अधिकारी सह डाइट कैथल के प्राचार्य प्रमोद कुमार राणा के दिशा-निर्देशन में आयोजित इस प्रतियोगिता में भावी पीढ़ी ने भारतीय लोकतंत्र की रीढ़ कही जाने वाली संसदीय कार्यप्रणाली की अद्भुत झलक पेश की।

50 बाल सांसदों ने 11 बिंदुओं पर दिखाई अपनी कूटनीतिक धाक

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इस युवा संसद में कक्षा नौवीं से लेकर बारहवीं तक के करीब 50 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। रंग-बिरंगे परिधानों और पूरी तैयारी के साथ आए इन बाल सांसदों ने सदन की कार्यवाही का जो सजीव खाका खींचा, उसने बड़ों-बड़ों को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया। नवनिर्वाचित सांसदों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाने से लेकर नए मंत्रियों के परिचय, विदेशी प्रतिनिधिमंडलों के स्वागत और शोक संदेश जैसे औपचारिक सत्रों को बच्चों ने बेहद गंभीरता से निभाया। इसके बाद शुरू हुए प्रश्नकाल और शून्यकाल के दौरान तो मानो असली संसद का नजारा जीवंत हो उठा, जहां तीखे सवाल और तार्किक जवाबों का दौर चला। विद्यार्थियों ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव, विशेषाधिकार हनन के मामले, काम रोको प्रस्ताव और विधायी प्रक्रियाओं सहित कुल 11 प्रमुख तकनीकी बिंदुओं का इतनी बारीकी से मंचन किया कि पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

“केवल प्रतियोगिता नहीं, जिम्मेदारी का पाठ है युवा संसद”

कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ करते हुए स्कूल के प्रधानाचार्य देवराज ने अपने संबोधन में एक बेहद मार्मिक और जरूरी बात कही। उन्होंने कहा कि हमें इस आयोजन को महज हार-जीत वाली प्रतियोगिता के चश्मे से नहीं देखना चाहिए। यह दरअसल हमारे बच्चों को देश के संविधान, लोकतांत्रिक मर्यादाओं और गौरवशाली संसदीय परंपराओं से जोड़ने की एक व्यावहारिक पाठशाला है। इस तरह के मंचों से विद्यार्थियों के भीतर का संकोच दूर होता है, उनमें तार्किक रूप से अपनी बात रखने का आत्मविश्वास आता है, अनुशासन की भावना जगती है और सबसे बढ़कर, वे समाज व राष्ट्र के गंभीर मुद्दों के प्रति संवेदनशील और जिम्मेदार बनते हैं।

पर्दे के पीछे की टीम और भविष्य का संकल्प

इस पूरे आयोजन को सफलता के मुकाम तक पहुंचाने में बैकस्टेज टीम और विशेषज्ञों का बड़ा योगदान रहा। प्रतियोगिता की निष्पक्षता और इसकी तकनीकी बारीकियों की निगरानी के लिए डाइट कैथल से जिला संसाधन इकाई प्रभारी डॉ. राज कुमार विशेष रूप से उपस्थित रहे। वहीं, बच्चों की प्रस्तुति का आकलन करने के लिए राजनीति विज्ञान के प्रवक्ता सुनील कुमार ने मुख्य निर्णायक की भूमिका निभाई। कार्यक्रम को अमलीजामा पहनाने में स्कूल के प्राध्यापक बलवान, परवीन सहित समस्त स्टाफ सदस्यों ने दिन-रात एक किया। कार्यक्रम के समापन पर सभी मेहमानों ने प्रतिभागी बच्चों की पीठ थपथपाई और उनसे वादा लिया कि वे भविष्य में भी ऐसे शैक्षणिक व कूटनीतिक मंचों पर देश की आवाज बनकर उभरेंगे।

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