Kaithal News: दोनों परिवारों की रजामंदी से हुई शादी बनी गले की फांस, कैथल में खौफ के साये में दर-दर भटक रहा जोड़ा
दोनों परिवारों की रजामंदी से हुई शादी बनी गले की फांस, कैथल में खौफ के साये में दर-दर भटक रहा जोड़ा
Kaithal News: हरियाणा के पानीपत की एक युवती और कैथल के राजौंद क्षेत्र निवासी युवक का शादीशुदा जीवन शुरू होने से पहले ही सामाजिक बंदिशों की भेंट चढ़ गया। करीब एक महीने पहले जब दोनों परिवारों की सहमति से हुए विवाह के बाद दुल्हन अपने ससुराल पहुंची, तो उसे गांव की सीमा में भी दाखिल नहीं होने दिया गया। आरोप है कि गांव से मात्र 100 मीटर पहले 100 से 150 लोगों की भीड़ ने लाठी-डंडों, गंडासी और पिस्तौल के बल पर दूल्हा-दुल्हन की गाड़ी रोक ली और गांव में प्रवेश करने पर जान से मारने की धमकी दी।
‘इसे बहन कहें या भाभी?’… बंदूक तानकर गाड़ी जलाने की दी धमकी
पीड़िता का कहना है कि विरोध कर रहे ग्रामीणों का तर्क था कि दुल्हन उनके गांव से जुड़े गोत्र की बेटी है, इसलिए उसे बहू के रूप में कतई स्वीकार नहीं किया जाएगा। भीड़ में से एक व्यक्ति ने गाड़ी पर पिस्तौल तानते हुए चेतावनी दी, “यदि किसी ने गांव में कदम रखा तो पूरी गाड़ी को जिंदा फूंक देंगे। हमारे गोत्र की लड़की को ले आए हो, इसे बहन कहें या भाभी?” इस खौफनाक माहौल को देखकर चालक तुरंत गाड़ी मोड़कर भाग निकला। तब से यह नवविवाहित जोड़ा दर-दर भटकने और रिश्तेदारों के घरों में छिपकर रहने को मजबूर है।
कैबिनेट मंत्री अनिल विज तक पहुंची शिकायत, फिर भी नहीं मिला न्याय
दूल्हे के पिता ने अपने बेटे और बहू की जान-माल की सुरक्षा को लेकर स्थानीय पुलिस से लेकर हरियाणा सरकार के कैबिनेट मंत्री अनिल विज तक को लिखित शिकायत भेजी थी। हालांकि, समाज के भारी दबाव और धमकियों के कारण परिवार अपनी बहू को घर लाने का साहस नहीं जुटा सका। अब न्याय की उम्मीद में पीड़िता ने महिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी का दरवाजा खटखटाया है और अपनी तथा अपने पति की सुरक्षा की गुहार लगाई है।
थाना प्रभारी का दावा: पंचायत में बाहर रहने के समझौते के बाद रुकी पुलिस कार्रवाई
राजौंद थाना प्रभारी सब इंस्पेक्टर हरपाल सिंह ने इस पूरे घटनाक्रम पर सफाई देते हुए बताया कि पुलिस को शुरुआत में शिकायत मिली थी। इसके बाद गांव में एक खाप-पंचायत बुलाई गई थी, जिसमें दोनों पक्षों के बीच यह सहमति बनी कि लड़का और लड़की गांव से बाहर ही रहेंगे। पंचायत द्वारा हस्ताक्षरित समझौते की प्रति थाने में जमा कराई गई थी, जिसके चलते उस वक्त कोई सख्त कानूनी कार्रवाई या एफआईआर दर्ज नहीं की गई। फिलहाल मामला एक बार फिर तूल पकड़ता दिख रहा है।
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