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Karnal Paddy Scam: करनाल धान घोटाले में एसआईटी का बड़ा एक्शन, राइस मिलर से उगले 2.47 करोड़ रुपये

Karnal Paddy Scam: करनाल धान घोटाले में एसआईटी का बड़ा एक्शन, राइस मिलर से उगले 2.47 करोड़ रुपये

कागजों पर चला 35 करोड़ का धान! हरियाणा के पूर्व DFSC से पूछताछ, इंस्पेक्टर और आढ़ती भेजे गए जेल

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AAmandeep Singh

Karnal Paddy Scam: हरियाणा के करनाल जिले में सामने आया करीब 35 करोड़ रुपये का धान घोटाला अब पूरी तरह से प्रशासनिक और व्यापारिक गलियारों में भूचाल ला चुका है। एसआईटी की ताबड़तोड़ कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि यह महज एक लापरवाही नहीं, बल्कि अफसरों, आढ़तियों और राइस मिलरों का एक संगठित सिंडिकेट था।

फर्जी गेटपास और कागजों पर ही स्टॉक का हेरफेर कर सरकारी खजाने को चूना लगाने के इस खेल में अब तक की सबसे बड़ी रिकवरी की गई है, जिससे घोटालेबाजों के नेटवर्क की कड़ियां बिखरने लगी हैं।

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डीएफएससी तक पहुंचे घोटाले के तार, इंस्पेक्टर की गवाही ने बढ़ाई मुश्किलें

इस महाघोटाले की आंच अब विभाग के बड़े हुक्मरानों तक पहुंच गई है। एसआईटी ने खाद्य आपूर्ति विभाग के गिरफ्तार इंस्पेक्टर रणधीर से जब सख्ती से पूछताछ की, तो उसने कबूला कि गबन की गई मोटी रकम का एक हिस्सा तत्कालीन जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक (DFSC) अनिल कुमार तक भी पहुंचता था।

इसी तगड़े इनपुट के आधार पर एसआईटी ने पूर्व डीएफएससी को हिरासत में लिया। हालांकि, हाईकोर्ट के अंतरिम आदेशों की ढाल के चलते पूछताछ के बाद उन्हें छोड़ना पड़ा, लेकिन जांच एजेंसी के हाथ लगे वित्तीय लेन-देन के संकेत उनकी मुश्किलें बढ़ाने के लिए काफी हैं।

मिलर नसीब सिंह से 2.47 करोड़ वसूल, भेजा गया जेल

घोटाले की कड़ियों को जोड़ते हुए पुलिस ने शेखपुरा खालसा स्थित यूनाइटेड फूड राइस मिल के मालिक नसीब सिंह को दबोचा। इस मिल पर करीब 1000 टन (2.61 करोड़ रुपये) सरकारी धान की हेराफेरी का आरोप था। पुलिस ने शिकंजा कसते हुए नसीब सिंह से 2.47 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि रिकवर करवाकर सीधे विभाग के खाते में सरेंडर करवा दी है।

आरोपी मिलर को कोर्ट ने जेल भेज दिया है। वहीं, मिल में बचे हुए बाकी धान को सरकारी निर्देशानुसार दूसरी मिलों में शिफ्ट करवाकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिशों पर पानी फेर दिया गया है।

मंडियों में कागजी धान का खेल, तरावड़ी और करनाल से आढ़ती गिरफ्तार

इस पूरे नेक्सस की रीढ़ थे मंडियों में कटने वाले फर्जी गेटपास। तरावड़ी मंडी की ‘कृष्ण पाल सुमित कुमार’ फर्म के आढ़ती सुमित शर्मा को पुलिस ने गिरफ्तार किया है, जिसने बिना एक भी दाना मंडी लाए फर्जी गेटपास के सहारे धान को मिल में पहुंचा दिया था।

ऐसा ही कुछ खेल करनाल की नई अनाज मंडी में ‘जसविंद्र सिंह मुल्तान सिंह’ फर्म के आढ़ती जसविंद्र सिंह ने भी खेला। इस फर्जीवाड़े में तत्कालीन मंडी सचिव आशा रानी, ऑक्शन रिकॉर्डर यशपाल और सहायक निरीक्षक रामफल की सीधी संलिप्तता मिली है, जिनमें से रामफल को विभाग पहले ही सस्पेंड कर चुका है।

स्टॉक की फिजिकल वेरिफिकेशन में पकड़ी गई करोड़ों की चोरी

घोटाले की असली हकीकत तब सामने आई जब सांभली स्थित बीआरसी ओवरसीज के गोदामों पर फिजिकल वेरिफिकेशन की गई। सरकारी दस्तावेजों में जहां 1,59,833 बोरी धान दर्ज था, वहीं मौके पर सिर्फ 59,049 बोरी धान और कुछ तैयार चावल ही मिला। इस तरह सीधे तौर पर 855 मीट्रिक टन धान मौके से गायब था।

इस मामले में फरवरी महीने में ही इंस्पेक्टर देवेंद्र को गिरफ्तार किया जा चुका था। एसआईटी अधिकारियों का कहना है कि यह जांच अभी शुरुआती दौर में है और जैसे-जैसे कड़ियां जुड़ेंगी, कई और सफेदपोश चेहरों के बेनकाब होने की पूरी उम्मीद है।

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