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Krishna Janmashtami: जानें देश के 5 सबसे प्रसिद्ध मंदिरों की महत्ता, आज रात होगी विशेष महाआरती

Krishna Janmashtami: जानें देश के 5 सबसे प्रसिद्ध मंदिरों की महत्ता, आज रात होगी विशेष महाआरती

जानें देश के 5 सबसे प्रसिद्ध मंदिरों की महत्ता, आज रात होगी विशेष महाआरती

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AAmandeep Singh

Krishna Janmashtami: भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर आज पूरा देश भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के उल्लास में डूब गया है। मान्यता है कि इसी पावन तिथि को रोहिणी नक्षत्र में द्वापर युग में भगवान विष्णु ने कृष्ण रूप में अवतार लिया था। जन्माष्टमी के इस पावन अवसर पर सुबह से ही देश भर के मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। गली-मोहल्लों और प्रमुख मंदिरों को रंग-बिरंगी लाइटों, झांकियों और ताजे फूलों से सजाया गया है।

शास्त्रों के अनुसार भगवान कृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में हुआ था, इसीलिए आज रात 12 बजे कान्हा के जन्मोत्सव का मुख्य आयोजन होगा। पंचामृत से बाल गोपाल के अभिषेक के बाद माखन-मिश्री का भोग लगाया जाएगा और महाआरती के साथ ही पूरा माहौल ‘हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की’ के जयकारों से गूंज उठेगा।

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कान्हा के दर्शन के लिए उमड़े श्रद्धालु, इन 5 प्रमुख कृष्ण धामों में छाई है अद्भुत छटा
जन्माष्टमी के पावन पर्व पर देश के प्रमुख कृष्ण धामों की छटा देखते ही बन रही है। अगर आप भी कान्हा के दर्शन की अभिलाषा रखते हैं, तो देश के इन 5 प्रसिद्ध मंदिरों का अपना विशेष धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है:

श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर (मथुरा, उत्तर प्रदेश)

मथुरा स्थित यह पावन धाम भगवान कृष्ण की जन्मस्थली के रूप में विश्वप्रसिद्ध है। माना जाता है कि प्राचीन काल में कंस की वही कारागार यही थी, जहां वासुदेव और माता देवकी की आठवीं संतान के रूप में कान्हा ने जन्म लिया था। आज जन्माष्टमी के मौके पर पूरे मंदिर परिसर को दिव्य रूप में सजाया गया है और लाखों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।

बांके बिहारी मंदिर (वृंदावन, उत्तर प्रदेश)

वृंदावन का बांके बिहारी मंदिर ब्रज मंडल के सबसे पूजनीय स्थलों में से एक है। यह ठाकुर जी के सात प्रमुख मंदिरों में शुमार है। यूं तो यहां हर दिन भक्तों का मेला लगा रहता है, लेकिन जन्माष्टमी की रात को यहां की जाने वाली वर्ष में केवल एक बार होने वाली ‘मंगल आरती’ का दर्शन करने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु खींचे चले आते हैं।

द्वारकाधीश मंदिर (गुजरात)

जगत मंदिर के नाम से विख्यात गुजरात का द्वारकाधीश मंदिर स्थापत्य कला का अद्भुत नमूना है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण स्वयं भगवान कृष्ण के परपोते व्रजनाथ ने लगभग 2500 वर्ष पूर्व कराया था। पहाड़ी की ऊंचाई पर बसे इस मंदिर के गर्भगृह तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को 50 से अधिक सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं।

श्रीकृष्ण मंदिर (उडुपी, कर्नाटक)

दक्षिण भारत के कर्नाटक राज्य में स्थित उडुपी का श्रीकृष्ण मंदिर अद्वितीय धार्मिक परंपरा के लिए जाना जाता है। इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि भक्त भगवान कृष्ण की मनमोहक प्रतिमा का सीधा दर्शन करने के बजाय ‘कनकन किंदी’ यानी नौ छिद्रों वाली खिड़की से ही कान्हा के बाल रूप के दर्शन करते हैं।

गुरुवयूर कृष्ण मंदिर (केरल)

केरल के त्रिशूर जिले में स्थित गुरुवयूर मंदिर को ‘दक्षिण भारत की द्वारका’ के नाम से जाना जाता है। इस अति प्राचीन मंदिर के गर्भगृह का पुनर्निर्माण सन 1638 में कराया गया था। यहां भगवान विष्णु के बाल कृष्ण रूप ‘गुरुवायुरप्पन’ की पूजा होती है। जन्माष्टमी के अवसर पर यहां विशेष अनुष्ठान, गजों की शोभायात्रा और भव्य दीपोत्सव का आयोजन होता है।

अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारियां धार्मिक मान्यताओं और लोक परंपराओं पर आधारित हैं। ‘जग मार्ग’ इनकी किसी भी प्रकार की वैज्ञानिक पुष्टि नहीं करता है।

यह भी पढ़ें– जन्माष्टमी पर इस विधि से करें लड्डू गोपाल का अभिषेक, खुशियों से भर जाएगा घर

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