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Janmashtami Puja Vidhi: जन्माष्टमी पर इस विधि से करें लड्डू गोपाल का अभिषेक, खुशियों से भर जाएगा घर, जानें पूरी जानकारी

AAmandeep Singh
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Janmashtami Puja Vidhi: जन्माष्टमी पर इस विधि से करें लड्डू गोपाल का अभिषेक, खुशियों से भर जाएगा घर, जानें पूरी जानकारी

जन्माष्टमी पर इस विधि से करें लड्डू गोपाल का अभिषेक, खुशियों से भर जाएगा घर, जानें पूरी जानकारी

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Janmashtami Puja Vidhi: भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि सनातन परंपरा में बेहद विशेष मानी जाती है। इसी पावन तिथि को भगवान विष्णु ने अधर्म का नाश करने और धर्म की स्थापना के लिए श्रीकृष्ण के रूप में आठवां अवतार लिया था। इस वर्ष यह पावन पर्व 4 सितंबर 2026 को मनाया जा रहा है। इस दिन श्रद्धालु पूरे मनोयोग से व्रत-उपवास रखकर मध्यरात्रि में बालगोपाल के प्रकट होने का इंतजार करते हैं।

घरों और देवालयों में लड्डू गोपाल के लिए नक्काशीदार झूले सजाए जाते हैं और विभिन्न प्रकार के सात्विक भोगों की तैयारी की जाती है। हालांकि, जन्माष्टमी के व्रत का पूर्ण फल तभी प्राप्त होता है जब पूजा शास्त्रोक्त विधि से संपन्न की जाए।

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यदि आप इस बार कान्हा का व्रत रखने जा रहे हैं, तो सबसे पहले सुबह उठकर स्नान-ध्यान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और हाथ में जल, अक्षत व पुष्प लेकर भगवान श्रीकृष्ण के समक्ष व्रत का संकल्प लें। श्रद्धालु अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार निर्जला, फलाहारी या जलाहारी व्रत का संकल्प ले सकते हैं। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों को फलाहारी या सात्विक आहार के साथ ही व्रत रखना चाहिए।

सुबह से लेकर रात तक ऐसे करें पूजा की तैयारी और श्रृंगार

जन्माष्टमी के दिन केवल मध्यरात्रि की पूजा ही नहीं, बल्कि दिनभर का वातावरण भी भक्तिमय होना चाहिए। सुबह सबसे पहले पूजा घर और पूरे आशियाने को अच्छी तरह स्वच्छ करें। इसके बाद लड्डू गोपाल को ताजे जल और गंगाजल से स्नान कराकर सुंदर वस्त्र (पोशाक), मुकुट, बांसुरी और मोरपंख से सजाएं। पूजा स्थल को गेंदे व गुलाब के ताजे फूलों, आम के पत्तों और रंग-बिरंगी लाइटों से सजाकर वहां सुंदर झूला स्थापित करें। दिनभर घर में ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ का जाप, कृष्ण कथा का श्रवण और भजन-कीर्तन करना विशेष पुण्यदायी माना गया है।

पूजा की थाली में आवश्यक सामग्री का होना अति अनिवार्य है। पूजा शुरू करने से पहले बालगोपाल की मूर्ति, पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर), गंगाजल, तुलसी दल, रोली, चंदन, अक्षत, धूप, दीप, रोली, नैवेद्य और कान्हा का अतिप्रिय माखन-मिश्री का प्रसाद तैयार रखें। ध्यान रहे कि श्रीकृष्ण के किसी भी भोग में तुलसी दल (तुलसी का पत्ता) का शामिल होना बेहद जरूरी माना जाता है, बिना इसके कान्हा भोग स्वीकार नहीं करते।

मध्यरात्रि 12 बजे ऐसे कराएं पंचामृत स्नान और लगाएं भोग

जन्माष्टमी की मुख्य पूजा मध्यरात्रि 12 बजे होती है, क्योंकि भगवान का जन्म रात के समय ही हुआ था। ठीक 12 बजे शंखनाद और घंटी की ध्वनि के साथ जन्मोत्सव की शुरुआत करें।

अभिषेक: सबसे पहले बाल गोपाल को खीरे से कटकर (गर्भनाल काटने के प्रतीक के रूप में) बाहर निकालें और पंचामृत व गंगाजल से विधि-विधानपूर्वक अभिषेक कराएं।

श्रृंगार व झूला: अभिषेक के बाद प्रभु को पोंछकर नए वस्त्र पहनाएं, चंदन का तिलक लगाएं और झूले में विराजमान कर प्रेमपूर्वक झुलाएं।

भोग व आरती: कान्हा को माखन-मिश्री, पंचामृत, धनिया की पंजीरी, फल और मिठाइयों का भोग लगाएं। अंत में कपूर और घी के दीपक से महाआरती उतारें और सभी में प्रसाद वितरित करें। अगले दिन पारण के समय व्रत खोलें।

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