Kurukshetra News: जन्माष्टमी पर कुरुक्षेत्र का अलौकिक तमाल वृक्ष बना केंद्र, जानिए राधा-कृष्ण के दिव्य पुनर्मिलन की पौराणिक गाथा

जन्माष्टमी पर कुरुक्षेत्र का अलौकिक तमाल वृक्ष बना केंद्र
Kurukshetra News: महाभारत और श्रीमद्भागवत गीता की पावन उपदेश स्थली कुरुक्षेत्र में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व बेहद हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस खास मौके पर धर्मनगरी स्थित ब्रह्मसरोवर के उत्तरी तट पर बना गौड़िया मठ श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। मंदिर परिसर के ‘श्री श्री राधा कृष्ण मिलन मंदिर’ प्रांगण में एक ऐसा दुर्लभ तमाल वृक्ष खड़ा है, जिसे भक्त केवल पेड़ नहीं बल्कि राधा-कृष्ण के अगाध और दिव्य प्रेम का जीवंत प्रमाण मानते हैं।
देश-विदेश से कुरुक्षेत्र पहुंचने वाले तीर्थयात्री भगवान के दर्शन के साथ-साथ इस पवित्र तमाल वृक्ष की परिक्रमा करना नहीं भूलते। धार्मिक ग्रंथों और लोक मान्यताओं के अनुसार, यह स्थान राधा-कृष्ण के पुनर्मिलन की उस पावन घड़ी का साक्षी रहा है, जिसका उल्लेख सनातन परंपरा में बड़े ही आदर के साथ किया जाता है।
सूर्य ग्रहण पर हुआ था ऐतिहासिक मिलन, शाखाओं में दिखता है प्राकृतिक आलिंगन
गौड़िया मठ के मुख्य पुजारी भक्ति गौरव गिरी महाराज बताते हैं कि पौराणिक आख्यानों में कुरुक्षेत्र में सूर्य ग्रहण के अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण के आगमन का उल्लेख मिलता है। जब कान्हा ब्रह्मसरोवर में स्नान के लिए कुरुक्षेत्र पधारे थे, तब उनसे मिलने स्वयं राधा रानी भी यहां आई थीं। मान्यता है कि इसी तमाल वृक्ष की शीतल छांव तले दोनों का अलौकिक पुनर्मिलन हुआ था।
पुजारी महाराज के अनुसार, इस वृक्ष की बनावट अपने आप में किसी अद्भुत चमत्कार से कम नहीं है। इसकी शाखाएं ऊपर की ओर बढ़ते हुए एक-दूसरे में इस तरह गुंथी और लिपटी हुई हैं, मानो कोई प्राकृतिक आलिंगनबद्ध स्वरूप हो। सनातन संस्कृति में तमाल वृक्ष का गहरा संबंध भगवान श्रीकृष्ण के श्याम वर्ण से भी जोड़ा जाता है। यही वजह है कि वैष्णव और कृष्ण भक्ति परंपरा में इस वृक्ष का स्थान बेहद पूजनीय है।
कुरुक्षेत्र में मिल रहा वृंदावन के निधिवन जैसा सौभाग्य
आमतौर पर तमाल का वृक्ष आसानी से नहीं मिलता और इसके दर्शन के लिए भक्तों को वृंदावन या निधिवन का रुख करना पड़ता है। हालांकि, कुरुक्षेत्र पहुंचे श्रद्धालु इसे अपना बड़ा सौभाग्य मान रहे हैं। मंदिर में दर्शन करने आए श्रद्धालु राजेश और सुमन का कहना है कि जो पावन अनुभूति और सुख वृंदावन में मिलता है, वही शांति उन्हें कुरुक्षेत्र के इस तमाल वृक्ष के सानिध्य में मिल रही है।
जन्माष्टमी के मौके पर पूरे गौड़िया मठ को रंग-बिरंगी रोशनी और भव्य पुष्प मालाओं से सजाया गया है। मंदिर परिसर में श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं और अलौकिक प्रसंगों को बेहद खूबसूरती से दर्शाया गया है। महापूजा, विशेष अनुष्ठान और हरिनाम संकीर्तन के बीच हजारों भक्त तमाल वृक्ष के पास शीश नवाकर सुख, समृद्धि और भक्ति रस का आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं।
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