August 5, 2026

Kurukshetra News: कुरुक्षेत्र में बारिश से ढहा मकान का लेंटर, किसान दंपती की दर्दनाक मौत

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Kurukshetra News: कुरुक्षेत्र में बारिश से ढहा मकान का लेंटर, किसान दंपती की दर्दनाक मौत

बडोंदी गांव में बारिश बनी काल, 15x15 का लेंटर गिरने से पति-पत्नी की मौत

Kurukshetra News: हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले में मानसून की बारिश एक गरीब परिवार के लिए काल बनकर आई। लाडवा उपमंडल के तहत आने वाले गांव बडोंदी में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते एक मकान का 15×15 फुट का भारी-भरकम लेंटर अचानक भरभराकर नीचे आ गिरा। इस खौफनाक हादसे में कमरे के भीतर सो रहे 50 वर्षीय किसान करनेल सिंह और उनकी 45 वर्षीय पत्नी जसविंद्र कौर की मलबे के नीचे दबने से मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।

मंगलवार की सुबह यह हादसा उस वक्त सामने आया, जब दंपती का बेटा रोजाना की तरह अपने माता-पिता के लिए सुबह की चाय लेकर खेत वाले कमरे पर पहुंचा। जैसे ही वह दरवाजे के पास गया, अंदर का नजारा देखकर उसकी चीख निकल गई। पूरा लेंटर ढहा पड़ा था और उसके माता-पिता मलबे के नीचे बेसुध पड़े थे। बच्चे के रोने-चिल्लाने की आवाज सुनकर आसपास के खेतों और घरों से ग्रामीण तुरंत मौके पर दौड़े।

कटर और हथौड़ों से काटा लेंटर, आधे घंटे की मशक्कत भी न बचा सकी जान

हादसे की सूचना तुरंत लाडवा थाना पुलिस को दी गई, लेकिन पुलिस के पहुंचने से पहले ही गांव के लोगों ने अपने स्तर पर राहत कार्य शुरू कर दिया। ग्रामीणों ने बिना एक पल गंवाए कंक्रीट के लेंटर को तोड़ने के लिए हथौड़ों और लोहे के कटर का इस्तेमाल किया। करीब आधे घंटे की हाड़तोड़ मशक्कत के बाद मलबे को हटाकर करनेल सिंह और जसविंद्र कौर को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। दोनों की सांसें थम चुकी थीं।

घटनास्थल पर पहुंची पुलिस और एंबुलेंस की मदद से दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए एलएनजेपी अस्पताल कुरुक्षेत्र भिजवाया गया। प्राथमिक जांच में सामने आया है कि जिस कमरे में दंपती सो रहे थे, उसकी एक दीवार सीधे खेत की तरफ लगती थी। लगातार कई घंटों से हो रही बारिश के कारण खेत की मिट्टी पूरी तरह से बह गई और दीवार की नींव धंस गई। दीवार के धंसते ही पूरे कमरे की छत एक झटके में नीचे आ गिरी।

आर्थिक तंगी और दुखों का पहाड़, तीन बच्चों के सिर से उठा साया

मृतक करनेल सिंह और उनकी पत्नी जसविंद्र कौर बेहद साधारण पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखते थे। वे दूसरों की जमीन ठेके पर (बटाई) लेकर खेती-बाड़ी करते थे और इसी से अपने परिवार का गुजारा चलाते थे। दंपती अपने पीछे तीन बच्चों—एक बेटा और दो बेटियों को छोड़ गए हैं। अनाथ हुए तीनों बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे गांव में मातम की लहर है।

गांव के देवेंद्र सिंह ने भारी मन से बताया कि इस परिवार पर दुखों का पहाड़ अचानक नहीं टूटा है, बल्कि कुछ ही महीने पहले भी इन पर बड़ा संकट आया था। दंपती की एक बेटी का हाथ चारा काटने वाली मशीन की चपेट में आने से कट गया था। परिवार अभी उस हादसे के दर्द और इलाज के कर्ज से उबर भी नहीं पाया था कि अब बच्चों के सिर से माता-पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया। पुलिस ने मामले में इत्तेफाकिया हादसे की कार्रवाई दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।

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