Ladwa News: कैलाश गोयल, लाडवा। विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) लाडवा में एक विशेष जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आमजन को लीवर में होने वाले इस गंभीर संक्रमण, इसके कारणों, लक्षणों और समय पर उपचार के प्रति सचेत करना था।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी (एसएमओ) डॉ. कृष्णकांत ने कहा कि हेपेटाइटिस एक बेहद खामोश लेकिन जानलेवा बीमारी साबित हो सकती है। मुख्य रूप से वायरल इंफेक्शन के कारण होने वाला यह रोग यदि शुरुआती चरण में न पहचाना जाए, तो आगे चलकर ‘लीवर सिरोसिस’ और ‘लीवर कैंसर’ जैसी लाइलाज जटिलताओं में बदल जाता है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे किसी भी मरीज को रक्त चढ़ाते समय पूरी सुरक्षा जांच सुनिश्चित करें, हमेशा नई व स्टरलाइज्ड सुई (सिरिंज) का ही इस्तेमाल करें, व्यक्तिगत स्वच्छता का ध्यान रखें और हेपेटाइटिस-बी का अनिवार्य रूप से टीकाकरण करवाएं।
अफवाहों और भ्रम से दूर रहने का दिया संदेश
स्वास्थ्य निरीक्षक जसमेर सिंह ने उपस्थित ग्रामीणों और स्वास्थ्य कर्मियों को बीमारी के लक्षणों और बचाव के व्यावहारिक उपायों से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि हेपेटाइटिस से निपटने के लिए समाज से भ्रम और गलत धारणाओं को खत्म करना बेहद जरूरी है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा वर्ष 2026 के लिए निर्धारित थीम “Hepatitis: Let’s Break It Down” का जिक्र करते हुए वक्ताओं ने बताया कि इस अभियान का मकसद जांच और इलाज की राह में आने वाली तमाम मानसिक व सामाजिक बाधाओं को तोड़ना है, ताकि हर व्यक्ति तक समय पर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंच सकें।
ये लक्षण दिखें तो तुरंत कराएं जांच
डॉ. कृष्णकांत ने बताया कि यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय तक पीलिया (जॉन्डिस) की शिकायत रहे, लगातार अत्यधिक थकान महसूस हो, भूख कम लगे या गहरे रंग का पेशाब आए, तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज न करें। ये हेपेटाइटिस के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में बिना देरी किए नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में जाकर जांच करानी चाहिए।
इस मौके पर डॉ. रचना, डॉ. विशाल, डॉ. दिनेश, फार्मासिस्ट राजेश तथा ब्लॉक आशा कोऑर्डिनेटर गीता सहित सीएचसी का समूचा स्टाफ और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।
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