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Mahendragarh : गुणवत्तापूर्ण शोध ज्ञान-परंपरा की प्रगति का आधार- प्रो. राजबीर सिंह

Mahendragarh : गुणवत्तापूर्ण शोध ज्ञान-परंपरा की प्रगति का आधार- प्रो. राजबीर सिंह
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Mahendragarh : हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेवि), महेंद्रगढ़ के मनोविज्ञान विभाग द्वारा भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएसएसआर) द्वारा प्रायोजित 10 दिवसीय शोध पद्धति पाठ्यक्रम का बुधवार को शुभारंभ हुआ।

यह पाठ्यक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टंकेशवर कुमार के मार्गदर्शन एवं नेतृत्व में आयोजित किया जा रहा है। पाठ्यक्रम का उद्देश्य उभरते शोधकर्ताओं की शोध क्षमताओं को सुदृढ़ करना तथा शोध कार्य में पद्धतिगत कठोरता एवं गुणवत्ता को बढ़ावा देना है।

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कार्यक्रम में महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक के प्रो. राजबीर सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर के प्रो. एन. एस. तुंग ने मुख्य वक्तव्य प्रस्तुत किया।

इस अवसर पर हकेवि के कुलसचिव प्रो. सुनील कुमार भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे। हकेवि के डीन, एलुमनी, प्रो. रंजन अनेजा ने पाठ्यक्रम के सफल आयोजन के लिए मार्गदर्शन एवं सहयोग प्रदान किया।

उद्घाटन सत्र में प्रो. राजबीर सिंह ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शोध किसी भी ज्ञान-परंपरा की प्रगति का आधार है। शोधार्थियों को शोध प्रश्न के निर्माण, उपयुक्त शोध अभिकल्प के चयन, आंकड़ों के वैज्ञानिक विश्लेषण तथा निष्कर्षों की तार्किक व्याख्या पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि शोध में पद्धतिगत कठोरता के साथ-साथ नैतिकता, पारदर्शिता और मौलिकता भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने प्रतिभागियों से पाठ्यक्रम का अधिकतम लाभ उठाते हुए अपने शोध कार्य में सीखी गई अवधारणाओं एवं तकनीकों को प्रभावी रूप से लागू करने का आह्वान किया।

आयोजन में मुख्य वक्ता प्रो. एन. एस. तुंग ने अपने वक्तव्य में कहा कि गुणवत्तापूर्ण शोध एक सुदृढ़ वास्तु संरचना की तरह होता है, जिसकी मजबूती उसके आधार और रूपरेखा पर निर्भर करती है।

उन्होंने शोध पद्धति को शोध कार्य की आधारशिला बताते हुए कहा कि एक स्पष्ट शोध प्रश्न, उपयुक्त शोध अभिकल्प, विश्वसनीय आंकड़ा-संग्रह, वैज्ञानिक विश्लेषण और तार्किक निष्कर्ष शोध की गुणवत्ता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने प्रतिभागियों को शोध में जिज्ञासा, आलोचनात्मक चिंतन और वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि शोध का अंतिम उद्देश्य केवल अकादमिक प्रकाशन नहीं, बल्कि नए ज्ञान का सृजन और समाज के समक्ष मौजूद चुनौतियों के समाधान में योगदान देना होना चाहिए।
Mahendragarh : गुणवत्तापूर्ण शोध ज्ञान-परंपरा की प्रगति का आधार- प्रो. राजबीर सिंह

हकेवि के कुलसचिव प्रो. सुनील कुमार ने कहा कि शोध की गुणवत्ता केवल विषय के चयन पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उसकी वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित पद्धति पर भी उतनी ही निर्भर होती है। शोधार्थियों के लिए शोध पद्धति की स्पष्ट समझ विकसित करना अत्यंत आवश्यक है, ताकि वे अपने शोध कार्य को विश्वसनीय, प्रासंगिक और समाजोपयोगी बना सकें।

उन्होंने कहा कि इस प्रकार के पाठ्यक्रम शोधार्थियों को शोध की बुनियादी अवधारणाओं से लेकर उन्नत पद्धतियों तक व्यावहारिक समझ प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने मनोविज्ञान विभाग को इस महत्वपूर्ण अकादमिक पहल के लिए शुभकामनाएं दीं।
Mahendragarh : गुणवत्तापूर्ण शोध ज्ञान-परंपरा की प्रगति का आधार- प्रो. राजबीर सिंह

यह पाठ्यक्रम मनोविज्ञान विभाग के अध्यक्ष एवं पाठ्यक्रम निदेशक प्रो. विश्वा चौधरी के निर्देशन में आयोजित किया जा रहा है। डॉ. प्रदीप कुमार सह-पाठ्यक्रम निदेशक के रूप में अपनी भूमिका निभा रहे हैं।

पाठ्यक्रम की संकल्पना ‘गुणवत्तापूर्ण शोध की वास्तुकला: शोध पद्धति का आधार एवं रूपरेखा‘ विषय पर आधारित है। उन्होंने बताया कि इस पाठ्यक्रम के लिए 350 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से चयनित 30 प्रतिभागियों का समूह गठित किया गया है। इसमें देश के विभिन्न राज्यों एवं शिक्षण संस्थानों से आए शोधार्थी एवं अन्य प्रतिभागी शामिल हैं।

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