September 23, 2026

Narnaul : नारनौल में आवास फाइनेंस कंपनी से 9.34 लाख रुपये की धोखाधड़ी, दंपती और बैंक के खिलाफ केस दर्ज

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Narnaul : नारनौल में आवास फाइनेंस कंपनी से 9.34 लाख रुपये की धोखाधड़ी, दंपती और बैंक के खिलाफ केस दर्ज

प्रतीकात्मक फोटो

Narnaul : जिले के नारनौल शहर थाना पुलिस ने आवास फाइनेंस कंपनी के साथ 9 लाख 34 हजार 714 रुपये की कथित धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। पुलिस ने कंपनी के मैनेजर की शिकायत पर एक दंपती और बैंक शाखा के खिलाफ बीएनएस (BNS) की सुसंगत धाराओं के तहत केस दर्ज कर आगामी जांच शुरू कर दी है।

क्या है पूरा मामला

आवास फाइनेंस लिमिटेड की नारनौल शाखा के मैनेजर नवल कुमार ने पुलिस अधीक्षक को दी गई शिकायत में बताया कि गांव जाटवास निवासी गीतांजली और उसके पति चरण सिंह ने जनवरी 2025 में कंपनी से संपर्क किया था।

दंपती ने बताया कि उन्होंने नीमकाथाना स्थित इंडिया शेल्टर फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड से आवास ऋण (होम लोन) लिया हुआ है, जिसे वे बैलेंस ट्रांसफर (BT) के जरिए आवास फाइनेंस कंपनी में स्थानांतरित करवाना चाहते थे। इसके बाद कंपनी ने उनका लोन मंजूर कर लिया।

चेक दूसरी कंपनी में जमा न करवाकर बैंक में लगवाया

शिकायत के अनुसार, 28 जनवरी 2025 को 9,34,714 रुपये का लोन मंजूर करते हुए इंडिया शेल्टर फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड के नाम से चेक जारी किया गया था। यह चेक दंपती को इस सख्त हिदायत के साथ दिया गया था कि वे इसे संबंधित फाइनेंस कंपनी में जमा करवाकर पुराना ऋण चुकता करेंगे और वहां गिरवी रखे अपने दस्तावेज वापस लाकर आवास फाइनेंस कंपनी में जमा करवाएंगे।

लेकिन जांच में सामने आया कि दंपती ने न तो चेक संबंधित फाइनेंस कंपनी में जमा कराया और न ही पुराने लोन के दस्तावेज वापस लिए। जब आवास फाइनेंस कंपनी ने इंडिया शेल्टर फाइनेंस से संपर्क किया, तब पता चला कि उनके पास ऐसा कोई चेक पहुंचा ही नहीं है।

बैंक की मिलीभगत और फर्जी खाते का आरोप

जांच में खुलासा हुआ कि वह चेक नारनौल स्थित इंडसइंड बैंक में कथित तौर पर इंडिया शेल्टर फाइनेंस कॉरपोरेशन के नाम से खोले गए एक फर्जी या मिलते-जुलते खाते में क्लियर करवा लिया गया। कंपनी ने आरोप लगाया कि बैंक ने खाता खोलते समय संबंधित संस्था के अस्तित्व और वैधता की उचित जांच नहीं की, जिससे कंपनी को बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।

पहले भी हुई थी शिकायत

कंपनी ने इससे पहले मामले की शिकायत पुलिस अधीक्षक कार्यालय में दी थी, जिसे जांच के लिए महावीर चौकी और आर्थिक अपराध शाखा (Economic Offences Wing) को भेजा गया था। अब पुलिस ने सभी पहलुओं की गहनता से जांच करने के बाद मामला दर्ज कर लिया है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।

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