Narnaul: जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव एवं मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी नीलम कुमारी की अध्यक्षता में आज एक महत्वपूर्ण समन्वय बैठक का आयोजन किया गया। इस मौके पर एसडीएम हरविंदर सिंह भी मौजूद थे।
बैठक का मुख्य उद्देश्य ‘विधवा सेल’ और ‘मॉडल प्रॉसिक्यूशन स्कीम’ के प्रभावी क्रियान्वयन, समीक्षा और विभिन्न विभागों के बीच आपसी सामंजस्य को मजबूत करना है, ताकि जरूरतमंदों व पीड़ितों को समयबद्ध न्याय और प्रशासनिक सहायता मिल सके।
बैठक के दौरान सीजेएम नीलम कुमारी ने कहा कि विधवाओं एवं असहाय महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करना और उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाना प्राथमिकता है। इसके साथ ही मॉडल प्रॉसिक्यूशन स्कीम के तहत सचिव ने कहा कि केवल बच्चे को ट्रेस करना ही काफी नहीं है, बल्कि बरामदगी के बाद बच्चे की मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग और उसके सुरक्षित पुनर्वास की व्यवस्था करना अनिवार्य है। यदि बच्चा किसी प्रकार के अपराध या बाल श्रम का शिकार पाया जाता है, तो उसे पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना के तहत वित्तीय व कानूनी सहायता भी दिलाई जाएगी।
उन्होंने कहा कि गुमशुदा बच्चे समाज की सबसे संवेदनशील स्थिति में होते हैं। पुलिस, न्यायपालिका और सामाजिक संस्थाओं का यह प्राथमिक कर्तव्य है कि हर लापता बच्चे को सुरक्षित उसके परिवार तक पहुंचाया जाए। इस संशोधित योजना के तहत किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। साथ ही उन्होंने विधवा सेल की मुख्य सेवाएं व कार्यों के बारे में जानकारी दी।
सीजेएम ने बताया कि संपत्ति व भरण-पोषण अधिकार के तहत
पति की मृत्यु के बाद ससुराल पक्ष द्वारा संपत्ति से बेदखल करने या हक न देने पर मुफ्त वकील और कानूनी सहायता प्रदान करना है। हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम व घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम के तहत त्वरित अदालती कार्यवाही।
सरकारी पेंशन व सामाजिक सुरक्षा के तहत विधवा पेंशन, पारिवारिक लाभ योजना और अन्य सरकारी सहायता योजनाओं के लिए दस्तावेज (जैसे मृत्यु प्रमाण पत्र, आधार, पहचान पत्र) बनवाने में मदद करना है। निराश्रित महिलाओं को सुरक्षित आश्रय गृहों से जोड़ना और कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से स्वावलंबी बनाना है।
सीजेएम ने उपस्थित अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र में कानूनी व सामाजिक योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू करने के निर्देश दिए।
इस अवसर पर विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद थे।
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