Narnaul Viral News: नारनौल में SBI के मुख्य बैंक मैनेजर की अनोखी पहल: हफ्ते में दो दिन साइकिल चलाकर पहुंच रहे दफ्तर
नारनौल में SBI के मुख्य बैंक मैनेजर की अनोखी पहल: हफ्ते में दो दिन साइकिल चलाकर पहुंच रहे दफ्तर
Narnaul Viral News: “समाज में अगर कोई बड़ा बदलाव देखना चाहते हैं, तो उसकी शुरुआत अपने घर और खुद से करनी होती है।” इस कहावत को नारनौल में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की मुख्य शाखा के प्रबंधक देवेंद्र सिंह ने पूरी तरह चरितार्थ कर दिखाया है। बढ़ती गाड़ियों के धुएं और बिगड़ते पर्यावरण के बीच उन्होंने एक ऐसी सादगी भरी पहल की है, जो पूरे शहर में चर्चा का विषय बनी हुई है। देवेंद्र सिंह ने सप्ताह में कम से कम दो दिन अपने घर से दफ्तर तक का सफर साइकिल से तय करने का संकल्प लिया है, जिसे देखकर अब शहर के युवा और छात्र भी उनसे प्रेरणा ले रहे हैं।
“आईआईटी और डिफेंस अकादमियों में भी साइकिल ही सहारा”
बैंक प्रबंधक देवेंद्र सिंह का मानना है कि आज की आपाधापी भरी जीवनशैली में शारीरिक रूप से सेहतमंद रहना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। ऐसे में दैनिक दिनचर्या में साइकिल को शामिल करना न केवल सेहत सुधारने का सबसे आसान तरीका है, बल्कि यह शहर में बढ़ते ट्रैफिक और प्रदूषण की समस्या का भी एक टिकाऊ समाधान है।
युवाओं का मार्गदर्शन करते हुए उन्होंने कहा, “देश के शीर्ष शिक्षण संस्थानों जैसे आईआईटी, आईआईएम और भारतीय रक्षा अकादमियों में भी परिसर के भीतर आवाजाही के लिए साइकिल का ही इस्तेमाल किया जाता है। जब देश की सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाएं साइकिल चला सकती हैं, तो हमारे युवाओं को भी अपनी गाड़ियां छोड़ साइकिल अपनाने में झिझक नहीं होनी चाहिए।”
‘राइड टू रीड’ मुहिम का जादू, पुस्तकालय आने वाले छात्रों ने छोड़ी बाइक
बैंक मैनेजर की इस जमीनी सोच का असर शहर में दिखने भी लगा है। उनकी ‘राइड टू रीड’ मुहिम से प्रेरित होकर जिला पुस्तकालय में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने आने वाले कई विद्यार्थियों ने अपनी मोटरसाइकिलें घर खड़ी कर साइकिल से आना शुरू कर दिया है। पढ़ाई के साथ-साथ छात्रों में आए इस पर्यावरण-प्रेमी बदलाव की हर तरफ सराहना हो रही है।
पुस्तकालय में बनवा दिया साइकिल स्टैंड और वाटर कूलर
सराहनीय बात यह भी है कि देवेंद्र सिंह सिर्फ बातों तक सीमित नहीं रहे। पुस्तकालय में पढ़ाई के लिए आने वाले दूर-दराज के छात्रों की परेशानियों को देखते हुए उन्होंने व्यक्तिगत प्रयास कर परिसर में पीने के ठंडे पानी की व्यवस्था कराई। इसके अलावा, छात्रों की साइकिलें सुरक्षित खड़ी रह सकें, इसके लिए स्टैंड जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने में भी अहम योगदान दिया। उनकी यह छोटी सी शुरुआत आज नारनौल शहर के लिए एक बड़ी और प्रेरणादायक मिसाल बन चुकी है।
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