NEET Topper: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मंगलवार को चंडीगढ़ में नीट यूजी (NEET UG) 2026 में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 2 हासिल कर प्रदेश का नाम रोशन करने वाले होनहार छात्र पांशुल बंसल से खास मुलाकात की। सीएम सैनी ने पांशुल को उनकी इस अभूतपूर्व सफलता पर बधाई दी और पुष्पगुच्छ व स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने पांशुल के समर्पण, अनुशासन और लगन की दिल खोलकर तारीफ करते हुए उनके उज्ज्वल और समृद्ध भविष्य की कामना की।
मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि पांशुल की यह बड़ी उपलब्धि हरियाणा की युवा पीढ़ी के लिए एक बहुत बड़ा मार्गदर्शन और प्रेरणा का जरिया बनेगी। उन्होंने भरोसा जताया कि पांशुल आने वाले समय में चिकित्सा के क्षेत्र में उत्कृष्ट सेवाएं प्रदान कर न केवल हरियाणा बल्कि पूरे देश का मान बढ़ाएंगे। सीएम ने कहा कि यह ऐतिहासिक कामयाबी उनकी वर्षों की अटूट लगन, कड़ी मेहनत और पक्के इरादे का ही मीठा फल है।
फरीदाबाद से दिल्ली का सफर और पेरेंट्स का अटूट सपोर्ट
फरीदाबाद से ताल्लुक रखने वाले पांशुल की इस सफलता के पीछे उनके दिन-रात के सफर की कहानी भी छिपी है। उन्होंने दिल्ली की कैलाश कॉलोनी स्थित समर फील्ड स्कूल से अपनी 12वीं की पढ़ाई पूरी की और साथ ही दिल्ली से ही नीट की कोचिंग भी ली। अपनी तैयारी के दिनों में पांशुल रोज फरीदाबाद से दिल्ली आते-जाते थे।
पांशुल ने अपनी इस यात्रा के बारे में बात करते हुए बताया कि उनके माता-पिता ने तैयारी के हर पड़ाव पर उनका सबसे मजबूत सहारा बनकर साथ निभाया। उन्होंने साझा किया कि जब कभी मॉक टेस्ट या प्रैक्टिस पेपर्स में कम नंबर आते थे, तो उनके माता-पिता ने कभी उन पर दबाव नहीं डाला और न ही कभी डांट लगाई, बल्कि हर बार उनके मनोबल को बढ़ाते हुए और बेहतर करने की हिम्मत दी।
‘किताबी कीड़ा’ बनने के बजाय अपनाया बैलेंस अप्रोच
अक्सर यह माना जाता है कि नीट जैसी कठिन परीक्षा निकालने के लिए सब कुछ छोड़कर सिर्फ किताबों में खो जाना पड़ता है, लेकिन पांशुल ने इस सोच को पूरी तरह से खारिज कर दिया। पांशुल का कहना है कि उन्होंने अपनी तैयारी के दौरान खुद को कमरे में बंद नहीं किया और न ही बाहरी दुनिया से पूरी तरह कट आउट हुए।
वे खाली समय में रिलैक्स करने के लिए यूट्यूब और एनिमेशन वीडियो देखा करते थे। इतना ही नहीं, हर तीन महीने में जब भी कोई बड़ा टेस्ट खत्म होता था, तो वे अपने दोस्तों के साथ बाहर घूमने जाते थे और कभी-कभार पार्टी भी करते थे। पांशुल का साफ मानना है कि घंटों पढ़ाई करने से ज्यादा जरूरी यह है कि पढ़ाई के बीच में दिमाग को तरोताजा (मेंटल फ्रेशनेस) रखा जाए, जिससे फोकस और एफिशिएंसी दोनों बनी रहती हैं।

