Nepal Flood: नेपाल में बाढ़ से भारी तबाही, 175 मौतें, तिब्बत में 558 लोग लापता, बिहार-यूपी के कई जिलों में बाढ़ का अलर्ट

नेपाल में बाढ़ से भारी तबाही, 175 मौतें
Nepal Flood: नेपाल-तिब्बत सीमा पर बीते बुधवार की सुबह अचानक आई बाढ़ ने रासुवा, नुवाकोट और आसपास के इलाकों में भारी तबाही मचा दी। पहाड़ से बर्फ, चट्टान और मलबे का बड़ा हिस्सा नदी में गिरने के बाद तेज बहाव आया, जिसने घरों, सड़कों, पुलों और बिजली परियोजनाओं को नुकसान पहुंचाया। नेपाल में अब तक कम से कम 165 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि 826 लोग लापता बताए गए हैं। सीमा के दूसरी तरफ चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी हालात गंभीर हैं। चीनी सरकारी मीडिया के मुताबिक, तिब्बत के ग्यिरोंग इलाके में 558 लोग लापता हैं और 3 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। लापता लोगों में 260 विदेशी नागरिक शामिल हैं।
21 भारतीयों समेत 116 लोगों को बचाया गया
भारी तबाही के बीच नेपाल की सेना ने रासुवा जिले के टिमुरे इलाके से 116 लोगों को सुरक्षित निकाला है। इनमें 95 नेपाली और 21 भारतीय नागरिक शामिल हैं। नेपाली सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियां हेलिकॉप्टरों के जरिए प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को निकाल रही हैं। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने गुरुवार सुबह राहत और बचाव अभियान की समीक्षा की। सरकार के मुताबिक सुबह से ही हवाई बचाव अभियान चलाया जा रहा है और कई हेलिकॉप्टर लगातार प्रभावित इलाकों में भेजे जा रहे हैं।
हालांकि, खराब मौसम, टूटे हुए रास्तों और पहाड़ी इलाकों में लगातार बने जोखिम के कारण रेस्क्यू टीमों के सामने बड़ी चुनौती है। तिब्बत में भी एक संभावित झील और भूगर्भीय जोखिम को लेकर अधिकारियों ने निगरानी बढ़ाई है, जिससे आगे और बाढ़ या भूस्खलन का खतरा बना हुआ है।
पहले भूकंप समझा गया, बाद में लैंडस्लाइड की पुष्टि
बुधवार सुबह सीमा के पास तेज झटका महसूस होने के बाद शुरुआती रिपोर्टों में इसे 4.4 तीव्रता का भूकंप बताया गया था। बाद की जांच में सामने आया कि पहाड़ से बर्फ और चट्टानों का बड़ा हिस्सा टूटकर ल्हेंदे खोला नदी में गिरा, जिससे मलबे के साथ तेज पानी का बहाव पैदा हुआ।
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण यानी USGS ने बाद में स्पष्ट किया कि उस समय कोई भूकंप नहीं आया था। वैज्ञानिक विश्लेषण के मुताबिक ग्लेशियर और चट्टानों के बड़े हिस्से के गिरने से ऐसा भूकंपीय झटका पैदा हुआ, जिसकी ऊर्जा करीब 5.2 तीव्रता के भूकंप जैसी थी। यानी भूकंप की वजह से लैंडस्लाइड नहीं हुआ, बल्कि बड़े लैंडस्लाइड ने जमीन में भूकंप जैसा झटका पैदा किया।
भारत में बिहार और यूपी तक बढ़ा बाढ़ का खतरा
नेपाल में आई इस बाढ़ का असर भारत में भी दिखाई दे सकता है। नेपाल से आने वाला पानी त्रिशूली नदी के रास्ते गंडक नदी तक पहुंच सकता है, जिससे बिहार के निचले इलाकों में जलस्तर बढ़ने की आशंका है।
पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। सीतामढ़ी और शिवहर पर भी नजर रखी जा रही है। उत्तर प्रदेश के महाराजगंज और कुशीनगर में भी संभावित बाढ़ को देखते हुए अलर्ट जारी किया गया है।
इसका सीधा असर सीमा से लगे भारतीय इलाकों में रहने वाले लोगों पर पड़ सकता है। नदियों का जलस्तर बढ़ने पर निचले इलाकों में जलभराव, सड़क संपर्क बाधित होने और स्थानीय प्रशासन को लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की जरूरत पड़ सकती है।
भारत ने राहत सामग्री भेजी
नेपाल में तबाही के बाद भारत ने राहत और बचाव अभियान में मदद बढ़ाई है। भारतीय वायुसेना के जरिए राहत सामग्री और जरूरी सामान नेपाल भेजा जा रहा है, जबकि भारतीय अधिकारी नेपाल सरकार के साथ लगातार संपर्क में हैं।
भारत की ओर से पहले भी राहत सामग्री नेपाल भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। मौजूदा आपदा में भारतीय नागरिकों के रेस्क्यू के साथ-साथ नेपाल में राहत अभियान को सहायता देना भी प्राथमिकता में है।
आंकड़े लगातार बदल रहे, रेस्क्यू अभियान जारी
नेपाल और तिब्बत में मृतकों और लापता लोगों की संख्या को लेकर अलग-अलग समय पर अलग-अलग आंकड़े सामने आ रहे हैं। नेपाल की ओर से 165 शव बरामद होने की जानकारी दी गई है, जबकि तिब्बत में 558 लोगों के लापता होने की पुष्टि चीनी सरकारी मीडिया ने की है।
इसलिए शुरुआती आंकड़ों को अंतिम नहीं माना जा रहा है। पहाड़ी इलाकों में मलबा हटने और संपर्क बहाल होने के साथ मृतकों तथा लापता लोगों की संख्या में बदलाव हो सकता है। राहत एजेंसियां फिलहाल लोगों को बचाने और प्रभावित इलाकों तक जरूरी सामान पहुंचाने पर फोकस कर रही हैं।
