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Nilokheri News: नीलोखेड़ी HIRD में शुरू हुई पंचायत अधिकारियों की ट्रेनिंग; निदेशक डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान के कड़े तेवर

Nilokheri News: नीलोखेड़ी HIRD में शुरू हुई पंचायत अधिकारियों की ट्रेनिंग; निदेशक डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान के कड़े तेवर

नीलोखेड़ी HIRD में शुरू हुई पंचायत अधिकारियों की ट्रेनिंग

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GGaganpreet Kaurकंटेंट क्रेडिट: महाबीर मैहला, नीलोखेड़ी

Nilokheri News: नीलोखेड़ी। ग्रामीण विकास के दावों और हकीकत के बीच के अंतर को पाटने के लिए अब तकनीकी पहरेदारी को मजबूत किया जा रहा है। नीलोखेड़ी स्थित हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान (एचआईआरडी) में मंगलवार को एक बेहद महत्वपूर्ण तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का शंखनाद हुआ। वीबी-जी राम जी के अंतर्गत ‘युक्तधारा पोर्टल’ के जरिए ग्राम पंचायतों की जीआईएस (भौगोलिक सूचना प्रणाली) आधारित वैज्ञानिक निगरानी विषय पर आयोजित इस शिविर में सिरसा और जींद जिलों के विकास खंडों से आए अधिकारियों व कर्मचारियों ने हिस्सा लिया।

शिविर के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए संस्थान के निदेशक डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने ग्रामीण विकास की पुरानी कार्यशैली पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने बेहद साफ लहजे में कहा, “अब वह दौर चला गया जब केवल फाइलों में काम दिखाकर इतिश्री कर ली जाती थी। अब केवल विकास कार्य करवाना ही हमारा लक्ष्य नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसी परिसंपत्तियों (एसेट्स) का निर्माण करना है जो गुणवत्ता के पैमाने पर खरी उतरें और लंबे समय तक टिकी रहें।”

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‘100 में से 100 अंक’ लाने की मानसिकता से काम करे टीम

डॉ. चौहान ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाले विकास कार्यों की तकनीकी निगरानी समय की सबसे बड़ी मांग है। जब तक योजनाओं का क्रियान्वयन पारदर्शी और वैज्ञानिक तरीके से नहीं होगा, तब तक देश के गांवों का ढांचागत सुधार संभव नहीं है। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों से एक कॉरपोरेट टीम की तरह एकजुट होकर काम करने की अपील की।

निदेशक ने दोटूक कहा कि पूरे साल का एक एडवांस रोडमैप तैयार किया जाएगा, ताकि आखिरी वक्त में आपाधापी न मचे। उन्होंने उपस्थित अधिकारियों से कहा, “हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करना होगा। हमें अपने काम में ‘100 में से 100 अंक’ हासिल करने की जिद के साथ आगे बढ़ना होगा।”

इससे पूर्व, कार्यक्रम के समन्वयक और संस्थान के सहायक आचार्य कमलदीप सांगवान ने निदेशक डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान का स्वागत किया। सांगवान ने बताया कि तीन दिनों तक चलने वाले इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य जमीन पर होने वाले विकास कार्यों की सैटेलाइट और वैज्ञानिक तरीकों से निगरानी करना है, ताकि भ्रष्टाचार पर लगाम लगाई जा सके और सरकारी पैसे का सही उपयोग हो।

विकसित भारत का रास्ता ग्राम पंचायतों से ही होकर जाता है: परवेज जाफ़र

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान (एनआईआरडीपीआर), हैदराबाद से आए मुख्य तकनीकी विशेषज्ञ परवेज जाफ़र ने प्रतिभागियों को आधुनिक तकनीक के गुर सिखाए। जाफ़र ने अपने संबोधन में कहा, “विकसित भारत का सपना तब तक साकार नहीं हो सकता, जब तक देश की ग्राम पंचायतें तकनीकी रूप से सुदृढ़ और पारदर्शी नहीं होंगी।” उन्होंने जीआईएस आधारित योजना निर्माण और ‘युक्तधारा पोर्टल’ के जरिए परिसंपत्तियों की मैपिंग (मैप पर दर्ज करना) को जवाबदेही तय करने का सबसे बड़ा हथियार बताया।

ट्रेनिंग के दौरान जींद और सिरसा से आए प्रतिभागियों को व्यावहारिक रूप से कंप्यूटर और टैबलेट पर एसेट मैपिंग और लाइव मॉनिटरिंग की ट्रेनिंग दी गई। प्रतिभागियों का मानना था कि इस तकनीक के पूरी तरह लागू होने के बाद गांवों में होने वाले सड़क, नाली, स्कूल या चौपाल निर्माण के कार्यों में घालमेल की गुंजाइश खत्म हो जाएगी।

इस मौके पर एचआईआरडी के डॉ. सुशील मेहता, हैदराबाद से आए सलाहकार गुरविंदर सिंह, अनु शर्मा, सुनील कुमार, रवीना, रेखा सहित दोनों जिलों के पंचायत एवं विकास विभाग के अनेक अधिकारी व कर्मचारी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

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