Ambala 1857 Martyrs Memorial: देश के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में 5 नवंबर का दिन एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज होने जा रहा है। अंबाला छावनी में 1857 की पहली क्रांति के अमर शहीदों की स्मृति में तैयार किए गए भव्य राष्ट्रीय शहीद स्मारक का केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह उद्घाटन करेंगे। लगभग 800 करोड़ रुपये की लागत से बने इस विशाल स्मारक के पीछे हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज का करीब तीस वर्षों का अटूट संघर्ष और संकल्प जुड़ा हुआ है।
उद्घाटन के उपरांत अंबाला के गांधी ग्राउंड में एक विशाल जनसभा का आयोजन भी किया जाएगा, जहां देश के वीरों को नमन किया जाएगा।
‘मेरठ से दस घंटे पहले अंबाला में बजा था आजादी का बिगुल’
इस ऐतिहासिक परियोजना की परिकल्पना को जमीन पर उतारने वाले अनिल विज का मानना है कि इतिहास में 1857 की क्रांति के कई ऐसे नायक छूट गए, जिन्हें उनका वास्तविक सम्मान नहीं मिला। एक विशेष बातचीत में उन्होंने बताया कि इतिहास की किताबों में अक्सर यही पढ़ाया गया कि आजादी की लड़ाई कांग्रेस ने लड़ी, जबकि कांग्रेस की स्थापना से बहुत पहले 1857 में देशभर में सशस्त्र क्रांति हो चुकी थी।
उनके पास मौजूद दस्तावेजों और गजेटियर के अनुसार, मेरठ में विद्रोह होने से लगभग नौ से दस घंटे पहले यानी सुबह नौ बजे ही अंबाला छावनी की 60वीं और 5वीं नेटिव इन्फेंट्री ने आजादी की हुंकार भर दी थी। उन वीरों को पेड़ों से बांधकर गोलियां मारने और कोल्हू में पिसवाने जैसी अमानवीय यातनाएं दी गईं, जिन्हें अब इस स्मारक के जरिए देश के सामने लाया जा रहा है।
68 मीटर ऊंचा कमल टॉवर और आधुनिक डिजिटल तकनीक का संगम
करीब 800 करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह स्मारक केवल एक इमारत नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक और इतिहास का अनूठा संगम है। इसमें 68 मीटर ऊंचा कमल के फूल के आकार का एक भव्य मेमोरियल टॉवर बनाया गया है, जिसके भीतर भी संग्रहालय और हाई-स्पीड लिफ्ट की व्यवस्था की गई है।
इस पर उठे राजनीतिक सवालों का जवाब देते हुए विज ने स्पष्ट किया कि कमल केवल किसी राजनीतिक दल का प्रतीक नहीं, बल्कि 1857 की क्रांति का ऐतिहासिक प्रतीक था, जब एक रेजीमेंट से दूसरी रेजीमेंट तक ‘कमल और रोटी’ भेजकर संघर्ष का संदेश दिया जाता था।
इस स्मारक को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यहां आने वाले पर्यटकों को पूरी क्रांति को समझने में करीब छह घंटे का समय लगेगा। इसमें बिहार, पंजाब समेत देश के अन्य हिस्सों के शहीदों की गाथाओं को भी जगह दी गई है। इसके अलावा, करीब ढाई हजार लोगों की क्षमता वाला ओपन एयर थिएटर और शाम के वक्त इतिहास को जीवंत करने वाला लाइट, लेजर एंड साउंड शो इसकी मुख्य विशेषताओं में शामिल हैं।
नई पीढ़ी को इतिहास से जोड़ने की अनूठी पहल
सरकार की योजना के तहत 6 नवंबर से यह स्मारक आम जनता और विशेष रूप से विद्यार्थियों के लिए खोल दिया जाएगा। हरियाणाभर के स्कूलों और शिक्षण संस्थानों के बच्चों को यहां लाकर वास्तविक इतिहास से रूबरू कराया जाएगा, ताकि वे जान सकें कि आज जो खुली हवा में वे सांस ले रहे हैं, उसके पीछे कितने पुरखों का बलिदान रहा है।
मंत्री अनिल विज ने कहा कि यह स्मारक किसी व्यक्ति या पार्टी की उपलब्धि नहीं, बल्कि उन हुतात्माओं के चरणों में देश की सच्ची श्रद्धांजलि है। अंबाला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर एक विशिष्ट पहचान दिलाने वाले इस केंद्र में विदेशी मेहमानों के आगमन के लिए हेलीपैड की सुविधा भी विकसित की गई है।

