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Palwal Land Scam: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश पर खुला 1,856 कनाल जमीन का घोटाला, मचा हड़कंप

AAmandeep Singh
Palwal Land Scam: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश पर खुला 1,856 कनाल जमीन का घोटाला, मचा हड़कंप

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश पर खुला 1,856 कनाल जमीन का घोटाला, मचा हड़कंप

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Palwal Land Scam: हरियाणा में सरकारी और शामलात जमीनों पर भू-माफिया और अफसरों की सांठगांठ से कब्जे का एक और सनसनीखेज मामला उजागर हुआ है। पलवल जिले के होडल तहसील अंतर्गत आने वाले फास्टकूनगर गांव में सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज 1,856 कनाल 13 मरला शामलात जमीन को कागजों की हेराफेरी कर निजी पक्षों को बेचने का बड़ा खेल सामने आया है। कुल 11 फर्जी वसिकाओं (रजिस्ट्रियों) के जरिये करोड़ों रुपये की इस सरकारी संपत्ति का स्वामित्व निजी खरीदारों के नाम चढ़ा दिया गया।

इस पूरे फर्जीवाड़े की जांच कर रही राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने अब अदालत में अंतिम चार्जशीट दाखिल कर दी है। चार्जशीट में तत्कालीन तहसीलदारों से लेकर पटवारी और गिरदावर तक राजस्व विभाग के 7 अधिकारियों-कर्मचारियों और 105 ग्रामीणों व खरीदारों समेत कुल 112 लोगों को नामजद किया गया है।

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दो चरणों में हुआ फर्जीवाड़ा: 11 रजिस्ट्रियों से बदला सरकारी जमीन का मालिकाना हक

एसीबी की तफ्तीश में यह बात साफ हुई है कि यह पूरा घोटाला किसी एक दिन में नहीं, बल्कि बेहद सुनियोजित तरीके से दो अलग-अलग चरणों में अंजाम दिया गया। घोटाले का पहला चरण 10 जुलाई 2006 से 29 सितंबर 2006 के बीच चला, जब महज 81 दिनों के भीतर 6 रजिस्ट्रियां कराई गईं। इसके बाद दूसरा चरण 8 जून 2007 से 27 जुलाई 2007 के बीच 49 दिनों तक चला, जिसमें 5 और रजिस्ट्रियां की गईं।

इन 11 फर्जी रजिस्ट्रियों के सहारे शामलात जमीन को गांव के कुछ लोगों का बताकर अलग-अलग खरीदारों के नाम ट्रांसफर कर दिया गया। केवल रजिस्ट्रियां ही नहीं कराई गईं, बल्कि राजस्व विभाग की मिलीभगत से आनन-फानन में कागजों पर इंतकाल (म्यूटेशन) भी दर्ज कर दिए गए। इस पूरे खेल से सरकार को भारी राजस्व का चूना लगा और पंचायती जमीन निजी हाथों में चली गई।

तत्कालीन 3 तहसीलदार समेत 7 अधिकारी-कर्मचारी बने आरोपी

एसीबी द्वारा अदालत में पेश की गई चार्जशीट ने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नामजद आरोपियों में तत्कालीन तहसीलदार होडल नरेश जोवल, मनबीर सिंह और ओम प्रकाश गोदारा शामिल हैं। इसके अलावा तत्कालीन रजिस्ट्री क्लर्क भगवान सिंह और भूप सिंह, तत्कालीन पटवारी ताराचंद तथा तत्कालीन गिरदावर वीरेंद्र सिंह को भी पद के दुरुपयोग और आपराधिक साजिश का आरोपी बनाया गया है।

जांच एजेंसी के अनुसार, तहसीलदारों ने पंजीकरण प्रक्रिया में जानबूझकर ढिलाई बरती, रजिस्ट्री क्लर्कों ने अवैध सेल डीड तैयार की और पटवारी-गिरदावर ने नियमों को ताक पर रखकर इंतकाल दर्ज कर दिया।

हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद खुला घपले का पिटारा

इस पूरे मामले की जड़ें वर्ष 2010 और 2011 में पलवल जिले में हुई शामलात जमीनों की अवैध बिक्री से जुड़ी हैं। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में दाखिल एक याचिका में पलवल के अतवा गांव की शामलात जमीन को क्रिस्टल बायोटेक नामक कंपनी द्वारा खरीदे जाने का मामला सामने आया था। हाईकोर्ट की सख्ती के बाद 14 मई 2012 को गुरुग्राम एसीबी थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी।

मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने निर्देश दिया था कि यदि जिले में अन्य स्थानों पर भी शामलात जमीन की रजिस्ट्रियों में ऐसी ही गड़बड़ी पाई जाती है, तो उनकी भी गहराई से जांच की जाए। इसी आदेश की अनुपालना में जब जून 2012 से जांच का दायरा बढ़ा तो फास्टकूनगर का यह 1,856 कनाल का घोटाला बेनकाब हुआ। लंबी जांच और अफसरों की संलिप्तता के साक्ष्य मिलने के बाद अंततः 10 नवंबर 2022 को फरीदाबाद एसीबी थाने में नया मामला दर्ज कर अब चार्जशीट दाखिल की गई है।

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