चेन्नई: तमिलनाडु में सत्तारूढ़ द्रविड मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के नेतृत्व वाले धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन (एसपीए) ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के स्थान पर लाए गए केंद्र सरकार के नए कानून के विरोध में 24 दिसंबर को राज्यव्यापी प्रदर्शन का ऐलान किया है। गठबंधन दल के जिला सचिवों, विधायकों, स्थानीय निकाय प्रतिनिधियों के साथ-साथ एक सौ दिन के रोजगार सुनिश्चित करने वाली मौजूदा योजना के लाभार्थियों को भी आंदोलन में शामिल किया जाएगा। गठबंधन ने वर्ष 2025 के ‘‘विकसित भारत- रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) विधेयक’’ (वीबी- जी राम जी विधेयक) को वापस लेने की मांग की है। नये विधेयक के तहत मनरेगा को समाप्त कर नयी ग्रामीण रोजगार व्यवस्था लागू करने का प्रावधान किया गया है।


गठबंधन ने एक विज्ञप्ति जारी कर कहा, ‘‘चौबीस दिसंबर को सुबह 10 बजे राज्य की राजधानी में तथा पार्टी के सभी स्थानीय स्तरों पर 100-दिवसीय रोजगार योजना के लाभार्थियों को जुटाकर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।’’ विज्ञप्ति में कहा गया, ‘‘आइए, तमिलनाडु के लोगों को धोखा दे रही भाजपा-नीत केंद्र सरकार और उसे समर्थन देने वाली अन्नाद्रमुक के खिलाफ आवाज उठाएं।’’ इससे पहले, 18 दिसंबर को तमिलनाडु सरकार ने केंद्र की नयी ग्रामीण रोजगार योजना पर कड़ा ऐतराज जताया था। मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कहा कि प्रस्तावित कानून करोड़ों ग्रामीण गरीबों की आजीविका को खतरे में डाल देगा, खासकर तमिलनाडु जैसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों में, और इससे केंद्र तथा राज्यों के बीच के संबंधों पर भी दबाव पड़ेगा।

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