जोधपुर: कार्यकर्ता और वैज्ञानिक सोनम वांगचुक को पेट दर्द की शिकायत के बाद शनिवार तड़के चिकित्सीय जांच के लिए जोधपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ले जाया गया। अधिकारियों ने बताया कि वांगचुक को पुलिस सुरक्षा के बीच जोधपुर केंद्रीय कारागार से एम्स के आपातकालीन विभाग में लाया गया।



गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग में हुई जांच

अधिकारियों के अनुसार, सोनम वांगचुक ने एम्स के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग में करीब डेढ़ घंटे बिताए, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों ने उनकी जांच की। एम्स सूत्रों ने बताया कि वांगचुक को पेट से जुड़ी समस्याएं लंबे समय से हैं और इसी सिलसिले में वह शुक्रवार को भी जांच के लिए अस्पताल आए थे।



वांगचुक 7 सितंबर 2025 से जेल में बंद हैं 

गौरतलब है कि सोनम वांगचुक 27 सितंबर 2025 से जोधपुर केंद्रीय कारागार में बंद हैं। इस दौरान वह कई बार अपनी बिगड़ती सेहत को लेकर चिंता जता चुके हैं। जेल में रहते हुए उन्हें लगातार पेट दर्द और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की शिकायत रही है।



सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कराई गई जांच 

यह पूरा मामला इस समय उच्चतम न्यायालय के संज्ञान में है। वांगचुक की पत्नी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उनकी चिकित्सा रिपोर्ट दो फरवरी तक पेश करने का आदेश दिया है। इसी के तहत शनिवार सुबह जेल प्रशासन ने उन्हें एम्स लाकर विशेषज्ञ जांच कराई।



वांगचुक के बिगड़ते स्वास्थ्‍य पर कोर्ट की सख्ती 

न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति पीबी वराले की पीठ ने बृहस्पतिवार को सुनवाई के दौरान जोधपुर जेल प्रशासन को निर्देश दिया था कि वांगचुक की जांच किसी सरकारी अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सक, विशेष रूप से गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट, से कराई जाए। कोर्ट ने यह आदेश वांगचुक की लगातार बिगड़ती सेहत को ध्यान में रखते हुए दिया था।



जेल चिकित्सकों की रिपोर्ट पर विवाद

सुनवाई के दौरान राजस्थान सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के. एम. नटराज ने अदालत को बताया कि पिछले चार महीनों में जेल के चिकित्सकों ने वांगचुक की 21 बार जांच की है, और आखिरी जांच 26 जनवरी को की गई थी। हालांकि, वांगचुक की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने इस दावे का विरोध किया। उन्होंने अदालत में कहा कि जेल में उपलब्ध पानी की गुणवत्ता खराब है, जिसके कारण वांगचुक को लगातार पेट दर्द की समस्या हो रही है।



विशेषज्ञ इलाज पर जोर

सुप्रीम कोर्ट ने सिब्बल की दलीलों को गंभीरता से लेते हुए कहा कि मरीज की स्थिति और जरूरत के अनुसार विशेषज्ञ चिकित्सक से उपचार उपलब्ध कराना आवश्यक है। कोर्ट ने साफ किया कि जेल में सामान्य जांच पर्याप्त नहीं है, यदि स्वास्थ्य की स्थिति विशेषज्ञ देखरेख की मांग करती है।



रपोर्ट का इंतजार

अब एम्स द्वारा की गई जांच की विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जिसे निर्धारित समय सीमा के भीतर सुप्रीम कोर्ट में पेश किया जाएगा। इस रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी और चिकित्सीय कार्रवाई तय होने की संभावना है।

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