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Restaurant Service Charge: रेस्टोरेंट बिल में लगने वाला सर्विस चार्ज देना जरूरी है या नहीं? जानिए क्या कहता है सरकारी नियम

Restaurant Service Charge: रेस्टोरेंट बिल में लगने वाला सर्विस चार्ज देना जरूरी है या नहीं? जानिए क्या कहता है सरकारी नियम

रेस्टोरेंट बिल में लगने वाला सर्विस चार्ज देना जरूरी है या नहीं?

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GGaganpreet Kaur

Restaurant Service Charge: सप्ताहांत पर परिवार या दोस्तों के साथ किसी अच्छे रेस्टोरेंट में लजीज खाने का लुत्फ उठाने के बाद जब टेबल पर बिल आता है, तो खाने के दाम और जीएसटी (GST) के अलावा एक और एंट्री सीधे ध्यान खींचती है—वह है ‘सर्विस चार्ज’। अमूमन होटल संचालक कुल बिल का 5 से 10 फीसदी हिस्सा सर्विस चार्ज के रूप में जोड़ देते हैं, जिससे जेब पर अच्छा-खासा अतिरिक्त बोझ पड़ जाता है। ऐसे में ज्यादातर लोग बिना सोचे-समझे इसे कानूनी अनिवार्यता मानकर चुका देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस चार्ज को देना आपकी जेब और मर्जी का अधिकार है, न कि कोई कानूनी मजबूरी? आइए जानते हैं कि इस पर सरकार और कानून क्या कहते हैं।

यह सरकारी टैक्स नहीं, आपकी मर्जी की ‘टिप’ है

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केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के विभाग (Department of Consumer Affairs) के दिशा-निर्देशों पर नजर डालें तो यह पूरी तरह साफ हो जाता है कि सर्विस चार्ज चुकाना या न चुकाना शत-प्रतिशत ग्राहक की इच्छा पर निर्भर करता है। सीधे शब्दों में कहें तो यह कोई सरकारी टैक्स नहीं है, बल्कि रेस्टोरेंट के स्टाफ और उनकी सेवा के बदले दी जाने वाली एक संगठित ‘टिप’ मात्र है। अगर आपको रेस्टोरेंट का खाना पसंद नहीं आया, वेटर का व्यवहार रूखा लगा या उनकी सर्विस में कोई कमी दिखी, तो आप बिल काउंटर पर इस चार्ज को देने से साफ इनकार कर सकते हैं।

बिना पूछे बिल में जोड़ना सीधे तौर पर गैरकानूनी

देश के नियम कायदे कहते हैं कि कोई भी होटल या रेस्टोरेंट प्रबंधन आपकी पूर्व अनुमति के बिना चुपके से या जबरन बिल में सर्विस चार्ज नहीं थोप सकता। गाइडलाइंस के मुताबिक, रेस्टोरेंट को अपने मेन्यू कार्ड की गाइडलाइंस में या फिर प्रवेश द्वार के डिस्प्ले बोर्ड पर बड़े अक्षरों में यह लिखना अनिवार्य है कि उनके यहां सर्विस चार्ज स्वैच्छिक (Optional) है। इसके बावजूद, यदि कोई रेस्टोरेंट ग्राहकों को अंधेरे में रखकर या दबाव बनाकर इसे वसूलता है, तो उसे ‘अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस’ यानी उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन माना जाता है।

होटल अड़ जाए तो चुप न बैठें, यहाँ सिखाएं सबक

कई बार देखा गया है कि ग्राहक के विरोध करने के बावजूद रेस्टोरेंट मैनेजर या स्टाफ बहस पर उतारू हो जाते हैं और बिल से सर्विस चार्ज हटाने में आनाकानी करते हैं। अगर आपके साथ भी ऐसा कोई वाकया पेश आता है, तो विवाद करने के बजाय कानूनी रास्तों का इस्तेमाल करें। आप इन प्रभावी तरीकों से अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं:

नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन: आप अपने मोबाइल से सीधे राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन के टोल-फ्री नंबर 1915 पर कॉल करके संबंधित रेस्टोरेंट की शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

डिजिटल और ऑनलाइन शिकायत: उपभोक्ता मामलों के आधिकारिक नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन (NCH) पोर्टल या उनके ऐप पर जाकर भी बिल की कॉपी के साथ ऑनलाइन शिकायत दर्ज की जा सकती है।

कंज्यूमर फोरम: मामला गंभीर होने या मानसिक उत्पीड़न की स्थिति में आप जिला उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाकर रेस्टोरेंट के खिलाफ हर्जाने का दावा भी ठोक सकते हैं।

रेस्टोरेंट जाने से पहले इन बातों की बांध लें गांठ

एक जागरूक उपभोक्ता होने के नाते कुछ छोटी सावधानियां आपको इस अनचाहे खर्च से बचा सकती हैं। रेस्टोरेंट में बैठते ही ऑर्डर देने से पहले मेन्यू कार्ड पर नीचे बारीक अक्षरों में लिखी नियम और शर्तों को ध्यान से पढ़ लें या वेटर से पहले ही इस बाबत स्थिति स्पष्ट कर लें। खाना खाने के बाद जब फाइनल इनवॉइस आए, तो उसकी हर एक एंट्री को बारीकी से चेक करें। अगर उसमें सर्विस चार्ज जोड़ा गया है, तो आप मैनेजर को बुलाकर उसे तुरंत हटाने का निर्देश दे सकते हैं। इसकी जगह आप चाहें तो अपनी मर्जी से सीधे उस वेटर को नकद (Cash) टिप दे सकते हैं, जिसने आपकी टेबल पर अच्छी सेवा दी हो।

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