Jhajjar News: हरियाणा के झज्जर जिले में सुरक्षा एजेंसियों के कान उस वक्त खड़े हो गए, जब बहादुरगढ़-रोहतक नेशनल हाईवे पर भारी मात्रा में हथियारों की खेप बरामद हुई। एसटीएफ (STF Rohtak Jhajjar News) रोहतक की टीम ने रोहद टोल प्लाजा के पास नाकाबंदी कर दो चमचमाती लग्जरी कारों— टाटा हैरियर (UP 80 FN 8346) और हुंडई ऑरा (UP 24 BL 9209) को घेरकर जांच की।
गाड़ियों की तलाशी ली गई तो पुलिस अधिकारी भी सन्न रह गए। दोनों वाहनों से विभिन्न बोर के कुल 25,000 जिंदा कारतूस और 8 मोबाइल फोन बरामद हुए। मौके से एक महिला समेत 5 आरोपियों को दबोच लिया गया, जो इन कारतूसों से जुड़ा कोई वैध दस्तावेज पेश नहीं कर सके।
बिहार में मिले सुराग से खुली बदायूं गन हाउस और सिरसा कनेक्शन की पोल
डीएसपी शमशेर दहिया के मुताबिक, इस बड़ी कार्रवाई की पटकथा 2 नवंबर को बिहार के भोजपुर जिले में लिखी गई थी। वहां बिहार एसटीएफ ने 19,200 कारतूसों के साथ गिरोह के सरगना चंदन तिवारी समेत तीन तस्करों को पकड़ा था। पूछताछ में आरोपी लल्टू कुमार ने कबूला कि यह खेप यूपी के बदायूं में ‘बदायूं गन हाउस’ चलाने वाले अफीफुद्दीन उर्फ मुन्ना खान से ली गई थी।
तकनीकी जांच में आगे खुलासा हुआ कि मुन्ना खान खुद हरियाणा के सिरसा स्थित ‘महक गन हाउस’ के संचालक विजय गोयल से कारतूसों की यह भारी खेप खरीदकर ले जा रहा था। 3 नवंबर की सुबह बिहार पुलिस ने रोहतक एसटीएफ को सटीक लोकेशन साझा की, जिसके बाद रोहद टोल प्लाजा पर दोनों गाड़ियों को दबोच लिया गया।
पकड़े गए आरोपियों में बदायूं गन हाउस का मालिक व युवती शामिल
पकड़े गए सभी पांचों आरोपी उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले के रहने वाले हैं। इनमें मुख्य सरगना बदायूं के लबेला चौक निवासी 49 वर्षीय अफीफुद्दीन उर्फ मुन्ना खान, मोहल्ला नाहर खान सराय का 33 वर्षीय आसिम रईस, कबूलपुरा का 32 वर्षीय सबलू खान, नाहर सराय का 27 वर्षीय अरबाज अली और जलन सराय की 33 वर्षीया युवती जीनत शामिल हैं। पुलिस जांच में सामने आया है कि टाटा हैरियर गाड़ी आगरा आरटीओ (UP 80) और हुंडई ऑरा कार बुलंदशहर आरटीओ (UP 24) में पंजीकृत है।
तीन राज्यों की पुलिस खंगाल रही गन हाउसों की साठगांठ
इतनी बड़ी संख्या में कारतूसों का सरकारी या लाइसेंसी गन हाउसों से अवैध रास्तों पर निकलना पूरे सुरक्षा तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना असौधा में आर्म्स एक्ट की धारा 25(1-बी)(ए) और 25(8) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। एसटीएफ, यूपी पुलिस और बिहार पुलिस की संयुक्त टीमें अब इस बात का पता लगाने में जुटी हैं कि इतने कारतूस किस गिरोह या मकसद के लिए सप्लाई किए जाने थे और देश में ऐसे कितने और गन हाउस इस नेटवर्क की कड़ियां बने हुए हैं।
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