September 4, 2026

Sirsa News: जम्मू-कश्मीर के राजौरी में सिरसा का लाल सुखचैन सिंह शहीद, गांव कुत्ताबढ़ में राजकीय सम्मान से होगा अंतिम संस्कार

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Sirsa News: जम्मू-कश्मीर के राजौरी में सिरसा का लाल सुखचैन सिंह शहीद, गांव कुत्ताबढ़ में राजकीय सम्मान से होगा अंतिम संस्कार

जम्मू-कश्मीर के राजौरी में सिरसा का लाल सुखचैन सिंह शहीद, गांव कुत्ताबढ़ में राजकीय सम्मान से होगा अंतिम संस्कार

Sirsa News: जम्मू-कश्मीर के राजौरी सेक्टर में तैनात सिरसा जिले के ऐलनाबाद विधानसभा क्षेत्र स्थित कुत्ताबढ़ गांव के जांबाज जवान सुखचैन सिंह (30) देश की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हो गए। शुक्रवार को उनका पार्थिव शरीर सेना के विशेष वाहन से सिरसा लाया जाएगा, जहां से उसे उनके पैतृक गांव कुत्ताबढ़ पहुंचाया जाएगा। दोपहर करीब 12 बजे पूरे सैन्य और राजकीय सम्मान के साथ इस अमर सेनानी का अंतिम संस्कार किया जाएगा।

सैनिक बोर्ड और स्थानीय प्रशासन को जवान के शहीद होने की आधिकारिक सूचना मिलने के बाद से ही गांव में मातम का सन्नाटा पसरा है। कुत्ताबढ़ के सरपंच बेअंत सिंह ने बताया कि इस असह्य दुख की घड़ी में पूरा गांव शहीद के परिवार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है और अंतिम यात्रा के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

10 दिन बाद बेटे का जन्मदिन था, गुरुवार सुबह ही हुई थी परिवार से आखिरी बात

शहीद के छोटे भाई सरबजीत सिंह ने भारी मन से बताया कि अभी दो महीने पहले ही सुखचैन छुट्टी काटकर वापस ड्यूटी पर लौटे थे। गुरुवार सुबह करीब 8 बजे उनकी फोन पर बात हुई थी। तब सुखचैन ने मुस्कुराते हुए कहा था कि वह बिल्कुल ठीक हैं और 10 दिन बाद बेटे के जन्मदिन पर छुट्टी लेकर घर जरूर आएंगे।

लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। गुरुवार दोपहर करीब 1 बजे राजौरी से आए एक फोन ने परिवार की खुशियों को पल भर में बिखेर कर रख दिया। सरबजीत ने बताया, “हम लोग किसी रिश्तेदारी में गए हुए थे, तभी राजौरी से सेना के एक अधिकारी का फोन आया। उन्होंने बस इतना ही कहा— सुखचैन अमर हो गया है।” 10 दिन बाद जिस घर में 5 साल के मासूम आकाशदीप के जन्मदिन की तैयारियां होनी थीं, वहां अब मातम पसरा हुआ है।

2015 में भर्ती हुए थे सुखचैन, 59 इंजीनियरिंग रेजीमेंट में थे तैनात

कंबोज समाज से ताल्लुक रखने वाले सुखचैन सिंह 27 सितंबर 2015 को भारतीय सेना का हिस्सा बने थे। देश सेवा का जज्बा उनमें कूट-कूटकर भरा था। इन दिनों उनकी तैनाती जम्मू-कश्मीर के राजौरी में 59 इंजीनियरिंग रेजीमेंट में थी। सुखचैन के पिता बलविंदर सिंह का पहले ही निधन हो चुका है। परिवार की जिम्मेदारी अब उनकी वृद्ध माता अमर कौर, पत्नी निर्मल कौर और मासूम बेटे पर आ टिकी है।

तीन भाई-बहनों में सुखचैन दूसरे नंबर पर थे। उनके बड़े भाई गांव में ही शैटरिंग का काम करके परिवार का भरण-पोषण करते हैं। करीब 6 साल पहले सुखचैन का विवाह निर्मल कौर के साथ हुआ था। आज जब इस 30 साल के जांबाज का पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटकर गांव पहुंचेगा, तो हर आंख नम होगी और पूरा सिरसा ‘सुखचैन सिंह अमर रहे’ के नारों से गूंज उठेगा।

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