Snakes in Sawan: सावन में क्यों अचानक बढ़ जाते हैं सांप? धार्मिक मान्यता या विज्ञान, जानिए इसके पीछे का सच

सावन में क्यों अचानक बढ़ जाते हैं सांप? धार्मिक मान्यता या विज्ञान
Snakes in Sawan: सावन के आते ही चारों तरफ हरियाली छा जाती है और मौसम सुहाना हो जाता है। भगवान आशुतोष के इस प्रिय महीने में जहां मंदिरों में भक्तों का तांता लगा रहता है, वहीं गांवों से लेकर शहरों तक सांपों के निकलने की खबरें भी अचानक बढ़ जाती हैं। सनातन परंपरा में नागदेवता को भगवान शिव के गले का हार माना गया है और नाग पंचमी जैसे त्योहारों के कारण लोग इसे धार्मिक दृष्टिकोण से जोड़कर देखते हैं। हालांकि, वन्यजीव विशेषज्ञों और पर्यावरण वैज्ञानिकों का मानना है कि सावन में सांपों का बार-बार दिखना किसी चमत्कार या धार्मिक वजह से नहीं, बल्कि पूरी तरह प्राकृतिक चक्र और जीव-विज्ञान पर आधारित है।
बिलों में पानी का भराव और सूखी जगह की तलाश
वैज्ञानिक अध्ययन बताते हैं कि मानसून की पहली बारिश के साथ ही जमीन के भीतर बने सांपों के बिल और बामियां पानी से भर जाते हैं। दम घुटने और डूबने के खतरे से बचने के लिए सांप मजबूरी में बाहर निकलते हैं और किसी सुरक्षित, सूखी व गर्म जगह की तलाश करने लगते हैं। चूंकि सांप ठंडे खून वाले (Cold-blooded) जीव होते हैं, इसलिए वे अपने शरीर के तापमान को नियंत्रित करने के लिए वातावरण की नमी और गर्मी के हिसाब से ठिकाना बदलते रहते हैं। मानसून का अनुकूल तापमान उन्हें सामान्य दिनों की तुलना में अधिक सक्रिय बना देता है।
भोजन की प्रचुरता और प्रजनन काल का प्रभाव
सावन के दौरान केवल सांप ही नहीं, बल्कि मेंढक, चूहे, छिपकलियां और कई तरह के कीट-पतंगे भी बड़ी संख्या में बाहर निकलते हैं। ये सभी जीव सांपों का मुख्य आहार हैं। शिकार की इस सुलभता के कारण सांप भोजन की तलाश में रिहाइशी इलाकों और खेतों के आसपास ज्यादा घूमते नजर आते हैं। इसके अलावा, कई सर्प प्रजातियों का प्रजनन काल भी मानसून के महीनों में ही पड़ता है। साथी की तलाश में उनकी आवाजाही इस दौरान कई गुना बढ़ जाती है।
क्या कहते हैं वैज्ञानिक आंकड़े?
वर्ष 2024 में दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में सांपों की गतिविधियों पर एक व्यापक वैज्ञानिक अध्ययन प्रकाशित हुआ था। इस रिसर्च में सामने आया कि पूरे साल के मुकाबले जुलाई और अगस्त (सावन के महीनों) में सांप दिखने की घटनाएं सबसे ज्यादा दर्ज की गईं। शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि बारिश की मात्रा, हवा में नमी और तापमान का सीधा संबंध सांपों की सक्रियता से है। अतः सावन में सांपों का दिखना आस्था से अधिक प्रकृति के अटल नियमों और जीवों के अस्तित्व की लड़ाई का हिस्सा है।
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