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बुजुर्गों के अधिकारों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: सभी राज्यों से वृद्धाश्रमों, वरिष्ठ नागरिकों को मिलने वाली सुविधाओं पर रिपोर्ट तलब

बुजुर्गों के अधिकारों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, सभी राज्यों से वृद्धाश्रमों, वरिष्ठ नागरिकों को मिलने वाली सुविधाओं पर रिपोर्ट तलब

सभी राज्यों से वृद्धाश्रमों, वरिष्ठ नागरिकों को मिलने वाली सुविधाओं पर रिपोर्ट तलब

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Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सभी राज्यों को वृद्धाश्रमों की स्थापना और वरिष्ठ नागरिकों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं पर ताजा रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने राज्यों में बुजुर्गों के लिए मौजूदा बुनियादी ढांचे और उपलब्ध सुविधाओं की स्थिति जानने के लिए यह जानकारी मांगी है। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची एवं न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ डॉ. अश्विनी कुमार की 2016 में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में बुजुर्गों के कल्याण और संरक्षण से जुड़े उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग की गई है।

 

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चार सप्ताह में देनी होगी रिपोर्ट

पीठ ने अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी से कहा कि वह सभी राज्यों के महाधिवक्ताओं को पत्र भेजकर वृद्धाश्रमों की स्थापना और वहां उपलब्ध आवश्यक सुविधाओं की मौजूदा स्थिति पर रिपोर्ट दाखिल करने को कहें। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्यों को महाधिवक्ताओं को पत्र मिलने की तारीख से चार सप्ताह के भीतर रिपोर्ट दाखिल करनी होगी। इसके जरिए अदालत यह जानना चाहती है कि वरिष्ठ नागरिकों के लिए राज्यों में वास्तविक स्तर पर किस तरह की सुविधाएं उपलब्ध हैं।

 

प्रत्येक जिले में वृद्धाश्रम की मांग

डॉ. अश्विनी कुमार की जनहित याचिका में प्रत्येक जिले में वृद्धाश्रम स्थापित करने की मांग की गई है। इसके साथ ही वरिष्ठ नागरिकों को पर्याप्त पेंशन और वृद्धावस्था में जरूरी चिकित्सा देखभाल उपलब्ध कराने से जुड़े निर्देश लागू करने का अनुरोध किया गया है। याचिका में बुजुर्गों के कल्याण और संरक्षण के लिए मौजूद वैधानिक एवं संवैधानिक सुरक्षा उपायों को प्रभावी तरीके से लागू करने का मुद्दा उठाया गया है। मामला वर्ष 2016 से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।

 

याचिकाकर्ता ने कहा- करोड़ों बुजुर्गों के अधिकारों का मामला

सुनवाई के दौरान डॉ. अश्विनी कुमार ने स्वयं अपना पक्ष रखा। उन्होंने पीठ से मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया और कहा कि यह करोड़ों बुजुर्गों के अधिकारों एवं कल्याण से जुड़ा मामला है। कुमार ने कहा कि अदालत की ओर से समय-समय पर निर्देश दिए जाने के बावजूद मामले पर लंबे समय से सुनवाई नहीं हुई है। उन्होंने बुजुर्गों के लिए किए जाने वाले कल्याणकारी उपायों को प्रभावी ढंग से लागू किए जाने की जरूरत पर जोर दिया।

 

केंद्र ने हाईकोर्ट में मामला भेजने का सुझाव दिया

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने इस मामले को संबंधित उच्च न्यायालयों में स्थानांतरित करने का सुझाव दिया। हालांकि पीठ ने फिलहाल ऐसा करने के बजाय पहले सभी राज्यों से वरिष्ठ नागरिकों के लिए मौजूद बुनियादी ढांचे और सुविधाओं की अद्यतन जानकारी लेने का फैसला किया। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट व्यापक सिद्धांत तय कर सकता है और संबंधित उच्च न्यायालयों से उनके प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए कहा जा सकता है।

 

बुजुर्गों के लिए सुविधाओं की वास्तविक स्थिति सामने आएगी

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब राज्यों को अपने यहां वृद्धाश्रमों की संख्या, उनकी स्थापना और वरिष्ठ नागरिकों को उपलब्ध कराई जा रही आवश्यक सुविधाओं की जानकारी देनी होगी। इससे अदालत के सामने यह स्थिति स्पष्ट हो सकेगी कि बुजुर्गों के लिए उपलब्ध व्यवस्थाएं जमीन पर किस स्तर तक लागू हैं। इस मामले का सीधा असर वरिष्ठ नागरिकों पर पड़ सकता है। वृद्धाश्रम, पेंशन और चिकित्सा देखभाल जैसी सुविधाएं बुजुर्गों के सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी हैं। राज्यों से रिपोर्ट मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट आगे की सुनवाई में इन व्यवस्थाओं को लेकर व्यापक दिशा-निर्देश तय कर सकता है।

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